जिस्म की गर्मी : भाग-५

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फ्रेंड्स
दीपा अंबाला को छोड़ते हुए कुछ और आनंद की प्राप्ति कर रही है, एक २६ वर्षीय महिला के लिए काम क्रिया से बढ़कर कुछ और नहीं होता खासकर तब जब बच्चे पैदा नही की हो, कभी मॉम का तो कभी सासू मां का दबाब लेकिन फिलहाल ना तो मेरा इरादा है ना ही विवेक की इच्छा और मैं मोंटी से चुदाई का मजा लेकर बिस्तर पर से उठी फिर नंगे ही अपने बेडरूम जाने लगी लेकिन मोंटी तो अपने पैकिंग के काम में व्यस्त था, मैं उसके सामने से चूतड लचकाते हुए जाने लगी तो वो बोला ” आज एक र्राउंड एनल सेक्स भी हो जाए
( मैं पलट कर हंसी ) अब तीन बजे के आसपास ” और बेडरुम आकार पहले तो व्हिस्की को ग्लास में डाली फिर गटागट दो पैक पीकर एक सिगरेट सुलगाई, दुबारा नंगे ही डाइनिंग हॉल आ गई और सोफा पर बैठकर उसको देखने कहीं, वो कमर से टावेल लपेटे काम कर रहा था ” तुम खाना खाने जाओगे तो मेरे लिए भी कुछ खाना पैक करा कर लेते आना
( वो मुझे देखता हुआ बोला ) आप नाश्ता कर लीं
( मैं बोली ) हां ब्रेड एंड बटर ” फिर उठकर बेड रूम गई, वार्ड्रोब से एक सेक्सी लिंगेरीय निकाल बेड पर रखी फिर वाशरूम घुसी, बुर वीर्य से चप चप कर रहा था और मैं सीधे झर्रना को खोल फर्श पर बैठी साथ ही बॉडी वाश पास में रखी अब झरना से जिस्म भींगने लगा तो मैं स्नान कर रही थी, अब अपनी बुर में उंगली करके बुर की सफाई करने लगी तो बदन के भींगते ही झरना से थोड़ी दूर खिसक गई, नंगे ही फर्श पर बैठकर बॉडी वाश लगाने लगी, खासकर अपनी बुर में उंगलियों की मदद से सफाई की और अपने चेहरे से गर्दन सहित चुचियों पर बॉडी वाश लगाकर बदन रगड़ने लगी। अचानक एहसास हुआ की कोई मेरे पीछे खड़ा है, देखी तो मोंटी था ” अरे तुम जाकर अपना काम करो, हटो यहां से
( वो अपना टावेल खोलकर लन्ड पकड़ लिया ) ये देखो मेरा लौड़ा दुबारा टाईट हो गया एक बार गांड़ चोदने दो ना
( मैं गुस्से से आग बबूला हो गई ) अभी रेस्ट करने दो, जाओ ” वो चला गया और मैं अच्छे से स्नान की फिर भींगे हुए बदन को पौंछकर नंगे बेड पर आकर लेट गई, वैसे दरवाजा खुला था लेकिन थकावट के मारे मैं नंगे जिस्म पर चादर डालकर लेटी रही, वैसे भी ११:५५ दोपहर का वक्त था तो मोंटी अब मेरी गिरफ्त में था और थोड़ी देर रेस्ट के बाद गांड़ चुदाई की मेरी इच्छा थी, वैसे भी अंबाला कैंट में रहकर गांड़ बहुत कम बार चुदाई कारण की सरदार लोगों का लौड़ा हद से ज्यादा ही मोटा होता है लेकिन मोंटी का लन्ड लंबा और डेढ़ इंच ही मोटा था। मैं थकावट के मारे गहरी निद्रा में सो गई, मेरी निंद मोंटी के आवाज से टूटी ” मैडम क्या लाना है खाने में
( मैं आंख खोली ) ओह मोंटी मैं सो गई थी, खाने में मसाला डोसा ले आना, कितने देर में आओगे
( वो ) जी आधे घंटे में ” फिर वो जाने लगा ” अरे पैसा तो ले लो
