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पति के साहब : मेरे गुलाम

डियर फ्रेंडस,
दीपा मल्होत्रा अपने आशिकों के लिए किसी मेनका से कम नहीं थी तो उन लोगों को क्या चाहिए और किससे वाष्ता है, इसकी समझ मुझे है और मैं भी अपने जिस्म के बदले महंगे महंगे गिफ्ट्स उन लोगो से लिया करती थी तो महीने बित गए मेरे और गुरदीप के संग सेक्स हुए लेकिन क्या पहल मैं ही करूं! बिल्कुल नहीं और ससुराल से वापस आने की बाद दो तीन रात तो मेरे पति ने मेरे साथ जमकर संभोग क्रिया किया फिर मेरा मन पति के सीनियर गुरदीप पर था लेकिन खुद पहल करना ये मेरे से संभव नहीं था, अंबाला आए एक सप्ताह हो चुके थे तो एक शाम पति ऑफिस से वापस आकर मेरे साथ कॉफी पी रहे थे तभी उन्होंने बोला ” कल से तीन दिन के ऑफिसियल ट्रिप पर लखनऊ जा रहा हूं, क्या मॉम डैड से मिलना है
( मै बोली ) फिलहाल जर्नी करने का मूड नहीं है ” और मेरे मन में सिर्फ गुरदीप के साथ शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा थी, अगले सुबह पति चले गए तो मैं घर में अकेले बोर हो रही थी और मुझे मालूम था की गुरदीप को मेरे पति के ऑफिशियल ट्रिप की जानकारी होगी तो वो जरूर मुझे कॉल करेंगे और तकरीबन सुबह के ११ बजे होंगे की मेरा मोबाईल बजने लगा और मैं देखी की गुरदीप का कॉल था ” हेल्लो कौन
( गुरदीप हंसने लगा ) बहुत जल्दी मुझे भूल गई
( मैं ) सॉरी, दरअसल किसका कॉल है नहीं देखी, और कैसे हो
( गुरदीप ) ठीक ठाक लेकिन तुमसे मिले तो महीनों हो गए, क्यों आज कहीं घूमने चलना है
( मैं ) इस गर्मी में घूमना फिरना ना बाबा ना ” फिर उन्होंने अपना प्लान बताया और मैं समझ गई कि आज गुरदीप के साथ मजे लेने हैं, वैसे भी गैर मर्दों के साथ हम बिस्तर हो होकर मेरे मन से डर और झिझक ख़तम हो चुकी थी तो किसी निर्भीक औरत की तरह दीपा गैर मर्दों के साथ सेक्स करने लगी, स्नान करके नाश्ता की फिर गुलाबी रंग की साड़ी, पेटीकोट और ब्लाउज पहन ली तो गुरदीप कुछ देर में यहां अपनी गाड़ी भेजने वाला था। घर में कामवाली काम निपटा ली फिर मैंने उसे बोला ” शाम को मत आना, साहब नहीं है और कुछ खास काम भी नहीं है ” कुछ देर के बाद मैं अपने सैंडल पहन साथ ही पर्स लिए मेन गेट को लॉक की और फ्लैट से नीचे उतर गई तो ब्लेक होंडा सिटी कार लगी हुई थी, कार में बैठी फिर ड्राइवर कार स्टार्ट किया, यकीनन अंबाला सिटी ही जा रहे थे तो केंट के ऑफिशियल इलाके की ओर जब ड्राइवर ने कार लिया तो मैं समझ गई की गुरदीप मेरे साथ ही अंबाला सिटी जाएगा वैसे भी हम दोनों एक दूसरे के पूरक बन चुके थे तो गुरदीप ३३-३४ साल का हैंडसम मर्द था साथ ही उसके साथ बिस्तर पर मुझे काफी मजा आता था। कार उसके ऑफिस के बाहर रुकी फिर गुरदीप भी कार में बैठा, वो फिलहाल आर्मी ऑफिसर के ड्रेस में था तो मुझे देख मुस्कराया ” और कैसी रही ससुराल की ट्रिप
