गुप्ता जी के कारनामे भाग 11

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ड्राइवर ने टैक्सी बढ़ाई और पीयूष ने अपना हाथ रोजी की जांघ पर रख कर उसकी जांघ सहलाते हुए अपना फ़ोन निकाला और एक वीडियो प्ले कर दी ये एक 30 मिनट की पोर्न वीडियो थी रोजी ने भी शराब के नशे में तुरंत पीयूष का लंड मसलना शुरू कर दिया और वो वीडियो देखने लगी जिसमे एक आदमी किसी रण्डी को कॉल कर के उसे कोई टीन गर्ल चोदने की डिमांड करता है और फिर थोड़ी देर में वो callgirl जो कि 30-32 age की थी एक 18 साल की खूबसूरत लड़की को ले कर उसके घर पहुंचती है वो दरवाज़ा खोलता है तो वो दोनों अंदर आती हैं और वो आदमी उस लड़की को देख कर खुश हो जाता है वो रण्डी उस लड़की का एक घंटे का चार्ज 1000 डॉलर बताती है वो आदमी उसे पे करता है और पैसे मिलते ही वो रण्डी उस लड़की को खड़ा कर के उसके सारे कपड़े निकाल कर उसे एकदम नंगी कर के उस आदमी के सामने खड़ी कर के बैग से एक रस्सी का टुकड़ा निकाल कर उसके दोनों हाथ पीछे कर के बांध देती है फिर वो रण्डी उस हाथ बंधी हुई लड़की को उस आदमी की टांगों के बीच बिठा कर आदमी की पैंट खोल कर उसका लंबा मोटा सख्त लौड़ा बाहर निकाल कर लड़की के बाल पकड़ कर खींचते हुए लड़की का चेहरा उसके लंड पर रगड़ने लगती है और फिर लड़की को मुह खोलने को बोलती है मुह खोलते ही वो आदमी का लौड़ा पकड़ कर उसके मुह में डाल कर लड़की को गालियां देते हुए उसे लंड चुसवाती है और कुछ देर में वो रण्डी आदमी की पैंट और अंडरवियर निकाल कर उसे एकदम नंगा करते हुए लड़की से उसकी गांड़ चटवाती है बीच बीच मे वो खुद ही आदमी के लंड और गांड़ पर थूक थूक कर उस लड़की से वो सब चटवाती है और फिर खुद भी नंगी हो कर उस लड़की की गांड़ चाटने लगती है उधर वो आदमी लड़की के मुह में कई बार थूकता है उसके गालो पर थप्पड़ मारते हुए उसका मुह अपने लंड से चोदता है और फिर लड़की को कुतिया बना कर वो औरत आदमी का लंड उसकी गांड़ में डाल कर उसकी गांड़ को मोटे लंड फड़वा के चुदवा देती है और बीच बीच मे वो औरत लड़की की गांड़ से आदमी का लंड निकाल कर चूसने लगती है और लड़की की चुदी हुई गांड़ में जीभ डाल कर चाटने लगती है और आखिर में वो आदमी उस लड़की गांड़ चोद चोद कर उसकी गांड़ में ही झड़ जाता है और जब वो अपना लंड उसकी गांड़ से निकालता है तो वो रण्डी उस लड़की की गांड़ से बहता हुआ उसका वीर्य चाट चाट कर पी जाती है इतनी हार्डकोर वीडियो देख कर पीयूष का लंड सातवे आसमान में उड़ने लगा एक तो व्हिस्की का नशा ऊपर से गरम सीन पीयूष ने रोजी की एक चूची मुट्टी में भर कर दबोचते हुए कहा रोजी बुरचोदी मेरे लंड को ऐसे मज़े कब दिलवाएगी रोजी ने सिसकते हुए कहा पीयूष मैं तो अभी तैयार हूं चलो घर अभी तो शकीला और सुनीता भी शायद घर पर हो कोई भी एक हुई तो उसे ऐसे ही हाथ बांध कर उसकी गांड़ चुदवा दूंगी तुम्हारे मोटे लंड से और उनकी गांड़ से तुम्हारे लंड का पानी चूस कर पी जाऊंगी राजा….. पीयूष ने उसके निप्पल को उमेठते हुए धीरे से कहा पर अभी तो अंकिता होगी घर मे…… रोजी नशे और सेक्स की रौ में थी उसने पीयूष का लंड तेजी से दबाते हुए कहा फिर तो आज अंकिता को ही नंगी कर के बिठा दूंगी तुम्हारे इस सख्त खूंटे पर आज उसे देखा एकदम चोदने लायक जवान लौंडिया हो गयी है वो…… ऐसे माहौल में ये बात सुन कर पीयूष भी मस्ती में भर उठा पर खुद को सम्हाल कर बोला नही नही ये सब मत बोलो वो बेटी है मेरी फिलहाल तो आज कुछ नही हो पायेगा लेकिन कल कुछ बढ़िया इन्तजाम करो कल मैं सारा दिन घर पर अकेला हूँ…. रोजी ने कहा ठीक है पीयूष कल का दिन तुम भूल नही पाओगे तब तक वो लोग शोरूम पहुंच गए टैक्सी रुकी पीयूष ने उसे उतरने को कहा तो रोजी ने कहा पीयूष मैं अब घर चली जाऊं क्यों कि शराब भी पी रखी है ऐसे में शोरूम जाना ठीक नही पीयूष ने कहा ठीक है और वो दूसरी टैक्सी पकड़ घर चल दी पीयूष ने भी ऐसी हालत में घर जाना ही ठीक समझा और ड्राइवर को अपने घर का पता बता दिया…..
