ट्रेन का सफर : सहयात्री बना हमसफर

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हेलो दोस्तों,
दीपा मायके में दो हफ्ता बिताकर पुरानी यादों को ताजा की फिर वापस दानापुर के लिए ट्रेन पकड़ी तो राहुल के कई एक्साम थे इसलिए उसे फुर्सत नही था और मुझे अकेले ही अपने बाबू के संग यात्रा करना था तो कानपुर से पटना तकरीबन ७-८ घंटे की यात्रा थी और राहुल ने मेरी टिकट पटना राजधानी के फर्स्ट ए सी में करा दिया था, ट्रेन रात के १०:५० बजे कानपुर सेंट्रल से थी और मुझे स्टेशन छोड़ने के लिए राहुल और मां आई थी तो मैं यात्रा में आरामदायक कपड़े ही पहनती थी लेकिन ऐसा ड्रेस जो पूरे जिस्म को ढक सके, पीले रंग की कुर्ती और काले रंग की लेगिंग्स पहन रखी थी और रात को घर से निकल जंक्शन पहुंची, ट्रेन के कोच में भाई मुझे छोड़ आया और कुली सामान रखकर चला गया। मैं बाबू को बर्थ पर लिटाती तभी सामने बैठा एक यात्री बोला ” मैडम इफ यू डोंट माइंड, बेड डाल दूं
( मैं मुस्कुराई ) जरूर भाई साहब ” तो उसके चेहरे का रंगत तो थोड़ा उड़ गया लेकिन वो मेरे बर्थ पर चादर डाला और मैं सामने वाली सीट पर बाबू को गोद में लेकर बैठ गई, ट्रेन भी खुल चुकी थी और फिर अपने बर्थ पर बाबू को लिटाई। प्रथम वातानुकूलित के इस कोच में चार बर्थ पर सिर्फ दो ही लोग थे तो वो २२-२३ साल का जवान छोकरा कोच से निकल गया और मैं अब बर्थ पर लेट गई तो पर्स को बर्थ के साइड में रख लेटी हुई थी, फिर वो लड़का कोच में आया और पूछा ” क्यों बहन जी गेट लॉक कर दूं ” मैं सर हिलाई और हामी भर दी, साला मेरे पर ब्यंग बाण छोड़ रहा है, अभी टांग चिहार दूं तो साला मुझे कामसूत्र पढ़ाने लगेगा, वो पैजामा और टी शर्ट में था, मुझे घूरता हुआ अपने बर्थ पर लेटा तो उसका चेहरा मेरी ओर था जबकि मैं चित लेटी हुई थी, कंखिया कर देख रही थी की कैसे उसकी गिद्ध दृष्टि मेरे उफान लेती बूब्स पर है, देखती हूं साला सिर्फ घूरता है या कुछ करता भी है फिर मैं जानबूझकर आंखें बंद कर नाक से खर्राटा भरने लगी ताकि उसे लगे की मैं गहरी निंद्रा में हूं, वो अपने में बड़बड़ाया ” भाई साहब बोलती है, कितने आराम से सो रही है ” तब भी मैं सोने का एक्टिंग करती रही और फिर करवट लेते हुए आंखें खोल दी और दोनो का नयन आपस में टकराया तो समझो उसके चेहरे की रंगत बदल गई ” क्यों भाई साहब कितनी देर तक बहन जी को घूरते रहोगे
( वो हंस दिया ) मैं कहां घूर रहा था
( मैं बोली ) मैं जानबूझकर खर्राटा भरने लगी लेकिन तुम तो फट्टू निकले ” और मैं अपने हथेली को चूमते हुए उसे किस्स दी और वो लड़का मेरे इशारे को समझते हुए आंख मारा, फिर तो समझो जैसे मेरे तन में आग लग गई, भले ही मुझसे उम्र मे तीन चार साल छोटा हो लेकिन क्यूट सा चेहरा और स्लिम बॉडी, हेंडसम तो नही लेकिन स्मार्ट था तो मैं बोली ” , भाई तेरा नाम क्या है
( वो बोला ) बहना मेरा नाम राज है और आपका
( मैं मुस्कुराई ) दीपा, दानापुर छावनी में पति की पोस्टिंग है
( वो उठकर बैठ गया ) अच्छा तो आप आर्मी केंटोनमेंट की महिला हैं तब तो
( मैं उठी ) तब क्या भाई, यही ना की वाईफ स्वैपिंग इज कॉमन
( वो सर हिलाया तो मैं ) मुझे तो वैसे भी शुरू से ही इधर उधर मुंह मारने की आदत है भाई ” और ट्रेन के कोच के बंद दरवाजे के अंदर सिर्फ दीपा और राज, बाबू तो सोया हुआ था और मैं बाबू को कंबल तकिया से घेर कर उठी फिर उसके बर्थ पर जाकर बैठ गई, अब बातों में क्या रखा था सिर्फ काम ( सेक्स ) ही तो बाकी था और मैं उसकी ओर खिसकते हुए उसके गले मे बाहों का हार डाल दी तो राज झट से मेरे चेहरे को चूम लिया, दोनो एक दूसरे से बैठे बैठे लिपट गए लेकिन इस तरह से काम क्रिया करना कठिन था, इसलिए मैंने उसको बर्थ पर लेटने को बोला फिर बेशर्म औरत की तरह उसके कमर के पास बैठ उसके टी शर्ट को खोलने लगी तो राज लेटे हुए मेरे बूब्स पकड़ लिया ” ओह काफी टाईट है मैडम
