सुबह की सैर और मस्त मजा

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रोज सुबह उठ कर नजदीक के पार्क में घूमने की उसकी आदत थी। कॉलोनी में नई नई वो आई थी। शहर में उसकी जॉब लगी थी। अभी उसकी उम्र करीब २४ की थी। सुबह सुबह उसको खुली हवा में घूमना अच्छा लगता था। अभी 4-5 दिन ही हुए थे की उसने देखा लगभग इसके घूमने के समय एक लड़का भी रोज घूमने आता है। वह स्पोर्ट्स ब्रा और लेगिंग्स पहन कर सैर के लिए निकलती है। यौवन उसका कातिलाना है। अंग अंग जैसे सांचे में रख कर बनाया गया हो। वैसे तो टाइट t-shirt पहनती है स्पोर्ट्स ब्रा के ऊपर, लेकिन जॉगिंग करते वक्त कोई उसको देखे तो खड़े खड़े अपना पानी निकाल दे। लड़की का नाम शालू था और लड़के का नाम समीर।
समीर रोज शालू के आने के टाइम को नोटिस करता था और आते ही उसके पीछे पीछे वॉक करना शुरू कर देता था। शालू जॉगिंग करती तो उसके नितंब पीछे से देखता रहता था। कभी कभी वो उल्टी दिशा से आता और शालू के जॉगिंग को सामने से देखता किंकैसे शालू के बूब्स धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रहे हैं। समीर भी काफी हैंडसम था।
इधर अब शालू। ने समीर की हरकतों को समझना शुरू कर दिया था। ये लोग सूरज निकलने से पहले घूमते थे तो पार्क में इक्का दुक्का लोग ही रहते थे। पार्क बहुत बड़ा था तो लोग भी नजर नहीं आते थे।
अब शालू रोज अलग अलग ड्रेस, कभी शॉर्ट्स, कभी मिनी स्कर्ट, कभी थोड़ा पारदर्शी कपड़े में आने लगी।
उन दोनो की अब नजरें टकराने लगी थी। इधर शालू भी जवान थी और शरारती भी। एक सुबह जब समीर सामने से आ रहा था तो शालू जान बुझ कर सामने से उससे टकरा गई। टकरा कर जैसे ही गिरने को हुई समीर ने उसको बाहों में जकड़ लिया।
अब शालू के बूब्स की गर्मी समीर से सहन नही हो रही थी।
शालू अपने आप को छुड़ा कर बोली। ये क्या कर रहे हो।
समीर ने कहा, मैने तुमको गिरने से बचाया है।
शालू उसकी आंखों में देख के बोली, थैंक्स, बोलो क्या इनाम चाहिए।
समीर ने कहा तुम्हारा नाम चाहिए। इस तरह शालू और समीर ने एक दूसरे को अपना नाम बताया और धीरे धीरे एक दूसरे को पसंद करने लगे।
इधर शालू अब हाय हेलो से आगे बढ़ना चाहती थी और समीर भी कुछ जिस्म तक जाने की सोच रहा था।
एक सुबह पार्क में ये दोने अकेले ही थे। हाथो में हाथ डाल कर सैर कर रहे थे। इतने में समीर ने शालू के नितंब पर अपना हाथ रख दिया। शालू थोड़ा चौंक गई लेकिन एक मुस्कान के साथ उसने इसका स्वागत किया। आज शालू स्किन फिट शॉर्ट्स में थी, जिससे उसके नितंब की गोलाई एकदम पता चल रही थी। नितम्ब के साथ योनि के कर्व भी साफ साफ दिख रहा था। और ऊपर में स्पोर्ट्स ब्रा था उसके शरीर पर जो सिर्फ बूब्स को छिपा रहा था। कमर पर पसीने की बूंदे झलक रही थी। समीर इसको देख कर उत्तेजित हो रहा था। अब उसने धीरे धीरे, शालू की गांड़ को दबाना शुरुकिया। शालू ने कहा रास्ते में क्या कर रहे हो। कोई आ जायेगा।
और वो खुद ही पार्क के कोने में झुरमुट के पीछे ले गई समीर को। वहां एक बेंच भी था।
अब उसने अपने लिप्स को समीर के लिप्स के साथ कर लिया। जबरदस्त किस। एक तरह से शालू ने समीर को कुछ मिनटों के लिए बोलने का मौका ही नही दिया। वो समीर के होंठ चूसती गई। और समीर भोनिस्के बूब्स दबाता रह गया।
