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अपने बहन के बेटा से चूदाई

दोस्तों
मैं बबिता मिश्रा, उम्र ४४ वर्ष, कद ५’५ इंच, छरहरा बदन, गोल और गद्देदार चूतड तो चूचियां बड़ी बड़ी जिसे ३६ डी साईज की ब्रा में छुपा रखती हूं और मेरे तीन बच्चे हैं, २२ साल का एक बेटा तो १९ और १७ साल की बेटी लेकिन कहते हैं ना कि औरत के जिस्म की भूख कभी नहीं मिटती और फिर संयोग वश एक बार मेरी बड़ी बहन का बेटा विवेक हमसब से मिलने आया, वो भी मेरे बेटा के उम्र का था, कसरती बदन तो कद ६’० फीट साथ ही हेंडसम पर्सनेलिटी। मैं तो अपने पति और बेटियों के साथ सहरसा में रहती हूं तो बेटा बाहर रहकर पढ़ाई कर रहा है, पति तो उच्च विद्यालय में शिक्षक हैं और बेटियां कॉलेज में पढ़ाई करती हैं। विवेक दोपहर में घर आया और मैं पहले से ही उसका इंतजार कर रही थी, उसके आते ही उसे अंदर ले आई फिर वो डाइनिंग हॉल में बैठा तो मैं उसके लिए चाय बनाने गई, आज मैं जानबूझकर बेकलेश ब्लाउज पहन रखी थी साथ में साड़ी और पेटीकोट, मैं चाय बनाई फिर लाकर उसके सामने टेबल पर रखी लेकिन ज्योंहि झुकी मेरी साड़ी की पल्लू सीने से नीचे गिर गई और मेरी बड़ी बड़ी चूचियां ब्लाउज से बाहर झांक रही थी जिसे विवेक गिद्ध दृष्टि से देखने लगा तो मैं झट से साड़ी ठीक की फिर उसके सामने बैठ चाय पीने लगी तो भी विवेक की नजर बार बार मेरी चूचियों पर जा रही थी तो मैं उठकर वहां से चली गई फिर किचन में प्याला रख बाहर निकली ” विवेक तुम इस रूम में कपड़ा बदल लो और बाथरूम पीछे बागान में है
( विवेक उदास भाव में बोला ) ठीक है मौसी ” वो बैग लिए रूम में चला गया और मैं अपने रूम में थी फिर मैं डाइनिंग हॉल में आई और खिड़की की ओर से अंदर देखने लगी तो विवेक अपना बैग खोल उससे कुछ कपड़ा निकाला फिर वो अपना शर्ट उतार खूंटी में टांग दिया और उसका हाथ उसके जींस के बटन पर था जिसे वो खोल पैर से बाहर निकाला, उसको सिर्फ चढ्ढी और बनियान में देख मेरे बदन में आग लग गई वैसे भी पति को मेरे में कोई दिलचस्पी नहीं थी लेकिन ४४ साल की शादीशुदा महिला को कौन अपनी बाहों में लेता है। विवेक आराम से टॉवल लिया फिर वो अपना चढ्ढी उतार दिया तो उसका लन्ड देख मेरा मन डोल गया और मैं उसके लंबे मोटे लन्ड जोकि सुस्त थे को देख अपने ओंठ पर जीभ फेरने लगी फिर वो टॉवल लपेट अपने हाथ में शॉर्ट्स और बनियान लिए बाहर आता तो मैं जाकर सोफा पर बैठ गई ” मौसी बाथरूम किधर है
( मैं उठकर ) आओ बाथरूम दिखा देती हूं ” फिर मैं उसके साथ बागान की ओर आई और उसे बाथरूम दिखाई तो वो बाथरूम चला गया, मैं डाइनिंग हॉल में आई और टी वी देखने लगी, दोपहर का खाना बन चुका था इसलिए आराम से टी वी देख रही थी थोड़ी देर बाद विवेक स्नान कर आया तो मैं बोली ” नाश्ता करोगे या खाना लगा दूं