उधर अंकिता अपने कमरे में अपने बैग में एक जीन्स एक टीशर्ट एक बरमूडा और एक नाईट सूट के अलावा दो जोड़ी अंडरगारमेंट्स भी रख चुकी थी फिर उसने एक तौलिया हेयर ब्रश टूथ ब्रश और अपना ब्लूटूथ हेडफोन भी बैग में रख लिया पैसे तो थे ही उसके पास अब वो सन्तुष्ट थी और कल के बारे में सोच सोच कर खुश हो रही थी कल पहली बार चूत में उंगली करने से ज्यादा कुछ करने का मौका मिलने वाला था उसे…… तभी उसकी नजर उन अंडरगारमेंट्स पर पड़ी जो पापा ने उसे बाद में दिए थे उसने बॉक्स खोल कर वो ब्रा पैंटी बाहर निकाली और उनके कपड़े को हाथ फिरा कर देखने लगी फिर ना जाने क्या सोच कर उसने उठ कर कमरे का दरवाजा बंद किया कमरे में लगे शीशे के सामने जा खड़ी हुई और अपनी जीन्स और टीशर्ट निकाल कर बेड पर फेंक दी अब उसके जिस्म पर कॉटन की ब्रा और पैंटी थी वो शीशे में गौर से अपने सीने को देखने लगी उसे लगा उसकी चुचिया अभी काफी छोटी हैं फिर उसने मुद कर पैंटी में फंसी अपनी गांड़ को देखा और उसे याद आ गया पापा कैसे उसकी गांड़ को निहार रहे थे और उसके गाल और गुलाबी हो गए एक बार फिर उसके मन मे सवाल उठा क्या नरगिस के चाचा जैसे मेरे पापा भी मुझे अपना लंड उफ़्फ़फ़ उसकी चूत फिर से धधक उठी उसने बेड से वो रेड कलर की ब्रा पैंटी उठाई और फिर अपनी पहनी हुई ब्रा पैंटी भी निकाल कर फेंक दी अब वो एकदम नंगी थी एक बार फिर शीशे में आने नंगे बदन को जीभर कर देखने के बाद उसने वो ब्रा पैंटी पहन ली और फिर से शीशे में खुद को देखने लगी खूबसूरत तो वो बला की थी ही ऊपर से ऐसी सेक्सी लिंगरी में खुद को देख कर वो उत्तेजित होने लगी और खुद ब खुद शीशे में देखते हुए अपनी चुचिया और चूत सहलाने लगी…….
