अनैतिक संबंध : भाग ११

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फ्रेंड्स
विशाल तो अपनी मॉम विशाखा की चूत चुदाई करना शुरू ही किया था की उसकी चूत रसीली हो गई और फिर मैं लन्ड निकाल उनके बदन पर से उठा तो विशाखा मुझे देख बोली ” चाट ले बुर को अपनी बहन की तो चाटने में लगा हुआ था
( मैं मॉम की गांड़ के नीचे तकिया लगाकर बुर पर जीभ फेरने लगा ) हां साली बोलोगी ही आखिर तुझे ईर्ष्या हो है ” और मैं मॉम की बुर के दरार को फैलाए उसमें जीभ घुसाया फिर चाटने लगा, बुर के रस का स्वाद नमकीन था जिसे मैं कुछ देर चाटा फिर मॉम बेड पर ही डॉगी स्टाइल में हो गई तो उनकी मांसल बदन घुटनो के बल थी और मैं विशाखा की जांघो को फैलाकर लन्ड को बुर में घुसाने लगा, साली की बुर में २/३ लन्ड तो एक ही सांस में घुसेड़ दिया फिर कमर पकड़ जोर से धक्का देकर चोदने लगा तो विशाखा आहें भरने लगी ” आह ओह मस्त चोदता है, इस लन्ड से आकांक्षा की चूत का क्या हाल होगा वही समझेगी
( विशाखा चूतड हिलाने लगी तो मैं दे दनादन चोदता हुआ मस्त था ) डार्लिंग वो जिस अंदाज में मेरे लन्ड चूसी या फ्रेंच किस्स की मुझे तो नही लगता की वो वर्जिन है
( मॉम पीछे मुड़कर बोली ) बहन की बात पर यकीन करो वैसे भी चुदाई से ये समझ पाना की इसकी चूत का सील टूटा है की नही मुस्किल है ” मेरा लन्ड तो विशाखा की ढीली चूत में दौड़ लगा रही थी और पिछले तीन दिनों से मॉम को कई बार चोदा था तो यकीनन बुर की लचक और फलक ढीली ही रहेगी, मेरा लन्ड मॉम और बेटी दोनों के मुंह का प्यास बुझा चुका था फिर बेटी तो चुदाई को तैयार नहीं थी इसलिए मेरे लन्ड की गर्मी चरम पर थी फिर भी चाहता था की कम से कम ५-६ मिनट तक इसकी चूत चोद दें ताकि ये दुबारा चुदाने को आतुर ना हो जाए और मॉम चूतड को स्प्रिंग की तरह हिलाते हुए ” आह उह उई और तेज चोद चोदकर मस्त कर दे मेरी चूत ” तो उनके बुर की चिकनाहट कम हो चुकी थी और चूत को गर्म कर उसमें वीर्य स्खलित करना ही तृप्त करना होता है। मॉम की बुर मे लन्ड तिरछा ही पेल रहा था ताकि चूत की दीवार से लन्ड टकराए और दोनों को संभोग का मजा मिले, मॉम मुड़कर बोली ” विशाल तेरा लन्ड तो देर तक टिकता है
( मैं पूरे गति से चुदाई करने लगा ) यस मॉम क्यों मजा नही आता
( मॉम चूतड हिलाना दुबारा शुरू की ) हां विशाल मजा तो आता है वैसे तुम मेरी मुंह का प्यास बुझाए फिर आकांक्षा के मुंह को फिर चुदाई कर रहे हो कितने देर में गीला करोगे
( मेरा लन्ड गपागप अंदर बाहर होने लगा ) क्यों मॉम लहर रही है क्या
( मॉम हंस दी ) उहुंह चोदो फिर कल ही तुझे तंग करूंगी
( मेरा लन्ड पूरी तरह से लोहे का रॉड हो चुका था और मैं चोदते हुए मॉम के स्तन को भी दबाने लगा ) मॉम पहले तो आकांक्षा की बुर में लन्ड डालूंगा फिर तेरी बारी