( विवेक बोला ) खाना ही लगा दीजिए ” तो मैं किचन गई फिर मैं उसके लिए खाना लगाई और डायनिंग टेबल पर खाना रख दी तो वो कुर्सी पर बैठ गया ” मौसी आप खाना नहीं खाएंगी
( मैं बोली ) थोड़ी देर पहले ही नाश्ता की हूं ” विवेक खाना खा रहा था तो मैं बैठकर टी वी देख रही थी और उसकी नजर बार बार मेरी उफान लेती चुचियों पर जा रही थी तो मैं जानबूझकर साड़ी का पल्लू थोड़ा सा हटा दी ताकि वो मेरी चूची के कुछ भाग को देख सके, विवेक खाना खाकर हाथ मुंह धो लिया फिर मेरे पास सोफा पर आकर बैठा, इतना करीब की मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था फिर टी वी देखने लगा लेकिन अनायास ही मेरे कंधे में हाथ डाल गाल चूम लिया, मैं उसकी ओर गुस्से भरी नज़रों से देखी ” क्यों विवेक तुम ये क्या किए
( वो मेरे कंधे पर हाथ रख उसे थोड़ा नीचे किया तो मेरी बूब्स पर उसका हाथ था और वो मेरे गाल चूम लिया ) क्या मौसी, क्यों शरमा रही हैं आपको तो अच्छा लग रहा होगा ” मेरे बूब्स को पकड़ वो ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा तो मैं उसके आगोश में थी फिर मैं ये भूल कर की विवेक मेरी बड़ी बहन का बेटा है उससे लिपट उसे चूमने लगी तो वो मेरे गाल चूमते हुए मेरे ओंठ पर चुम्बन दिया तो मैं उसके छाती से बूब्स को सटाए उसके ओंठ चूम ली और पूछी ” विवेक तेरी कोई गर्ल फ्रेंड है की नहीं
( वो हंस दिया ) हां है लेकिन फिलहाल मैं बेड पर चला आराम करने ” वो उठकर रूम चला गया तो मैं सोफा पर बैठी हुई इस सोच में थी की उसके पास जाऊं या नहीं, मेरे मन में झिझक था तो शर्मीदिगी भी इसलिए अपने रूम जाकर लेट गई और इस इंतजार में थी की शायद विवेक मेरे पास आयेगा लेकिन कुछ देर तक वो नहीं आया तो मैं उठकर उसे खिड़की की ओर से देखने गई, वो करवट लिए लेटा हुआ था तो मैं सोची की अंदर जाकर देखूं वो क्या कर रहा है और ज्योंहि रूम में घुसी तो विवेक मुझे देख मुस्कुराया ” क्या हुआ मौसी खाना खाईं
( मैं बेड के किनारे बैठ गई ) नहीं मुझे कुछ और खाने का मन है ” और फिर मैं उसके ऊपर ही लेटकर उसे चूमने लगी तो वो मेरे पीठ से लेकर चूतड तक को सहलाने लगा, मैं उसके ओंठ चूमते हुए उसके ओंठ पर जीभ फेरने लगी तो विवेक मेरे जीभ मुंह में लिए चूसने लगा और मेरे नग्न पीठ को सहलाने लगा, मैं अब उसके मुंह में जीभ घुसाए चुसवा रही थी फिर खुद से साड़ी को सीने से हटाई तो विवेक मेरी साड़ी को कमर से निकालने लगा जोकि पेटीकोट में घुसा हुआ था, वो जीभ मुंह से निकाल दिया तो मैं उठकर तुरंत ही साड़ी और ब्लाउज निकाल दी तो विवेक बोला ” मौसी पेटीकोट भी निकाल दीजिए
( मैं पेटीकोट निकाल नग्न हो गई तो विवेक मेरे चूची को पकड़ दबाने लगा ) बहुत मस्त है आपकी चूचियां ” और वो उठकर बैठा तो मैं उसके लन्ड के उभार को शॉर्ट्स के ऊपर से पकड़ दबाने लगी ” तुम कपड़ा बदल रहे थे तभी मैं इसको देखी तो मन डोल गया
( वो मेरी चूची को पकड़ दबाने लगा ) तो उसे पेंट से बाहर क्यों ना निकाल लेती ” मैं उसके शॉर्ट्स को कमर से नीचे खिसकाने लगी की वो खुद नंगा हो गया, दोनों नग्न अवस्था में थे और विवेक मुझे बेड पर धकेल दिया तो मैं लेटी हुई थी फिर वो मेरे चूची के ऊपर मुंह किया फिर उसे मुंह में लिए चूसने लगा, मेरी चूची उतनी भी छोटी नहीं थी की उसके मुंह में पूरी तरह समा सके फिर भी विवेक २/३ चूची मुंह में लिए चूस रहा था और मेरे बदन में सिहरन पैदा होने लगी तो चूत में मानो कीड़े रेंग रहे थे ” आह उह उई विवेक चूसो ना तेरी मौसी को मौसा अब देखते तक नहीं
( विवेक चूची मुंह से निकाल दूसरे चूची को पकड़ दबाने लगा ) कोई बात नहीं मौसी
( मैं उसके गाल सहला दी ) मौसी नहीं बबिता बोलो ना ” फिर वो मेरी बाईं चूची मुंह में भर चूसने लगा तो मेरा हाथ उसके जांघों के बीच यानी लन्ड को पकड़े सहलाने लगा जोकि पूरी तरह से टाईट नहीं हुआ था और अब विवेक मेरी जांघो के बीच हाथ फेरने लगा तो मेरी चूत और उसके इर्द गिर्द बाल ही बाल थे, विवेक मुंह से चूची निकाल मेरी ओर देखा ” क्या बबिता नीचे तो क्लीन शेव रखना चाहिए
( मैं बोली ) आखिर किसके लिए क्लीन शेव रखूं तुम्हीं बताओ ” और फिर विगेक मेरी जांघो को फैलाया फिर घुटने के बल बैठ बुर में लन्ड घुसाने लगा तो उसका आधा लन्ड मेरी चूत में था और वो कमर पर हाथ रख धक्का दिया ” आहा उह फट गई मेरी चूत आराम से ” और फिर विवेक चोदता हुआ मेरे बदन पर हाथ फेरने लगा ” बबिता आज जब भी समय मिले अपने चूत की सफाई कर लेना ताकि रात को इसे चाट सकूं ” मैं तो खुश थी की विवेक मेरी चूत चाटेगा और अब मेरे ऊपर वो सवार हुए चोदने लगा तो मैं चूतड उछालना शुरू की तो विवेक का लन्ड मेरी चूत को मजा दे रहा था ” आह उह ओह विवेक मेरी चूत से रस निकलने पर है ” और वो ८-१० धक्का दिया की मेरी चूत से रस निकलने लगा फिर विवेक लन्ड निकाल मुझे डॉगी स्टाइल में होने को बोला, मैं घुटने और कोहनी के बल हुई फिर वो मेरी चूतड के सामने बैठ जांघो को फैलाया फिर लन्ड घुसाए चोदने लगा तो मैं पीछे मुड़कर देखी ” और तेज चोद ना विवेक मजा तो आ रहा है
( विवेक धकाधक चूदाई करता हुआ मेरे सीने से लटकते चूची को पकड़ दबाने लगा ) हां मेरी जान तू भले ही मेरी मॉम की उम्र की है लेकिन बहुत ही हॉट और सेक्सी ” मैं चूतड को हिलाते हुए चुदाने लगी तो विवेक धक्का देता हुआ हांफने लगा और मैं समझ गई की ये अब टिकने वाला नहीं है इसलिए चूतड को हिलाते रही फिर वो ” आह ओह उह आआआआह्हह्ह् मेरा निकला ” मेरी चूत में वीर्य स्खलित हुआ तो मैं पीछे मुड़कर मुस्कुराई फिर वो लन्ड चूत से निकाल लिया और दोनों फ्रेश हुए, मैं खाना खाकर अपने रूम में आराम करने चली गई।

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