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ट्रेन में एक अजनबी से मुलाकात

फ्रेंडस,
मेरी जवानी मेरे लिए अनमोल है तो उसका हर पल आंनद लेना ही मेरा उद्देश्य लेकिन क्या मैं इधर उधर मुंह मारकर चरित्रहीन औरत की श्रेणी में आ चुकी हूं, शायद हां या तो आप मुझे कामिनी कह सकती हैं जिसे काम ( सेक्स ) ने ही काफी आंनद आता है, अच्छा हैं की मेरे पति फौजी हैं और काम क्रीड़ा में दिलचस्पी रखते हैं लेकिन घर का भोजन हर शाम अच्छा नहीं लगता तो कभी कभार बाहर जाकर लोग रेस्तरां में खाना खाते हैं ठीक उसी तरह दीपा कभी कभार गैर मर्दों के साथ हम बिस्तर हो जाती हैं और स्वाति की शादी में शामिल होकर मुझे बहुत मज़ा आया, एक तो रिश्ते के ससुर जी संग मजे ली फिर इटावा में घर के नौकर रामू के साथ तो मेरे देवर जी तो पुराने चोदुमल हैं जोकि मुझे पहली बार २-३ साल पहले ही चोदे थे। इटावा से अब दिल्ली जाना है तो वहां से टैक्सी से अंबाला और इटावा से दिल्ली तकरीबन ३२५ किलोमीटर है लेकिन पूर्वा एक्सप्रेस को ५-६ घंटे पहुंचने में लगती है और इटावा में इसका समय भी देर रात ०२:३० बजे का है तो मेरा आरक्षण प्रथम वातानुकूलित डब्बे में था और विवेक मुझे जंक्शन छोड़ने जाता, मैं रात को खाना खाकर ०९:०० बजे ही सोने चली गई ताकि यात्रा में आराम हो चूंकि मुझे ट्रेन में नींद नहीं आती है और फिर देर रात ०१:४० बजे घर से निकली तो विवेक खुद कार ड्राइव कर रहा था। दीपा को घर से साड़ी, पेटीकोट और ब्लाउज पहन कर ही निकलना था लेकिन यात्रा के दौरान ऐसे कपड़े मुझे अच्छे नहीं लगते, कहीं गहरी नींद लग गई तो पेटीकोट और साड़ी थोड़ा ऊपर हुआ की कोई भी मेरी चूत का नजारा देख सकता था लेकिन आज मैं एक बिकनी पहन चूत को ढक रखी थी और कुछ देर बाद जंक्शन पहुंची तो विवेक मेरा ट्रॉली बैग लेकर प्लेटफॉर्म नंबर ४ तक आया फिर कुछ देर बाद ट्रेन सही समय पर प्लेटफॉर्म में घुसी तो विवेक मुझे प्रथम वातानुकूलित के कोच में कूप तक पहुंचा दिया फिर वो बाई कहते हुए चला गया, मैं अपने निचले बर्थ पर बैठी तो सामने के दोनों बर्थ खाली थे फिर उठकर अपने बर्थ के उपर वाले बर्थ को देखी तो कोई नहीं था। दीपा का डर से हाल खराब था आखिर मेरे कूप में मैं अकेली तो चुपचाप बैठी रही और फिर ज्योंहि ट्रेन खुली मैं उठकर अपने बर्थ पर बेड लगाने लगी, इतने में कूप का दरवाजा खुला और मैं पीछे मुड़कर देखी तो एक साथ दो लोग अंदर आए लेकिन उसमें से एक कोच अटेंडेंट था और सहयात्री सामने के बर्थ पर बेड लगाने लगा फिर दोनों की टिकट चेक हुई फिर मैं उस यात्री की ओर ध्यान से देखी तो २८-२९ साल का जवान था जोकि बर्थ पर चादर डालता हुआ मुझे एक नजर देखा फिर दोनों अपने अपने बर्थ पर बैठ गए तो वो धीमे स्वर में पूछा ” आपके साथ और कोई है
( मैं ) नहीं मैं अकेली हूं क्यों
