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बुआ के साथ सम्भोग सुख

इनदिनो मै बुआ के घर पर था और उनके पति देर रात अपने काम से वापस लौटते थे और खाना खाकर सो जाते थे! बुआ के दोनो बच्चे दिन भर मे स्कुल मे रह्ते थे और देर शाम घर आते थे, इस बिच बुआ अकेले ही घर पर बोर होती थी ! फ़िलहाल तो बुआ और मेरी मस्ती चल रही थी, एक सुबह जब उनके पति काम पर निकल गये तो हमदोनो घर मे अकेले थे, वो किचन मे कुच्ह काम निपटा रही थी और मै बालकोनी मे अखबार पढ रहा था ! सुबह के 10:00 बजे कामवाली भी घर का काम निपटा कर चली गयी, मै किचन कि ओर गया तो बुआ वहा नही थी ! मै उनके बेड़रूम घुसा तो बेड़ पर कुछ कपड़े रखे थे और वो शायद बाथरूम मे थी, मै धीरे से दरवाजा को धक्का दिया तो बाथरूम का दरवाजा बंद था ! मै बेड़ पर ही बैठ गया और बुआ का इंतजार करने लगा, वो स्नान करने के बाद जो कपड़ा पहनती वो बेड़ पर पड़ा हुआ था !

लगभग 10 मिनट के बाद बाथरूम का दरवाजा खुला और बुआ स्नान करके नण्गे ही निकलने वाली थी, लेकिन मुझे देख शर्मा गयी और तुरंत दरवाजा बंद कर दी, मै बोला….. “बुआ शर्माने की जरुरत नही है आकर अपना कपड़ा पहन लिजिये

(बुआ) राहुल तुम मेरे रूम से जाओ तो मै बाहर निकलकर कपड़ा पहन लु. ” मै दरवाजे के सामने से हट्कर कोने की ओर चला गया और बोला…. “ठीक है मै जा रहा हू. ” और मै चुपचाप खड़ा रहा, पल भर बाद बुआ नग्न अवस्था मे निकली और बेड़ पर रखे कपड़े को लेने के लिये हाथ बढाई और मै बुआ की ओर तेजी से भागा और उनको दबोच लिया! उनके मांसल चुत्तर को अपने आगे के हिस्से से चिपका रखा था और उनके कमर को पकड़े हुए बेड़ पर लिटा दिया, वो शर्माने लगी और मै बेड़ पर बैठ्कर उसके स्तन को दबाने लगा ! बिनिता बुआ का नग्न शरीर देख दिमाग उड़ गया, उसके चुचि सिने से ऐसे लगे हुए थे मानो पपिते पेड़ से लगे हो ! अब भी बुआ दिखावटी नखड़ा कर रही थी, तो मै उसके बदन पर सवार होकर उसके ओंठ और गाल को चुमने लगा जबकी वो मेरे से चिपकी हुई थी! बुआ के रसिले ओंठ को चुसने लगा और उनकी दोनो चुचि मेरे सिने से दब रही थी, पल भर बाद मै बुआ के स्तन को मुह्न मे लेकर चुभलाने लगा और वो अब मेरे सामने आत्मसमर्पन कर चुकी थी ! दोनो स्तन को चुसकर अब मै उनके जिस्म पर से उतरा और उनके भारी भरकम चुत्तर के निचे एक तकिया ड़ाल दिया !

