शादीशुदा दीदी : जिस्मानी सम्बन्ध को जागृत किया (भाग-२)

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हैलो फ्रेंड्स,
मेरी शादीशुदा दीदी दीपा अपने मायके आई हुई है तो जीजाजी को जंक्शन पर छोड़ कर मैं वापस घर आया तो वाईन के नशे में धूत मैं घर के लोगों से दूरी बनाए हुए रहा और अपने ही रूम में लेटा था, घर के सभी लोग साथ में खाना खा रहे थे तो दिसम्बर के कड़ाके की ठंड में मैं कम्बल ओढ़कर लेटा हुआ आराम कर रहा था। दीपा के गोरे बदन के साथ उनके बड़े बड़े बूब्स, भारी भरकम चूतड़ के साथ बुर का क्या हाल फौजी जीजा ने किया होगा ये तो देखकर ही समझ में आएगा बाकिं मेरी दीदी चुदककड़ किस्म की औरत है तो आर्मी केंट में गैर मर्दों के संग वो शारीरिक संबंध नहीं बनाई हो इसकी गारंटी मैं नहीं दे सकता, फिर दीवार घड़ी में देखा तो रात के १०:१५ हो चुके थे और शायद डायनिंग हॉल में कोई भी नहीं था तो घर में पूर्णतः सन्नाटा, सोचा एक बार टहल कर घर का माहौल देखा जाए तो रूम से बाहर निकला और फिर मॉम के रूम की ओर गया तो दरवाजा बंद था और फिर दीदी के रूम की ओर गया लेकिन वो भी दरवाजा बंद कर चुकी थी। राहुल किचन जाकर प्लेट में खाना निकाल रूम लेता आया और फिर अपने रूम का दरवाजा बंद करके मैं वाशरूम घुसा तो दीदी के रूम की ओर का दरवाजा वाशरूम की ओर से सिर्फ सटा हुआ था, मैं दबे पांव उसके रूम में दाखिल हुआ तो दीदी रजाई तन पर डाले सो रही थी लेकिन मेरे तन की भूख बढ़ चुकी थी, मैं दीदी के पैर के पास बैठा तो दीपा अपनी बेटी को सीने से लगाए आराम से सो रही थी तभी मैं धीरे से अपना हाथ रजाई में घुसा दिया और उनके कमर से पैर तक को सहलाने लगा, मेरा हाथ उनके नाईटी को कमर की ओर करने के प्रयास में लगा हुआ था और जैसे ही मेरा हाथ उनके नाईटी के अंदर चला गया, मैं हाथ उनके जांघों के बीच लगाकर पैंटी पर हाथ फेरने लगा और गद्देदार चूत की फांकें पैंटी पर से ही गर्म लग रही थी और उसको सहलाता हुआ मजा ले रहा था कि उसकी आंखें खुल गई और वो उठकर पहले तो अपनी बेटी को थोड़ा अलग की फिर मैं अपनी भांजी को एक कम्बल ओढ़ाकर दीपा के रजाई को हटाया तो वो भी बेझिझक मेरे से लिपट गई, दोनों बेड के बीचोबीच होकर बाहों में एक दूसरे को पकड़े चुम्बन देने लगे और दीपा की रसीली ओंठ मेरे गर्दन पर थी तो मेरा हाथ उसके पीठ सहलाने में लगा हुआ था और तभी दीदी मेरे गर्दन में हाथ डाले मेरे ओंठ पर ओंठ रखकर चूमने लगी तो मेरा हाथ उनके बूब्स की गोलाई को सहलाने लगा। दीपा ब्लू रंग की नाईटी पहन रखी थी तो उसकी डोरी कमर पर बंधी हुई थी और तभी दीपा मेरे मुंह में अपना जीभ घुसाने लगी तो मैं उनके जीभ मुंह में लिए चूसने लगा तो वो मेरे पैजामा की डोरी को पकड़ खोल दी और उसकी जीभ चूसता हुआ मैं अपना पैजामा खोल दिया तो दीदी कि नाईटी भी दो हिस्सों में होकर उसकी मोटी बाहों पर थी और उसके दोनों स्तन दूध से लबालब लग रहे थे, कुछ देर के बाद उनकी जीभ निकालकर उनको बेड पर लिटाया फिर उनके उफान लेती चूचियां को पकड़ दबाने लगा, दो साल में ही दीपा की चूचियां बहुत बड़ी हो चुकी थी तो उनके तन से नाईटी उतारकर उन्हें नग्न कर दिया लेकिन पैंटी उनकी चूत को ढक रखी थी।
मैं दीपा के सीने पर चेहरा किया तो दीदी मेरे बाल सहलाते हुए मुंह में अपनी चूची घुसेड़ दी और मैं दीपा की चूची चूसने लगा, उससे थोड़ा बहुत दूध भी निकल रहा था तो गजब का आनंद मुझे आने लगा और दीपा मेरे चूतड़ सहलाते हुए ” उह ओह चूस चूस बे कुत्ते और दीदी की दूध भी पी ले
( मैं चूची निकालकर ) दूध में काफी मिठास है बेबी ” वो अपने चेहरा को दूसरी दिशा में करके शरमाने लगी लेकिन मैं दीदी की दूसरी चूची मुंह में लेकर चूसने लगा और दीपा मेरे पीठ सहलाते हुए आहें भर रही थी ” ओह राहुल बहुत खुजली हो रही है उह और नहीं ” फिर उनकी बूब्स छोड़कर मैं दीपा के छाती से पेट तक को चूमने लगा, इधर लंड महाराज चूत में जाने को तैयार था लेकिन बिना लड़की को गर्म किए चोदने का आनंद कहां है साहब! दीपा अपने दोनों पैर एक दूसरे पर चढ़ाकर रगड़ने में मस्त थी तो मैं उनके कमर चूमने लगा और धीरे धीरे नीचे की ओर जाने लगा, उनके दोनों जांघों को अलग किया तो दीदी मेरे सामने आत्मसमर्पण कर चुकी थी और फिर मैं उनके पैंटी की हूक को खोलकर चूत को नग्न किया और दीदी कि लालिमा लिए चूत के फांकों की मोटाई बढ़ चुकी थी तो नाक की भांति टाईट शिश्निका देख मैं अपने आपको रोक नहीं पाया फिर उसको सहलाने लगा ” दीपा तो पड़ोस का कोई मर्द जो तुझे चोदता हो
( वो ) अबे अपनी दीदी को रण्डी समझा है क्या
( मैं मुंह उसके चूत पर लगाकर चूमने लगा ) तुम शुरू से ही सेक्स की शौकीन रही हो समझी ” और उसकी चूत को जब उंगलियों से अलग किया तो सही में बुर का छेद काफी फैल चुका था, मैं बुर पर चुम्बन देने लगा और वो सिसकने लगी…… To be continued!

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