( मॉम चूतड हिलाते हुए हांफने लगी ) पहले उसके साथ कुछ दिन तक ओरल सेक्स करो फिर वो तैयार हो तब ऐसा करना
( मैं अब रस छोड़ने पर था ) जरूर फिलहाल तो मेरा लन्ड रस छोड़ने पर है ” और लन्ड से उसकी बुर गीली हो गई फिर विशाखा मुझसे अलग होकर वाशरूम गई, फ्रेश होकर कपड़ा पहनी तो मैं भी फ्रेश होकर सो गया।
अगले दिन रविवार था सो बहन भी घर पर ही रहती और मैं अगले दिन उसको तंग करने के मूड में था, सुबह ०७:४५ बजे मेरी आंख खुली तो मैं फ्रेश होकर डाइनिंग हॉल आया फिर बेबी को चाय बनाने बोला लेकिन वहां बैठने की बजाय आकांक्षा के रूम की ओर गया, संयोग कहिए की दरवाजा अंदर से बंद नही था और मैं अंदर घुसा तो देखा की वो नींद में है। उसके बदन पर स्लीवलेस नाइटी थी तो उसके चित लेटे होने के कारण उसकी पेंटी तक दिख रही थी, मैं जानता था की इसके रूम में अभी कोई नही घुसेगा इसलिए आराम से बेड पर बैठा फिर उसके कमर पर हाथ लगाए पेंटी की हुक खोल दिया, उसके पेंटी को धीरे धीरे उसकी चूत से हटाया फिर उसको नींद में छोड़कर रूम से निकल गया तो बेबी चाय का प्याला टेबल पर रख चुकी थी और मैं चाय पीते हुए नुजपेपर लिया फिर पढ़ने लगा। कुछ देर बाद आकांक्षा वहां आई और फिर मेरे बगल में बैठ गई तो मैं उसे एक नजर देखा, बेबी उसके लिए चाय बनाने गई तो उसने धीरे स्वर में बोला ” क्यों भैया सिर्फ पेंटी को खोले थे या कुछ और किए थे
( मैं बोला ) तेरा दिमाग तो ठीक है, मैं कब तेरे रूम घुसा ” और वो इधर उधर देख झट से मेरे शॉर्ट्स पर से ही लन्ड की उभार पकड़ दबा दी ” आउच इतने जोर से मत दबाओ
( आकांशा मेरे गाल चूम ली ) आज तुझे बताती हूं की मैं तुम्हें कितना तंग कर सकती हूं ” फिर बेबी चाय लाकर दी तो वो चाय पीने लगी जबकि मैं उठकर अपने रूम चला गया फिर स्नान करने के लिए वाशरूम घुसने वाला था की आकांक्षा आई ” ओह इतनी जल्दी स्नान लगता है कहीं जाने की तैयारी है
( मैं उसकी ओर हाथ बढ़ाया फिर उसकी चूची पकड़ जोर से दबा दिया ) आह धीरे करो दर्द हो गया ” और फिर आकांक्षा बोली ” चल ना साथ में ही स्नान करते हैं
( मैं उसको देखते हुए बोला ) ठीक है लेकिन किसके वाशरूम में ” वो मुझे अपने रूम बुलाई और मैं अपना कपड़ा लिए रूम से निकला, संयोग से डाइनिंग हॉल में कोई नही था और आकांक्षा मेरे साथ वाशरूम घुस गई तो दोनों अपने कपड़े हेंगर में टांग दिए फिर वो मेरे शॉर्ट्स पर हाथ लगाई तो मैं उसके स्कर्ट को नीचे कर उतार दिया, बहन को नंगा कर अपनी बाहों में ले लिया तो वो भी मुझे नग्न कर मुझे चूमने लगी और दोनों झरने के नीचे खड़े थे की मैं झरना ऑन कर दिया। आकांक्षा के चेहरे को चूमता हुआ उसके चूतड पर हाथ फेर रहा था और दोनों का बदन भीग रहा था, तभी आकांक्षा मेरे ओंठ पर ओंठ रख चुम्बन दी