बेंच पर वह समीर के गोदी में थी। समीर के लन्ड ने अब आकार लेने शुरू कर दिया और उसके दबाब को शालू महसूस करने लगी।
अभी कुचबकुच अंधेरा हो था तो किसी के आने की संभावना भी नही थी।
समीर ने एक झटके में शालू के स्पोर्ट्स ब्रा को ऊपर कर दिया।
अब शालू के निप्पल उसके मुंह के सामने थे। समीर ने बिना वक्त गंवाए उसको दोनो हाथो से मसलना शुरू कर दिया और पागल की तरह चूसने लगा। शालू भी भरपूर साथ से रही थी। वह कब से वासना में डूबी थी और आज उसको मौका मिला था।
अब शालुके पैंटी में समीर का हाथ जाने लगा तो शालू ने अपनी गांड़ थोड़ी ऊपर कर दी। लेकिन समीर नीचे और वह ऊपर थी।
वह समीर के गोदी से उतर गई और तब तक समीर भी खड़ा हो कर अपना पैंट खोलने लगा। उसका मोटा लन्ड नब्बे डिग्री बना रहा था और ठीक शालू के मुंह को छू रहा था।
शालू बेंच पर बैठ गई और समीर उसके सामने खड़ा था अपना लौड़ा ले कर। शालू ने थूक लगा कर उसको चूसना शुरू कर दिया। समीर को लगा की शरीर का सारा खून उसके लन्ड में आ गया है। लन्ड और भी गरम हो गया। और शालू उसको चाट रही थी।
अब शालू ने अपनी शॉर्ट्स और पैंटी थोड़ा नीचे किया। समीर को बेंच पर बैठा दिया और खुद उसकी गोदी में आ गई। उसने अपने दोनो टांगो को उठा कर समीर के कांधे पर रख दिया। इससे उसकी गांड़ थोड़ी फेल गई और चित ठीक समीर के लन्ड के सामने आ गया। समीर ने बिना मौका गंवाए चूत के मुंह पर लुंड रख कर धक्का लगाना शुरू कर दिया। शालू भी अपनी गांड़ उछाल उछाल कर उसका साथ दे रही थी। वहन्नपर पेड़ को डाली भी लटक रही थी जिसको शालू ने अपने हाथों से थाम लिया और बोली। समीर ये जगह मैने काफी दिन से देख लिया था की पार्क में तुमसे चुदवाऊं तो इसी बेंच पर बैठ कर।
समीर मुस्कुरा के रह गया और बूब्स दबाने लगा। काफी धक्के देने के बाद अब शालू ने पोज बदलने के लिए कहा। वह पेड़ के सहारे खड़ी हो गई और समीर को सामने से डालने के लिए कहा। समीर को थोड़ी दिक्कत हुए पेड़ से टिक कर करने में लेकिन आखिर चूत में लन्ड चला ही गया।
सुबह सुबह दोनो की आहें पार्क में गूंजने लगी। दोनो के माथे पर पसीने की बूंद थी मानो दोनो ने दौड़ लगाया हो पार्क का।
मस्त चूदाई चालू थी। इतने में एक और लड़का लड़की साथ में टहलने निकले और शालू और समीर को देख कर उनका भी मूड बन गया।
समीर का अब वीर्य आने वाला था। उसने शालू को पूछा, कहां निकालू। तो शालू ने अपना मुंह खोल दिया।
अब समीर अपने लौड़े को शालू के मुंह में अंदर बाहर करने लगा और कुछ ही सेकंड में पूरा गरम वीर्य शालू के मुंह में भर गया। वह चटकारे ले कर सब पी गई। और उसकी आंखे वासना से भरी हुई थी। जैसे बरसो बाद किसी ने उसको तृप्त किया।
दोनो ने अपने कपड़े ठीक किया और दूसरे जोड़ी को बोला, लगे रहो चूदाई में, कभी मन करे तो साथ में आना, सामूहिक चूदाई का खेल खेलेंगे। दूसरे जोड़ी ने भी इकरार में सिर हिला दिया और अपना कार्यक्रम जारी रखा।
अब थोड़ा उजाला हो गया था और लोग बढ़ने लगे थे। समीर और शालू सुबह का ड्रिंक ले कर अपने घर गए कल फिर करने का वादा कर के।

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कैसी कहानी लगी दोस्तों, जरूर बताइएगा।

कहानी में नाम और घटनाएं काल्पनिक है। पूरी कहानी काल्पनिक है और किसी से मिलना एक संयोग मात्र है।

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