पंजाब दियां रंगीन जट्टीयां – पार्ट – 5

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हेलो दोस्तो मे गौरव कुमार हाज़िर हू स्टोरी का अगला पार्ट लेकर। पिछ्ले पार्ट मे आपने पढ़ा के केसे भूरा सरबी के करीब आने के लिये सुखा से दोस्ती करता है। वही दुसरी तरफ रितु बातो बातो मे सरबी से सब कुच जान लेती है और उसे पराये मर्द के साथ सोने के लिये मना लेती है। तो चलिये स्टोरी को आगे बढ़ाते है।

सुबह जेसे ही सरबी उठी तो रितु केतली मे चाय लेकर कमरे मे बेठी थी। “अरे सरबी उठ गयी, फ्रेश हो आ फिर चैपी ले आके”। रितु सरबी को देखकर बोली।
सरबी बाथरूम जाकर फ्रेश होके आ गयी तो रितु ने उसे कप मे चाय देते हुए पुछा, “सरबी रात अच्छी गुजरी ना तंग तो नही हुई”। “हा रितु रात अची गुजरी, अच्छी नीन्द आयी”। सरबी ने बोल। “अच्छा, मेने सोचा शायद इसने तंग किया हो तुमे” रितु सरबी की चुत को छूकर बोली। “ये भला क्यो तंग करेगी मुझे” सरबी थोडा शर्माते हुए बोली। “अरे हम देर रात पराये मर्दो के बारे मे बात कर रहे थे तो मेने शायद ये मचलने ना लग गयी हो” रितु हस्ते हुये बोली।
“नही, अब तक तो नही मचली” सरबी बोली।
“हम्म मत्लब सम्भावना है के ये मचल सकती है तो क्यो ना इस्क मचलना बन्द किया जए” रितु ने सरबी को देख बोला। “वो केसे भला” सरबी भी रितु को अब थोडा बेशर्मी से जवाब देने लगी। “वो एसे सरबी जट्टी, जो ये मांगती है वो इसे दे दिया जाये” रितु ने सरबी को कहा। “और ये कया मांग रही है” सरबी ने रितु को मुस्कुराते हुये कहा। “ये मांग रही है एक लण्ड जो जट्टी की चुत को चीरता हुआ यहा तक आ जाये” रितु ने सरबी की नाभि पर हाथ रख कर बोला। “हाये इत्ना बड़ा भी होता है” सरबी ने हैरां होकर रितु को देखा। “अरे बिलकुल होता है, तुमने नही देखा कया” रितु ने सरबी को देखकर कहा।
“नही” सरबी ने जवाब दिया। दरसल सरबी ने कभी मर्द का लण्ड नही देखा था उसने तो बस अपने पति सुखा की छोटी बच्चो जेसी लुल्ली देखी थी तो उसे यकीं कर्ना मुस्किल था के इतना बड़ा लण्ड भी होता है।
“बोल ना सरबी लेगी कया इतना बड़ा, मजा आ जायेगा” रितु ने सरबी को बोला। “ले तो लुंगी रितु लेकिन मुझे डर लग रहा है किसी को पता चल गया तो” सरबी हिचकिचाते हुये बोली। “अरे किसी को पता नही चलेगा, बात हम दोनो के बीच रहेगी, तो अपने वाले से बात कर मे फिर तेरे बारे मे” रितु सरबी को देखते हुये बोली। “तेरे वाला कौन है बता तो सही मुझे जरा” सरबी ने रितु से पुछा। “हम्म बुझो तो जानू, तुम भी जानती हो वेसे उसे” रितु से सरबी की तरफ देखते हुये बोला। “लेकिन मे केसे जानती हू उसे, तुमने कभी मिल्वया तो है नही मुझे” सरबी हैरां थी थी वो रितु वाले मर्द को केसे जानती थी। “अरे मुझे मिल्वाने की कया जरूरत सरबी, तू खुद ही उस से मिलती है” रितु ने कहा। “अरे पहेलिया मत बुझा यार रितु साफ साफ बता ना कौन है वो” सरबी ने जोर देकर बोला। “अपने लाला जी सरबी तू मिलती तो है उनसे” रितु ने सरबी को देखकर जवाब दिया। सरबी हैरां होकर रह गयी के रितु बनवारी लाल से चुदवाती है।
“मतलब तू लाला जी के पास” सरबी बोली।
“हा सरबी, इत्ना बडा है लाला जी का, जब अन्दर जाता है तो बहुत मजा आता है यार” रितु सरबी को अपनी बाजू से नाप् कर बोली। “तुझे भी दिलाओ कया लाला का”। सरबी थोडी परेशान सी हो गयी। रितु ने सरबी की तरफ देखा और बोली, “कया सोच रही है, तुमे कोनसा उस से फ़्री मे चुदवाना है”।