ठीक यही समय था जब टैक्सी घर के बाहर रुकी और पीयूष भाड़ा दे कर अंदर आ गया शकीला जा चुकी थी और सुनीता किचन में खाना बना रही थी पीयूष ने घंटी बजाई तो सुनीता ने आ कर दरवाज़ा खोला आज सुनीता ने गुलाबी साड़ी पहनी थी और जँच रही थी पीयूष ने सुनीता के ऊपर से नीचे तक देखा इस वक़्त वो काफी उत्तेजित था पर सुनीता दरवाज़ा बंद कर के वापस किचन में चली गयी पीयूष ने ड्राइंग रूम में आ कर देखा अंकिता के कमरे का दरवाजा बंद था तो वो चुपचाप किचन में घुस गया और सुनीता के पीछे से जा कर उस से लिपट कर उसकी चुचिया मसलने लगा सुनीता ने कोई विरोध तो नही किया पर इतना जरूर बोली राजा अंकिता अपने कमरे में जरा ध्यान रखना पर पीयूष ने उसकी बात पर खास ध्यान ना देते हुए उसकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर उठाते हुए उसकी गांड़ नंगी कर दी अंदर सुनीता ने गुलाबी फूलों वाली पैंटी पहनी हुई थी पैंटी में कसे कसे चूतड़ देख कर पीयूष उन पर हाथ फिराते हुए बोला सुनीता रांड कल तो तेरी गांड़ मारूँगा मैं सुनीता ने उसकी आँखों मे देखते हुए कहा मार लेना मेरा राजा मेरी गांड़ में अपना सख्त लौड़ा डाल कर चोद देना मेरी गांड़ को और ये सुनते ही पीयूष ने एक तेज थप्पड़ उसके चुतड पर मारते हुए कहा ऐसे ही थप्पड़ मार मार के तेरी गांड़ मारूँगा कुतिया सुनीता सिसकते हुए बोली हां राजा ऐसे ही मेरी गांड़ को तमाचे मार मार के चोदना अपनी रण्डी की गांड़ हाय अंकिता ना होती तो अभी गांड़ खोल कर कुतिया बन जाती तुम्हरे आगे और चुदवा लेती……
घंटी की आवाज़ सुन कर अंकिता ने फटाफट एक लोअर टीशर्ट पहनी और अपने कपड़े समेट कर रख कर दरवाज़ा खोल कर बाहर आ गयी तभी उसके कानों में एक तेज आवाज आई जैसे कोई किसी को मार रहा हो उसके मन मे उत्सुकता हुई जानने की और वो दबे पांव किचन को ओर बढ़ी आवाज़ उधर से ही आयी थी किचन के दरवाजे के पास पहुंच कर अंदर का दृश्य देखते हुए उसे थोड़ा सा शॉक लगा पापा सुनीता से चिपके हुए उसकी नंगी गांड़ को मसल रहे थे और तभी पीयूष ने एक और तेज थप्पड़ मारा उसकी गांड़ पर जिसकी आवाज़ पहले से भी ज्यादा तेज थी अंकिता चुपचाप दम साध का अंदर का सीन देखने लगी पीयूष ने अपना लंड पैंट के ऊपर से सुनीता के मोटे चूतड़ों पर रगड़ते हुए कहा तेरा फ़ोन ले आया हूँ और तेरे लिए कपड़े भी लाया हूँ सुनीता ने मुस्कुरा कर उसका गाल चुम लिया और बोली फिर तो कल मैं अपने राजा जी को बहोत मज़े दूंगी…. पीयूष ने अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल कर गांड़ की दरार में फिराते हुए अपनी मोटी उंगली एकदम से उसकी कसी हुई गांड़ में पेल दी और सुनीता कसमसा उठी पीयूष ने उंगली को कई बार तेजी से गांड़ में अंदर बाहर किया और फिर उंगली उसकी गांड़ से निकाल कर सुनीता के होठो पर रगड़ने लगा सुनीता ने जीभ निकाल कर पीयूष की उंगली चाटते हुए कहा उंगली जाने में ही जान निकल गयी राजा तो इतना मोटा लंड कैसे लुंगी अपनी गांड़ में पीयूष ने कहा वो सब मैं नही जानता मुझे तो बस कल तेरी गांड़ चोदनी है और तुझे जलील कर के तेरे इस रसीले बदन का मज़ा लेना है सुनीता के पति ने कभी ऐसे नही कहा था उसे उसे मन में खुशी हुई कि इस उम्र में भी इतने पैसे वाले और स्मार्ट बंदे को उसका बदन इतना लुभा रहा है उस ने पीयूष का लंड सहलाते हुए कहा चोद लेना राजा मना नही करूंगी भले ही मर जाऊं…. हांलाकि सुनीता जानती थी गांड़ मरवाने से कोई औरत आज तक नही मरी उधर अंकिता अपने सामने चल रहे गरम सीन को देख कर खुद भी गर्म हुई जा रही थी….. फिर वो वापस अपने कमरे तक आयी और कमरे का दरवाज़ा जोर से खोल कर बंद किया ताकि पीयूष और सुनीता को उसकी मौजूदगी का अहसास हो जाये……