( वो मुड़कर बोला ) ले लूंगा मैडम ” उसके जाते ही मैं उठी फिर वाशरूम जाकर छर छर् मूतने लगी, फिर आकर एक सेक्सी ड्रेस पहन ली, जोकि मेरी मोटी जांघों को कुछ हद तक ढक सकता था, वो भी खड़े रहने पर जबकि बैठती तो समझो चढ्ढी तक दिख जाती। मैं व्हिस्की निकाली फिर ग्लास में पैक बनाकर पीने लगी, एक पैक और पीने की इच्छा हुई तो अब बदन की थकान भी कम हो चुकी थी, डाइनिंग हॉल का सोफा और उधर टी वी सहित फ्रीज एक बॉक्स में था पता नही अकेले कार्टून में कैसे किया होगा या कोई और आया था, वही जाने, फिर अपने पति से मोबाइल पर बात की और मोंटी का इंतजार करने लगी।
मैं डाइनिंग हॉल में बैठकर मोबाइल पर ही न्यूज देखने लगी और लगभग दोपहर के २:२० बजे होंगे की डोर बेल बजा, मैं जाकर दरवाजा खोली फिर मोंटी अंदर आया, उसके हाथ में एक प्लास्टिक बैग था यकीनन उसमें खाना ही लाया होगा, फिर वो बैग डाइनिंग टेबल पर रख पूछा ” मैडम थोड़ा वाशरूम जाना है
( मैं हंस दी ) उस रूम का वाशरूम गए थे ना तो फिर ” वो चला गया और मैं झट से मसाला डोसा निकाल कर खाने लगी ताकि जल्दी से मोंटी के साथ हमबिस्तर हो सकूं, वो आते ही अपना शर्ट और पैंट खोला फिर एक टावेल कमर से लपेटकर मेरे सामने वाले सोफा पर बैठ गया और मुझे टुकुर टुकुर देखने लगा, मैं पैर पर पैर चढ़ाए बैठी थी इसलिए मेरी जांघें क्या, मेरी पेंटी तक उसे दिख रही थी, मैं खाते हुए बोली ” अब और कुछ पैक करना है
( वो मुस्कुरा दिया ) हां पहले सब कुछ खोलूंगा फिर पैक करूंगा ” उसके इशारे को समझते हुए मैं हंस दी फिर उठकर हाथ मुंह धो ली, ” चल अब बेड पर एक साथ आराम करते हैं ” वो मेरे साथ गेस्ट रूम घुसा फिर मैं बेड पर चित लेट गई ” पहले तो मेरी बदन ks मालिश कर उसके बाद ही कुछ करना
( वो मेरे पैर के पास बैठा हुआ मेरे ड्रेस को कमर तक किया फिर जांघों को हल्के हाथों से दबाने लगा ) बोलिए तो तेल लगाकर मालिश कर दूं
( मैं बोली ) ओह तब तो पूरा मजा आयेगा जानू, उठकर इस ड्रॉवर से तेल निकाल ले ” तो वो तेल की बोतल के साथ एक क्रीम की ट्यूब भी निकाला फिर मेरे कमर के पास बैठकर मेरे ड्रेस को ऊपर की ओर करने लगा, मैं समझदार औरत की तरह खुद ही ड्रेस उतार दी और पूरा बदन नंगा ही था सिवाय एक पेंटी बुर को ढक रखी थी। मोंटी मेरे शरीर के पास बैठकर बोला ” तेल से चादर गंदी हो सकती है
( मैं ) अबे साले चोदू मेरी बदन गंदी हुई तो चादर क्या चीज है ” फिर वो तेल मेरे स्तन पर चुवाने लगा, इतना ही नहीं बल्कि मेरे वक्षस्थल से लेकर पेट की नाभी तक तेल गिराया फिर अपना एक हाथ मेरे स्तन पर लगाकर पुचकारने लगा तो दूसरे हाथ से मेरे जिस्म पर तेल मालिश करने लगा, लौंडे की छुऊं से किस औरत को मजा नही आता फिर तो वो मेरी पेंटी की डोरी को खोलकर मुझे पूर्णत नग्न कर दिया और जांघो पर तेल चुवाया ” आज तो आपकी ऐसी गांड़ चुदाई करुंगा की
( मैं ) हेलो मेरी गांड़ कोई नगर निगम की पार्क नही है, अभी तो फिर से बुर चुदवाओयूंगी ” और उसका हाथ मेरे बदन पर फिसलने लगा लेकिन मेरी चूची को पकड़ वो दबाए जा रहा था, आगे अगले भाग में।

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