“मतलब” सरबी ने रितु से पुछा। “मतलब ये सरबी जट्टी, देख तू लाला से चुदवयेगी, एक तो तुझे लण्ड का मजा मिलेगा और फर दुसरा यह के तुजे जब ब रुपयो की जरूरत होगी तो उनसे ले लेना और चाहे तो तेरा जो कर्ज वगेरा है ना वो भी साफ करवा लेंना, सोच ले सरबी घाटे का सौदा नही है यह” रितु सरबी को ललचाती हुई बोली। सरबी भी रितु की बात को सोचने लगी। “अरे बोल ना जल्दी इत्ना भी कया सोच रही है, मे भी तो एसे ही करती हू” रितु ने सरबी को देख कर बोला “और फर एसे लाला का लण्ड भी तो मिलेगा” रितू सरबी की चुत को छूकर बोला।
“हाये क्या कर रही है” सरबी रितु को मुस्कुराते हुए बोली। सरबी की मुस्कुराहट को देख रितू समझ गयी के सरबी की हा है। “तो फिर करू मे लाला जी को फ़ोन के जाती आयेगी आज दिन मे”। रितु बोली।
“नही दिन मे नही रितु रात को, सुखा को पता है के अज मुझे काम से छुट्टी है, रात को मे तेरे पास आ जाओगी और हम यहा से चली जायेगी”। सरबी मे रितु को देखकर बोला। “ठीक है मे रात का बोल दूंगी लाला जी को” रितु बोली। “अच्छा ठीक है तो मे चलती हू अब रितु” सरबी बोली और जाने लगी।
“ठीक है सरबी लेकिन रात को तैयार रहना आज लाले के लण्ड के लिये” रितु ने पीछे से सरबी को बोला।
“तू भी ना रितु, मे आ नओगी तेरे पास” सरबी बोली और हँसती हुई चली गयी।
सरबी के जाते ही रितु ने लाला बनवारी लाल को फोन लगाया, “ट्रिंग ट्रिंग”। “हेल्लो” बनवारी लाल ने फ़ोन उठाते हुए बोला। “राम राम सेठ जी” रितु ने जवाब दिया। “अरे जान केसी है तू, अज केसे याद कर लिया लाला को” लाला रितु की अवाज पहचान कर बोला। “अपको कुछ बताना था सेठ जी” रितु ने जवाब दिया। “कया बताना है जान, बोल तो सही” लाला ने जवाब दिया। “लाला जी आपकी मुर्गी फंस गयी” रितु हँसते हुए बोली। “मेरि कौनसी मुर्गी थी जान जो तेरे पास फंस गयी” लाला बोला।
“आपकी मुर्गी सेठ जी, सरबी जिसके आप सपने लेते है” रितु ने जवाब दिया। “हाये जट्टी, कया बोली जान, कब लेके आ रही है मेरे पास उसे” लाले ने लण्ड मस्ल्ते हुए बोला। “तैयार रेहना सेठ जी आज रात को ही लेके आ रही हू आपकी दुकान पर” रितु बोली। “हाय मेरि जान, कुरबान जाओ तेरे पर, ले आ फिर जट्टी को मेरि सेज पर” लाला बोला।
“ले आओगी सेठ जी आज, लेकिन अपना वादा मत भूलियेगा” रितु ने सेठ को उसका खातासाफ करने का वादा याद दिलाया। “अरे हा जान तू जट्टी को ले आ और तेरा खाता साफ” सेठ ने रितु से कहा।
“ठीक है सेठ जी रखती हू” इत्ना कहकर रीति ने फ़ोन रख दिया। लाला भी खुशी से फूला नही समा रहा था क्यो के जिस जट्टी के वो सपने लेता था वो आज उसके लण्ड के निचे आने वाली थी।
सरबी को घर के काम करते हुए पता ही नही चला के कब शाम हो गयी और सुखा घर आ गया। सरबी ने सुखे को पानी दिया, “खाना लगाऊ”। “नही सरबी मे रुक कर खओगा” सुखे ने जवाब दिया। “ठीक है तो फिर रसोई मे से ले लेना, मे आज भी रितु के य्हा जा रही हू” सरबी मे जवाब दिया। “ठीक है मे खा लुगा” सुखा बोला। सरबी रितु के गजर चली गयी, “रितु कहा है तू”। “अरे आ गयी सरबी” रितु कमरे से बहर आकर बोली। सामने लाल रन्ग का सूट पहने सरबी तैयार खडी थी। “पूरी तओयर होके आयी है आज तो,, चले” रितु मे सरबी को देखकर बोला। सरबी भी रितु की बातो से गरम थी और लण्ड लेने को मचल रही थी, ” हा चलो” सरबी ने जवाब दिया। रितु ने घर का दरवाजा लगाया और लाले की दुकान की तरफ चल दी।

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