तो मैं उसके गर्दन में हाथ डाले उसके ओंठ मुंह में लिए चूसने लगा जबकि मेरा हाथ उसकी जांघों को फैलाकर बुर को टटोलने लगा और बहन झट से ओंठ निकाल अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल कर चुसवाने लगी, विशाल तो उसको बाहों में लिए फ्रेंच किस्स कर रहा था और मेरा लन्ड टाईट होने लगा, वो मेरे छाती से अपने बूब्स रगड़ने लगी और पैर मेरे पैर से लपेट कामुकता का इजहार कर रही थी, कुछ देर में जीभ निकाल उसके बूब्स को पकड़ा और दबाने लगा ” मॉम जान गई ना तब समझना
( आकांक्षा मेरे लन्ड पकड़ हिलाने लगी ) उनको क्या फर्क पड़ता हैं ” और मेरी छोटी बहन घुटनों के बल होकर मेरे लन्ड मुंह में लिए चूसने लगी तो मैं उसके बाल पकड़ उसकी मुंह में ही लन्ड का धक्का देने लगा, दोनों भींग चुके थे फिर झरना बंद कर दिया और आकांक्षा तो मेरे कमर में हाथ डाले मुंह का झटका देते हुए मुखमैथुन करने लगी, मेरा लन्ड तो बुर का भूखा था लेकिन बहन को सिर्फ ओरल सेक्स से ही मतलब था, कुछ देर बाद लन्ड मुंह से निकाल उठकर खड़ी हुई तो मैं बॉडी वाश लिया फिर उसे बहन के बदन पर लगाने को सोचा लेकिन आकांक्षा मेरे हाथ पकड़ बूब्स पर रख दी ” इसे पहले चूसो फिर स्नान होगा ” तो मैं आकांक्षा के सामने खड़ा था, उसके छाती पर मुंह लगाया फिर बूब्स मुंह में लिए चूसने लगा तो वो मेरे लन्ड को हिला रही थी, आकांक्षा की चूची उम्र के हिसाब से साइज में थी जिसे पूरी तरह से मुंह में लिए चूसने लगा तो वो मेरे लन्ड को जोर जोर से हिलाने लगी ” आह उह उई बुर तो मानो पेनिस के लिए उतावला है लेकिन अभी मैं वर्जिन ही रहना चाहती हूं ” मैं उसके बूब्स को निकाल दिया फिर उसके सामने बैठ गया, उसके एक पैर अपने कंधे पर रख चेहरा को बुर पर लगाया और आकांक्षा उंगली से बुर फैला कर चटवाने लगी, मेरा जीभ बुर में था तो मैं बहन की बुर चाटने में मस्त था और इतने में दरवाजा नॉक होने लगा तो आकांक्षा बोली ” कौन है मैं स्नान कर रही हूं
( मॉम की आवाज थी ) स्नान वो भी विशाल के साथ दरवाजा खोल तो बताऊं ” लेकिन मैं बुर चाटते रहा फिर आकांक्षा मेरे सामने से हट गई और मैं वाशरूम के कोने में खड़ा हो गया, बहन दरवाजा खोली और मॉम बोली ” विशाल रूम में नही है
( आकांशा बोली ) यहीं है थोड़े देर बाद तेरी बारी है ” फिर मॉम चली गई तो मैं बहन के बदन पर तो वो मेरे बदन पर बॉडी वाश लगाने लगी और मैं खड़े खड़े उसकी बुर में उंगली घुसाए कुरेदने लगा लेकिन वो तो पहले से ही रसीली थी और दोनों झरना ऑन कर स्नान कर लिए फिर मैं बदन पोंछ कपड़ा पहन लिया तो आकांक्षा भी कपड़े पहन निकल गई, मेरा लन्ड तो फुंफकार रहा था और मुझे चूत की दरकार थी, आगे क्या होगा पढ़िए अगले भाग में।

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