बुआ बिनिता अपने दोनो जङ्हा को दो दिशा मे करके बुर चमका रही थी और मै अपना मुह्न उसके बुर पर अपना ओंठ लगा दिया और बुर को चुमने लगा ! उसकी चुत बिन बार के थे और दोनो फ़ांक के बिच थोड़ी दुरी भी थी, मै अब उनके बुर को फ़लकाया और अपना जिभ बुर मे घुसाकर बुर चाट्ने लगा, वुआ की चुदी चुत फ़ैली हुई थी और मेरा पुरा जिभ उसकी चुत मे घुस जा रहा था ! पल भर बुर को चाटता रहा फ़िर बुआ बाथरूम चली गयी ! मेरा मुसललंड़ बरमुड़ा से निकलने को बेताब था, वो आकर बेड़ पर लेट गयी तो मै उसके दोनो जङ्हा के बिच अपना लंड़ पकड़े बैठ गया! बिनिता बुआ की फ़ुली हुई बुर पर बार नही थे, लालिमा लिये चुत के दरार पर मैने अपना सुपाड़ा रखा और उसकी बुर मे घुसाने लगा, बिनिता खुद से अपने चुत को फ़लका रही थी और मै अपना मुसललंड़ उसकी बुर मे पेबस्त करके तेज प्रहार करने लगा, मेरा लंड़ बुर के अंदर आ जा रहा था और बुआ इशारे से मुझे बदन पर लेट्ने को बोली और मै उनके मांसल गददेदार बदन पर सवार होकर चुदाई करने लगा ! बुआ अब मुझे कसकर पकड़ ली और अपने भारी भरकम चुत्तर को उपर निचे करते हुए चुदने लगी, मै उनको चोदते हुए ओंठ गाल को चुमने लगा और अब वो तेजी से चुत्तर हिलाते हुए….. “राहुल मेरी बुर से पानी आनेवाला है. “इतने मे बुआ की चुत्त से पानी आ गया और मै अपना लंड़ चुत से निकाल लिया, अब अपना मुह्न बुर पर लगाया और जिभ से रस चाटने लगा !

बिनिता बुआ की बुर का रस पिकर मै बाथरूम गया और वापस आया तो बुआ बेड़ पर लेटकर मेरे लंड़ का इंतजार करने लगी ! उसको बेड़ पर कोहनी और घुट्ने के बल होने को बोला और बिनिता की मस्त जवानी का पानी मै पी रहा था, उसके गोल गुम्बदाकार नितम्ब के सामने बैठे मै गांड़ के दरार को जिभ से चाटने लगा और वो सिसक रही थी, बुआ के बुर मे दो उंग़ली ड़ालकर बुर कुरेदने लगा तो वो मुस्कुराते हुए बोली….. “क्यो बे साले लंड़ मे जान नही है उंग़ली से बुर चोद रहा है

(राहुल) अबे रंड़ी लंड़ मे जान है की नही अभी देखोगी. ” और मै बुआ की चुत मे गांड़ कि ओर से लंड़ पेलने लगा, आधा लंड़ अंदर जाने के बाद मै उसके कमर को थामे जोर का झट्का बुर मे दिया लेकिन बुर के गहराई और लोच के कारण उसको मजा आने लगा, अब जानबुझकर बुर मे लंड़ सिधे की जगह तिरछा पेलने लगा, लंड़ बुर के दिवार से टकरा रही थी और बुआ अपने चुत्तर को हिलाहिला कर चुदाई का मजा ले रही थी ! बिनता बुआ की बुर मे लंड़ गपागप अंदर बाहर हो रहा था, बुर का रस सूखने लगा और मै लंड़ पेलने की गति को बढा दिया तो वो हांफ़ने लगी…… “ऊह्ह ऊम्म आह्झ राहुल अब मेरी बुर मे आग लगी हुई है रस झाड़ो ना आह्जज्ज. ” मै तेज गति से बुआ की बुर चोदता रहा और उसके सिने से झुलते चुची को पकड़कर मसलने लगा, वो अपने गांंड़ को आगे पिच्हे करते हुए हांफ़ रही थी, अब मेरा लंड़ गरम हो चुका था और मै बोला….. “आआह्हह ऊओह्ह मेरे लंड़ से विर्य निकलेगा बुआ आह ये लो. ” मेरे लंड़ से विर्य स्खलित होने लगा और उसकी चुत रस से गिली हो गयी !

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