दरवाज़े की आवाज़ सुनते ही पीयूष और सुनीता फुर्ती से अलग हुए सुनीता ने अपनी साड़ी नीचे की और पीयूष एक गिलास पानी ले कर पीता हुआ किचन से बाहर आया अंकिता ड्राइंग रूम में सोफे के पास खड़ी थी पीयूष ने उसे देख कर स्माइल दी अंकिता ने भी स्माइल की पर उसकी नजर बार बार पापा की पैंट में उभरे हुए bulg पर जा रही थी…. पीयूष अपने कमरे में गया और चेंज कर के बनियान और पाजामा पहन कर ड्राइंग रूम मे आ गया अंकिता सोफे पर बैठी tv पर यू ही चैनल बदल रही थी पीयूष भी आ कर उसके पास बैठ गया उसका लंड अभी भी काफी हद तक खड़ा था अंकिता ने एक मूवी चैनल लगा दिया उस पर टोटल धमाल चल रही थी वो मूवी देखते हुए बार बार चोर नजरो से पीयूष का लौड़ा देख रही थी उसे लग रहा था कि उसने बेकार में पापा को डिस्टर्ब कर के उनका मज़ा किरकिरा के दिया आखिर वह भी तो सुबह से शाम तक काम मे लगे रहते हैं थोड़ा एन्जॉय तो उन्हें भी चाहिए वो भी इंसान हैं और पीयूष के दिमाग मे सिर्फ ये चल रहा था कि कल सुबह अंकिता और राजीव के जाने के बाद वो घर पर सुनीता रोजी और शकीला के साथ क्या क्या करेगा….. तभी उसने कहा अंकिता वो सुनीता के कपड़े और दुसरा फोन कहाँ है ले आओ तो अंकिता उठ कर अपने कमरे से दोनों चीजे ले कर आ गयी और पीयूष के सामने पड़ी मेज पर रखने के लिए झुकी उसकी टीशर्ट का गला थोड़ा बड़ा और ढीला था झुकते ही पीयूष की नजर अंदर उसकी लाल कलर की ब्रा पर पड़ी वो पहचान गया ये तो वही ब्रा है जो उसने अभी अंकिता को दी थी शोरूम में उसे खुशी हुई कि उसकी दी हुई चीज अंकिता को पसन्द आयी पापा को ऐसे अपनी टीशर्ट के अंदर झांक कर अपने चूचे घूरते देख कर अंकिता थोड़ा शरमाई पर फिर वो हिम्मत कर के पीयूष के पास आई और उसकी गोद मे उछल कर जा बैठी पीयूष ने भी अंकिता की कमर में हाथ डाल कर उसे अच्छे से अपनी गोद मे बिठाते हुए कहा तो कल जा रही हो तुम ट्रिप पर अंकिता बोली हाँ पापा सुबह 6 बजे जाना है पर मेरी नींद तो 7 से पहले कभी खुलती नही पीयूष ने उसकी गांड़ की नरमी और गर्मी अपने लंड पर महसूस करते हुए कहा कोई बात नही बेटा तुम अपने रूम का दरवाजा मत बन्द करना मैं सुबह तुम्हे जगा दूंगा ठीक 5 बजे पर अंकिता कुछ सोचते हुए बोली पापा अगर मैं आज आपके रूम में सो जाऊ तो आपको कोई प्रॉब्लम होगी क्या शाम को पी हुई व्हिस्की अब पीयूष के सर चढ़ गई थी और ऊपर से रोजी और सुनीता के की हुई मस्ती का नशा अलग चढ़ा था पीयूष ने अंकिता की जांघो पर दोनों हाथ रख कर सहलाते हुए कहा मुझे क्या प्रॉब्लम होगी तुम्हारा घर है चाहे जहां सो जाओ पीयूष के सख्त हाथों को अपनी चिकनी जांघो पर पा के अंकिता की चिकनी बुर में चीटियां सी दौड़ने लगी वो अपनी जांघो को आपस मे रगड़ती हुई बोली ठीक है पापा थैंक यू….. और पीयूष का लंड अब बुरी तरह झटके लेने लगा था और लोअर के पतले कपड़े के ऊपर से अंकिता के चूतड़ पर जबरदस्त ठोकरें मार रहा था और पीयूष ने tv देखते हुए पता नही किन ख्यालों में आ कर एक हाथ उठा कर अंकिता के गाल को धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया अंकिता के पूरे जिस्म में झुरझुरी होने लगी और उसे ऐसा लगने लगा कि आज पापा कुछ खास दिलचस्पी ले रहे हैं उसमें और ये अच्छा भी लग रहा था तो वो वह भी चुपचाप पापा को गोद मे बैठी उनके लंड की गर्मी महसूस करती हुई अपनी बुर गीली कर रही थी….. तभी अचानक पीयूष ने अपनी मोटी उंगली एक बार अंकिता के होंटो पर फेर दी और अंकिता के होठो पर उंगली लगते ही उसका बदन कांप से गया….. और उसे एकदम से याद आया यही उंगली तो पापा ने सुनीता के गांड़ में डाल कर उसे चुसवाई थी उसे उंगली से आती हुई स्मेल अजीब सी लगी पर पता नही कैसे हिम्मत कर के उसने अपनी जीभ निकाल एक धीरे से फिर दी पीयूष की उंगली पर पीयूष तो नशे में था शराब और सेक्स के उसे इस बात का अहसास भी नही हुआ पर अंकिता के मुह में कसैला से स्वाद घुल गया…. उसे अब समझ आ रहा था गांड़ चाटने पर कैसा स्वाद आता होगा…..
to be continued……

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