Skip to content

सिख्नी की चुत – पार्ट – 3

अस्सलाम ओ लेकुम दोस्तो मे अस्लम खान हाज़िर हू स्टोरी का अगला पार्ट लेकर।

कमल अप्ने ऑफिस का काम कर रही थी। करीब 30मिंट बैड दरवाजे पर दस्तक हुई। ” कौन है ” कमल ने बेठी ने ही अवाज लगाकर पुछा। ” अरे मे हू कमल अब्दुल, दरवाजा खोलो खाना लेकर आया हू “, अब्दुल ने जवाब दिया जो अब तक खाना लेकर आ गया था।
” अरे हा अब्दुल मियां रुकिये एक मिंट मे खोलती हू अभी “, कमल फौरन उठी पर उसने दरवाजा खोला तो सामने अब्दुल खाने के टिफ़िन लिये खडा था। दर्वजा खुल्ते ही वो अण्डेर आ गया और टिफ़िन टेबल पर रखता हुआ बोला, ” ओह्ह बहुत भारी है भई टिफ़िन तो “। ” अरे इतना खाना कौन खायेगा अब्दुल मियां हम तो सिर्फ दो ही है और आप इत्ना सारा खाना ले आये ” कमल खाने के भरे टिफ़िन देखकर बोली।
” अरे मे खाओगा ना भाई, ये जिस्म देख रही हो साँड़ जेसा इस खाने से ही तो भरेगा यह ” अब्दुल टिफ़िन खोलता हुआ बोला।
” चलो आ जाओ अब काम बाद मे कर लेना पहले खाना निपटा ले ” अब्दुल ने टिफ़िन खोलते हुए कहा।
” हा मे हाथ धोकर आती हू ” कमल बोली ओर हाथ धोने चली गयी। अब्दुल ने टिफ़िन खोले ओर निचे जमीन पर ही बेठ गया। इतने मे कमल भी हाथ धोकर आ गयी और निचे ही बेठ गयी। ” लाईये दिजीये खाना अब्दुल मियां, बहुत भूख लग रही है “, कमल ने निचे बेठ्ते हुए बोला।
” क्या खाओगी चिकन या वेज भोजन ” अब्दुल ने पुछा।
” नही मे तो वेज ही खाओगी अब्दुल मियां, चिकन नही खाती मे ” कमल ने जवाब दिया।
” अरे खा लिया करो कभी कभी, अच्छा होता है सेहत के लिये, अब मुझे ही देखो ” अब्दुल ने कमल को चपाती और सब्जी देते हुए कहा।
” नही अब्दुल मिया मुझे अच्छा नही लग्ता है ” कमल ने बोला।। ” जेसे तुमारी मर्जी ” इतना केह्ते हुए अब्दुल ने अल्लाह को याद किया और खाने लगा। कमलदीप देख रही थी के केसे अब्दुल बिना हिचकिचाये गोश्त खाए जा रहा था।
” अच्छा कमल एक बात बोलू अगर बुर ना मानो तो ” अब्दुल बोला।
” आपकी बात का कया बुरा मानना, बोलिए अब्दुल मिया ” कमल ने जवाब दिया।
” तुमारा कोई बॉयफ्रेंड है कया ” अब्दुल ने पुछा।
अब्दुल की बात सुन कर कमल ने अब्दुल को देखा तो वह भी उसे देख रहा था, ” अरे नही नही अब्दुल मियां कोई नही है ” कमल बोली।
” अरे मुझसे कया शर्मा रही हो, अगर है तो बता दो, भई ये तो आम है आजकल लडके लडकियो मे ” अब्दुल ने कहा।
” नही मे वेसी नही हू अब्दुल मियां, अप तो जन्ते ही है ” कमल शर्माते हुए बोली।
” मे जान्ता हू कमल, लेकिन कोई एक अपना होना चाहिये जिस से हम अपनी सारी बाते कर सके, अब वो सामने वाले शर्मा जी की वाइफ को लेलो, वो शर्मा जी से कम मुझसे अपनी बाते जयादा करती है ” अब्दुल ने कहा।