( मैं हंस दी ) हां भाई साहब जरा तेरा औजार तो देखूं ” और उसको पूरी तरह से नंगा कर मैं उसके सुस्त पड़े लिंग को हाथ में ले ली ” इससे तेरी बहन खुश हो पाएगी
( वो मेरे कुर्ती में हाथ घुसाया ) जरा धैर्य रखो डियर, अभी तो पूरी रात बाकी है, क्यों ” दीपा अब उसके सामने बैठे हुए अपने कुर्ती को उतार दी तो राज मेरे बूब्स को घूरने लगा और फिर खड़ी होकर लेगिंग्स को उतार दी, सिर्फ ब्लैक रंग की ब्रेसियर और पेंटी में २६ वर्षीय दीपा खड़ी थी जिसको देखते हुए राज अपना धैर्य खो बैठा, मैं उसके कमर के पास बैठ उसके जांघो को सहलाने लगी ” कभी किसी महिला या लड़की के साथ सेक्स किए हो
( वो हाथ बढ़ाकर मेरे बूब्स को पकड़ा ) हां बहना, अपने घर की नौकरानी के साथ
( मैं उसके छाती पर हाथ फेरने लगी ) छिः और कोई नही मिली ” और राज उठकर बैठा, मैं उसके सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी, अब दोनो एक दूसरे से लिपट कर चूमने लगे, मेरे गाल को चूम रहा था तो मैं उसके गर्दन को, वैसे भी कम उम्र का लौंडा मुझे पसंद था, अब मैं राज को ही अपने गोद में बिठाई, मेरे मोटे चिकने जांघो पर टांगें फैलाए बैठा हुआ राज का लन्ड मेरे नाभि से चुभ रहा था तो मैं खुद ही उसके ओंठ पर ओंठ रख चुम्बन देने लगी, उसकी छाती से बूब्स दबने लगे तो वो मेरे पीठ पर हाथ फेरता हुआ मेरे ओंठ को मुंह में लिए चूसने लगा, दोनो काम की दुनिया में खो चुके थे और फिर मैं उसके मुंह से ओंठ निकाल उसके गाल चूमने लगी, मेरे ब्रा के हुक को खोल बोला ” आज बहन तेरी दूध पियूंगा
( मैं उसके ओंठ को जीभ से चाटने लगी ) जरूर भाई आज सब कुछ पिलाऊंगी ” इतने में मैं अपने जीभ उसके मुंह में घुसाई तो २१ साल का छोकरा उतना भी मूर्ख नहीं था और वो मेरे गर्दन में हाथ डाले जीभ चूसने लगा तो उसको गोद में बिठाकर उसके छाती से बूब्स रगड़ते हुए ट्रेन के सफर में सहयात्री के साथ सहवास करने वाली थी, मेरे जीभ उसकी मुंह में था तो चुम्बन की क्रिया से कामुकता जग उठी और वो मेरे जीभ को चूसता हुआ मेरे पीठ सहलाने लगा तो उसका लन्ड लंबवत मेरे नाभि से सटा हुआ था, कुछ देर मे ही मेरी बुर गुदगुदाने लगी और मैं अब उसके मुंह से जीभ निकाली ” क्यों बहना कैसा लगा फ्रेंच किस्स
( मैं उसके कंधे पर सर रख बोली ) तू उतना भी छोटा नही है जितना मुझे लगा ” और दोनो एक दूसरे से अलग हुए, अब मुझे बर्थ पर लिटाया फिर मेरे ऊपर सवार हुए चेहरे को बूब्स पर रखा और पागलों की तरह अपने चेहरे को मेरे गोल मुलायम बूब्स पर रगड़ने लगा, मैं उसकी काम कला से खुश थी और रात भर js सफर यादगार बनाना चाहती थी, राज अब मेरे बूब्स को पकड़ मुंह में लिया लेकिन मेरी चूची ३६ सी साईज की ब्रा में समाती है तो आप अंदाज लगा सकते हैं की कितनी बड़ी मेरी चूची है और राज बूब्स का आधा से अधिक हिस्सा मुंह में लिए चूस रहा था तो दूसरे हाथ से चूची का निप्पल पकड़ उंगलियों से मिंज रहा था, उसके बदन के नीचे लेटे हुए उसके लन्ड का एहसास जांघो के बीच पा रही थी लेकिन अभी तो ओरल सेक्स में दोनो लगे हुए थे ” उफ ओह आह राज अब चूची छोड़ो ना प्लीज बुर में इतनी खुजली हो रही है
( वो एक बूब्स मुंह से निकाला ) दूध पीकर मजा आया दीदी
( मैं उसके गाल सहलाने लगी ) तुम क्या खाक व्यंग बाण बोलोगे भाई, मैं तो अपने भाई राहुल के साथ ही पहली बार संभोग क्रिया की थी ” और वो दाहिने बूब्स को मुंह में लिए चूसने लगा तो मैं राज के पीठ पर नाखून गड़ाते हुए काम वासना की दुनिया में खो चुकी थी, चेहरा अपने बर्थ की ओर कर देखी तो बाबू सो रहा था और ट्रेन अपने रफ्तार से चल रही थी, आगे क्या हुआ अगले भाग में।

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