( मैं ) बढ़िया बहुत एंजॉय की ” दोपहर के १२:१० बजे दोनों होटल रेड कार्लटन पहुंचे तो यहां कई बार दोनों एक साथ दिन गुजार चुके थे और अब एक सर्विस गर्ल हम दोनों को सेकेंड फ्लोर पर ले आईं फिर एक कमरे का दरवाज़ा खोल बोली ” सर अंदर आइए
( दोनों अंदर आए तो गुरदीप का छोटा सा बैग उस लड़की के हाथ में था ) हां और कुछ ऑर्डर
( गुरदीप ) एक बोतल ब्लेक डॉग और सोडा भिजवा दीजिए
( वो मुस्कुराई ) ओके सर ” फिर वो चली गई तो गुरदीप अपने बैग से शोर्ट्स और टी शर्ट निकाल वाशरूम चला गया तो मैं रूम में ही सोफ़ा पर बैठ टी वी ऑन की फिर उसका इंतजार करने लगी, पल भर में गुरदीप बाहर आया और मेरे बगल में बैठ मेरे कंधे पर हाथ रख फेरने लगा ” तो जानेमन महीने भर में मेरी याद भी आई कि नहीं
( मैं मुंह ऐंठते हुए ) तुम तो ना जाने कितने कॉल मुझे किए क्यों
( वो मेरे गाल सहलाने लगा ) बेबी, तुम उधर व्यस्त होगी इसलिए तुम्हें डिस्टर्ब नहीं किया ” और वो मेरे चेहरे को अपनी ओर किए चूमने लगा तो मेरा हस्थ उसके पीठ पर था और अब मैं उसके गोद में बैठने की सोची की डोर बेल बजने लगा ” हां खुला है अंदर आ जाओ
( मैं धीमे स्वर में बोली ) अभी खुला कहां है डियर ” तो दोनों थोड़ी दूरी बनाए बैठे हुए थे और वो सर्विस गर्ल सारा सामान लाकर टेबल पर रख दी फिर गुरदीप उसको बोला ” खाने का ऑर्डर तुम्हे दे दुं
( वो हंसते हुए ) फोन पर भी दे सकते हैं बाकी जो चाहो मुझे दे दो
( गुरदीप उस लड़की को घूरने लगा ) ओह जरूर तुम अपना मोबाइल नम्बर दे दो फिर बात करूंगा
( वो बोलते हुए चली गई ) मोबाईल नंबर नहीं दे सकती बाकी आप तो यहां रेगुलर आते हो ” और उसके जाते ही मैं उठकर दरवाजा बंद की फिर गुरदीप के बगल में बैठकर उसके जांघ पर हाथ फेरते हुए ड्रिंक्स लेने की सोच रही थी तो दो ग्लाश में ड्रिंक्स तैयार था फिर दोनों ड्रिंक्स लेने लगे और मैं उसके शॉर्ट्स पर हाथ फेरते हुए लंड के उभार को सहलाने लगी ” तो क्या इस लड़की को अभी बुलाएंगे
( गुरदीप हंस दिया ) मुझे मालूम था कि तुम मुझ पर शक करोगी
( मैं ) शक क्या तुम पर विश्वास है कि तुम एक नंबर के लौंडिया – बाज हो ” और तभी गुरदीप मेरे साड़ी की पल्लू को सीने से नीचे कर बूब्स पकड़ दबाने लगा तो मैं उसके लंड के उभार को शॉर्ट्स पर से ही पकड़ दबाने लगी, पहला पैक ख़तम होते ही मेरे तन पर से साड़ी गायब था तो दीपा पेटीकोट और ब्लाऊज़ पहन हॉट लग रही थी। मेरे उफान लेती चूचियों को पकड़ दबाता हुआ उसने मुझे गोद में ले लिया फिर तो उसके ओंठ मेरे चेहरे से ओंठ तक को चूमने लगे, दोनों एक दूसरे से लिपटे सेक्स की दुनिया में खो चुके थे तो गुरदीप मेरे ओंठ पर चुम्बन देता हुआ मेरे ओंठ को जीभ से चाटने लगा और मैं अपने मुंह को बंद रखी हुई थी लेकिन जल्द ही ढीली पड़ गई फिर मेरे मुंह में उसका जीभ था तो उसे चूसते हुए गुरदीप के हाथ का एहसास चूची पर पा रही थी, आगे क्या हुआ? अगले भाग में

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