” लेकिन वो आप्से क्यो बाते करती है अब्दुल मिया ” कमल अनजान बनते हुए बोली।
” अब तुम जवाँ लोगो की जुबां मे कहू तो मे उसका बॉय फ्रेंड हू ” अब्दुल हस्ते हुए बोला।
कमल अब्दुल की बात सुनकर हेरान हो गयी।
” अच्छा एक बात बताओ कमल, तुमारा कोई बॉय फ्रेंड नही है, ” अब्दुल बोला।
” हा बिल्कुल ” कमल ने हामी भरी।
” तो मान्लो अगर कोई लड़का तुमे प्र्पोज करता है तो तुम क्या देखोगी, मतलब क्या चाह्ती ही तुम के तुमारा बॉय फ्रेंड केसा हो ” अब्दुल ने पुछा।
” देखीये अब्दुल मियां पहली बात तो येह की मस्लर हो आपकी तरह, अच्छी तहजीब का मलिक हो, वैल एजुकेटेड हो, और बस ” कमल ने जवाब दिया।
” और रन्ग गोरा साँवला काला, या धरम मुस्लिम हिन्दू सिख कोई भी हो या कोई चॉइस है ” अब्दुल ने पुछा।
” रंग से क्या लेना गोरा काला, वो तो चम्डी ही है, और रही बात धरम की तो वो भी कोई भी हो, 21वी सदी है अब कोनसा हम पुरातन युग मे है ” कमल ने जवाब दिया। तब तक दोनो ने अपना खाना खा लिया था।
” हम्म्म तो मस्लर मे ह, तहजीब भी कुछ कुछ अच्छी है, और एजुकेशन कुच खास नही, तो अगर मे तुम्हे प्रपोज करु तो ” अब्दुल ने मुस्कुरते हुए कमल से कहा।
कमल भी अब्दुल की बात सुन शर्मा सी गयी, लेकिन एक दम से जवाब दिया, ” अब आप शर्मा जी की वाइफ के बॉय फ्रेंड है अब्दल मियां “।
” अरे तो कया हुआ सिख्नी, हमारे धरम मे तो एक आदमी कई निकाह कर लेता है मे तो सिर्फ गर्लफ्रैंड ही एक और बना रहा हू ” अब्दुल ने जवाब दिया।
” फिर भी अब्दुल मियां, विश्वास भी तो कुछ होता है ” कमल बोली।
” अब इस से जयादा क्या विश्वास दु सिख्नी, तुमे पहले ही बता दिया के एक गर्लफ्रैंड है मेरी और तुमे दुसरी बनाना चाहता हू ” तुम अपनी हा ना बताओ ” अब्दुल बोला।
” ह्ह्म्ं सोचना पडेगा अब्दुल मियां ” कमल ने मुस्कुरा कर कहा।
” अरे सिख्नी सोचना क्या है, गीदड से दिल लगाने को नही बोल रहा हू, तू शेरनी है तो हम भी शेर है, याद है के भूल गयी ” अब्दुल हस्ता हुआ बोला।
” फिर भी अब्दुल मिया सोच कर फैसला करूगी ” कमल बर्तन उठाते हुए बोली।
” सोच ले सिख्नी, जब दिल चाहे बता देना “। अब्दुल बोला और अप्ने कमरे मे चला गया।
कमल ने बर्तन साफ किये और ओफ्स का बाकी काम निपटाने लगी लेकिन काम मे उसका दिल ही नही लग रहा था। उसे कबी गगन की बात याद आती तो कभी अब्दुल का प्रपोज करना। इन बातो को सोचते हुए वह बिस्तर पर लेट गयी और सो गयी

This story सिख्नी की चुत – पार्ट – 3 appeared first on new sex story dot com

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments