नंगी फिल्म प्रॉडक्शन ( 2 ) : गंगा का गंगास्नान

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ग्यारह शिक्षिकाओं का मुआयना करना था। अब इसे चाहें तो स्क्रीन टेस्ट कहें, या इंटरव्यू, या काम-साक्षात्कार या अंग-गुप्तांग परीक्षण — सबसे पहले जों लजवंती लाई गई उसका प्यारा नाम गंगा था, गंगा गुप्ता। वह एकदम नई शिक्षिका थी। उम्र सिर्फ 21 वर्ष। कन्या विद्यालय की प्रिंसिपल बेलारानी भोसले ने इस कमसिन नई-नवेली को कैसे तैयार किया यह तो वो ही जाने। गंगा बिलकुल शुभ्र श्वेत साड़ी व अंगवस्त्रों में थी और उसने चांदी के आभूषण पहन रखे थे। बालों में भी श्वेत पुष्पों का गजरा था। ललाट पर श्वेत चन्दन का टीका। साड़ी के भीतर अधोवस्त्र नहीं थे, यहाँ तक की वक्षःस्थल भी उसने सफ़ेद साड़ी के किनारे से ही ढ़क रखा था। उसकी मुस्कान मधुर व लुभावनी थी; उसने अपना सिर थोड़ा झुका रखा था, नम्रता या लज्जा भार के कारण। उसकी साड़ी नाभिदर्शना थी, तथा उसका हाथ बार-बार अपनी नाभि पर सरकता था।. उसके गाल तीव्र लज्जा के कारण लाल हो चुके थे। बिम्बाधर की कान्ति अरुणिमा पूर्ण थी। इसके अलावा वह कच्ची-कोरी भी थी।

नंगी फिल्मों की इस लाइन में उसे कितना रगड़ा जा सकता है इसकी पक्की परख करने अब सामने आ गए थे फिल्म प्रोड्यूसर चिम्मनभाई, डाइरेक्टर सुखभोग प्रसाद, और केमरामेन रतलाम अली। बेलारानी भोसले ने गंगाजल सी शुद्ध गंगा गुप्ता की हथेली अपनी हथेली में ली व उसे प्यार व मधुरता के साथ मंद गति से सेठ चिम्मनभाई क सामने ले गई। वहाँ उसने गंगा के सुकुमार अंगों का जायका उन्हें दिखाने के लिए गंगा के प्रति अंग पर हाथ दबा-दबा फेरा। प्रथम वक्षःस्थल पर जहां उसके पीन पयोधर उन्नत व नग्न थे; उन्हें अंगूठे से दबाया। फिर उसके मृदुल पेट पर हाथ दबा, पश्चात जांघों पर, फिर उसे घुमाया और उसके कसे हुए नितंब सेठ को दिखाए। बेलारनी ने गंगा के कान में कुछ कहा तो बेला ने मस्तक नीचा कर हामी भर ली। बेला गंगा से बोली : ये सब सज्जन तुम्हारे पिता तुली हैं व कला के पारखी, इनसे विशेष लज्जा अनावश्यक है। और फिर तुम्हें जरूरत के अनुसार नग्न या अति-नग्न भी तो होना है। इस पर गंगा मुस्कराइए व बोली, “जी, मैं अनुशासन का पालन करूंगी”।

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सेठ चिम्मन लाला ने बेला का इशारा पा सर्वप्रथम गंगा की नग्न नाभि में अंगुल गड़ाई व उसकी गहराई परखी, फिर उनका हाथ उसके पेट अर्थात उदर पर गया। अतिशय लोचदार था यह अंग। सेठ ने गंगा की कदली कलंदर जांघों को भरपूर टटोला, और फिर वे सहज ही गंगा के नितंबों का विस्तार नापने लगे। फिर सेठ बोले — “बेटी, तुझे थोड़ा सतना होगा हम से1” तात्पर्य समझ गई वह। तब आगे से चिम्मनभाई और पीछे से डाइरेक्टर सुखभोग प्रसाद गंगा के तन-बदन से सट गए, कस के। यह क्रिया पुनः दोहराई गई, इस बार सेठ गंगा के नितंबों से चिपक गए व सुखबोग प्रसाद इस बाला की जंघाओं व पेट से। इस अंग परीक्षण में सुकुमारी गंगा को अतिशय लज्जा का सामना करना पड़ा पर यह उसका धर्म भी था। और अभी तो ये शूरूआत थी। उसे अब यह भी बता दुया की बाजदफा, कहानी की जरूरत के अनुसार उसे अश्लील भी बोलना होगा। इस पर उसने गरदन नीची की व आँखें मिचमिचा कर धीमे स्वर में कहा– “जी, जी हाँ”।

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