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सिख्नी की चुत – पार्ट – 4

अस्सलाम ओ लेकुम दोस्तो मे अस्लम खान हाज़िर हू स्टोरी का अगला पार्ट लेकर।

अग्ली सुबह कमलदीप अप्ने ऑफिस चली गयी और वहा काम मे लग गयी लेकिन उसका ध्यान काम पर नही लग रहा था। बार बार उसे अब्दुल के खयाल आ रहे थे, उसकी कही हुई बाते याद आ रही थी।
उसके जिस्म के एक सन्सनी सी दौड़ रही थी लग रहा था जेसे कोई उस्का जिस्म छू रहा हो। इत्ने मे वहा गगन आ जाती है।
” गुड मॉर्निंग मिस्स शेरनी कमलदीप कौर ” गगन ने कमल की तरफ आते देखा।
कमल की नज़र गगन पर पड़ी तो वह भी मुस्कुर कर बोली, ” गुड मॉर्निंग गगन “।
गगन – ” और बता केसी है तू “।
कमल – ” एम फ़ाइन तुम बताओ आजकल काफी खुश खुश नज़र आ रही हो, क्या बात है “।
गगन – ” अब मे खुश भी नही रह सकती क्या, “।
कमल – ” अरे बिल्कुल क़्यो नही, मेने कब मना किया तुमे “।
गगन – ” वेसे तू बता तेर शेर केसा है, ठीक तो है ना “।
कमल – ” मेरा कोन्सा शेर “।
गगन – ” अरे वाह भूल भी गयी, अब्दुल मियां ओर कौन “।
अब्दुल का नाम सुन्ते ही कमल की चेहरे पर एक लालिमा सी छा गयी और उस्ने शर्माते हुए सर झुका लिया।
गगन – ” आये हाये कुड़ी शर्मा गयी लगता है जेसे बात बन रही है “।
कमल – ” चुप भी कर यार अब, मुझे तुम्से कुछ जरुरी बात करनी है “।
गगन – ” हा बोल ना क्या बात है “।
कमल – ” गगन कल रात यार अब्दुल मिया ने सच मे मुझे प्रपोज कर दिया “।
गगन (मुस्कुराते हुए) – ” हाये फिर तुने क्या जवाब दिया “।
कमल – ” यार वही तो बात करनी है तुमसे के मे क्या जवाब दु अब उन्हे “।
गगन – ” मतलब अब तक तुने कोई जवाब ही नही दिया, हाये मे तो उसी वक़्त हा बोल देती “।
कमल – ” पागल, उनकी पहले ही शर्मा जी की वाइफ के साथ सेटिंग है और अब वो मुझ्से भी करना चह्ते है “।
गगन – ” तो इसमे क्या हुआ यार, वो तो चार चार शादियां कर लेते है “।
कमल – ” फिर भी यार मुझे ये अच्छा सा नही लग रहा “।
गगन – ” क्या अच्छा नही लग रहा यार, तुमे कोनसा उनसे शादी करनी है, मजे तो ले जित्ने ले सकती है और उपर से खर्च मिलेगा सो अलग “।
कमल – ” खर्च केसे “।
गगन – ” अरे इत्नी मस्त सिख्नी मुल्ले की गर्लफ्रैंड बनेगी तो कुछ गिफ्ट्स घुमना शुम्ना, और कपडे वगेरा तो दिलवयेगा ही ना “।
कमल – ” अरे हा यार ये तो मेने सोचा ही नही था, वेसे भी सैलरी से बच्ता ही कया है “।
गगन – ” तो बस फिर शेरनी हा बोल्दे उस शेर और मजे भी लूट और ऐश भी करना “।
कमल – ” ह्ह्म्म बात तो तेरी सही है गगन “।
गगन – ” अच्छा मे चलती हू मेरा भी अभी बहुत काम बाकी है यार “।
गगन वहा से अपने केबिन की ओर चली गयी और कमल गगन की बातो पर सोचने लगी। कमल को भी अब लग रहा था के सौदा फायदे का, मजा मिलेगा सो अलग और उपर से उस्का खर्च भी कुछ निकाल जाया करेगा।
इसी सोच मे कमल ने अपना ओफ्स का काम निपटाया और घर की और चल दी। अग्ली सुबह संडे था तो कमल को ओफ्स से छुट्टी थी इस लिये वो वही से सीधा गुरुदूआरे चली गयी और वहा जूते साफ करने की सेवा करने लगी। कमल के इलावा वहा एक और औरत थी तो वो भी कमल के पास ही आ गयी और सेवा करने लगी। ” नयी लगती हो बेटा पहले तो कभी देखा नही तुम्हे ” उस औरत ने पुछा।
कमल – ” हा आंटी, मै जॉब करती हू तो कभी कभी ही आ पाती हू, आप यहा रोज आते हो “।
” हा बेटा, मे तो रोज आती हू, बल्जीत कौर नाम है मेरा, भोली भी कहते है मुझे “। औरत ने जवाब दिया।
बलजीत कौर की उमर करीब 50साल की है और गोरे रंग की और सुडौल जिसम की मलिक है। उसका फिगर साइज़ 38 36 42 है। बल्जीत कौर एक कोठा(चकला, रंडीखाना)चलाती है और अक्सर वह गुरुदवारे मन्दिरो मे अपने कोठे के लिये लडकिया ढूँढने जाती है।
” जी आंटी मेरा नाम कमलदीप कौर है “। कमल ने जवाब दिया।
बल्जीत(भोली) – ” अच्छा नाम है, कहा जॉब करती हो बेटा “।
कमल – ” यही जॉब करती हू आंटी, बजाज ग्रुप ऑफ़ कंपनीज मे “।
भोली – ” अच्छा, बड़ी अच्छी बात है बेटा वर्ना आजकल की लड़किया तो तौबा “।
कमल – ” आप भी कोई जॉब करती हो आंटी “।
भोली – ” अरे नही बेटा मेरा तो खुद का काम है, मसाजपार्लर है मेरा “।
कमल – ” अच्छा फिर तो लडकिया रखी होगी अपने आंटी “।
भोली – ” हा बेटा ये मेरा कार्ड है, कभी जरूरत पड़े तो “। भोली ने अपना कार्ड कमल को देते हुए बोला।
” हा आंटी जरुर ” कमल ने कार्ड लिया और जाने लगी।
उसे घर आते आते काफी अन्धेरा हो चुका था।

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