( वो ) दरवाजा बंद कर एक नींद सोया जाए ” फिर वो उठकर दरवाजा बंद किया तो फिलहाल नाईट बल्ब कूप में जल रहा था और मैं तकिया पर सर रख लेटी तो इस लड़के को देख समझ आ रहा था कि ये मुसलमान है जिसके लंबे और गोरे चेहरे साथ ही बड़ी बड़ी आंखें और नाक देख जम्मू का पठान लग रहा था तो उसने जींस और टीशर्ट पहन रखा था। मैं घर पर ही तीन चार घंटे सो चुकी थी सो यहां सोची की थोड़ा नयन मटका की जाए और दोनों बर्थ पर लेटे हुए एक दूसरे की ओर ही देख रहे थे तो दोनों की नजरें एक बार टकरा भी गई और मैं अपने कमर से पैर तक चादर ढक रखी थी, मेरे दोनों बूब्स डीप गले की ब्लाऊज के कारण आधे से अधिक दिख रहे थे तो वो मेरे बूब्स को तिरछी नजरो से देख रहा था।
दीपा की बड़ी बड़ी और नशीली आंखें, सुरहीनुमा गर्दन तो मध्यम आकार की चूचियां और पतली कमर के साथ लंबे काले घने जुल्फों को देख कोई भी आकर्षित हो जाता था तो गोल गुंबदाकार नितम्ब के आकार को साड़ी पेटीकोट पर से ही देख मर्दों का लंड टाईट हो जाता साथ ही मेरे चिकने जांघों के बीच ब्रेड पकोड़े सा चूत की फांकें और उसके बीच का दरार ये तो कोई सिर्फ कल्पना ही कर सकता था, तभी वो पूछा ” आप दिल्ली में रहती हैं
( मै मुस्कुराई ) नहीं अंबाला में क्यों
( वो ) बस यूं ही ” फिर वो करवट लेकर सो गया तो मुझे लगा कि इस पठान के साथ २-३ घंटे तक एंजॉय किया जाए लेकिन ये तो साला करवट फेरकर सो गया, तभी मैं उठी फिर वाशरूम चली गई और फ्रेश होकर कूप की ओर आईं, दरवाजा को ज्योंहि पुश की वो हड़बड़ा गया आखिर वो अपना कपड़ा बदल रहा था तो उसके अर्ध नग्न शरीर को देख मैं तड़प उठी लेकिन उसके चढ्ढी पर लंड का उभार मात्र कुछ पल के लिए ही दिखा। दीपा अंदर आई तो वो कमर से टॉवेल लपेट चढ्ढी को उतारा और अब शॉर्ट्स लिए ज्योंहि वो पैर में घुसा रहा था कि उसके पैर का संतुलन बिगड़ गया और उसका टॉवेल जमीन पर था तो उसका लंबा मोटा गोरा लंड देख मुंह में पानी भी आ गया और शर्म से लाल हुई दीपा चेहरा फेरकर तिरछी नजरों से उसके लंड को देखने लगी और वो मुझे देखता हुआ टॉवेल उठाने के लिए झुका तो मैं अपने चेहरे को हथेली से ढक शरमाने लगी लेकिन तभी मेरी काम वासना भड़क उठी और मैं बेशरम हॉट लेडी की तरह हाथ बढ़ाते हुए उसके लंड पकड़ ली फिर उसके सामने खड़ी हुई तो दोनों एक दूसरे से नजरें मिला रहे थे ” ना नाम जानने में दिलचस्पी रखती हूं और ना तेरा पता बस एक बार दोनों घंटे भर के लिए एक हो जाएं ” वो मुझे बाहों के घेरे में लेकर मुझे चूमने लगा तो मैं उसके चूतड सहला रही थी, पल भर में ही जावेद के नग्न बदन के सामने मैं साड़ी उतार सिर्फ पेटीकोट और ब्लाऊज़ में खड़ी थी तो यकीनन काम की मूर्त लग रही थी फिर क्या हुआ….. to be continued

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