पति – पत्नी और बाई : भाग-२

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हैलो फ्रेंड्स,
दीपा बेड पर लेटी हुई अपने पति से चुदाई का आनन्द ले रहीं थी तो मेरे गुदाज बुर में लंड तेजी से फिसल रहा था, रस झडने की वजह से चिकनाहट थी तो नमन चोदता हुआ मेरे ऊपर सवार हुआ और चोदता हुआ मेरे चेहरे को चूमने लगा तो मैं उसके पीठ पर हाथ फेरने लगी, तभी रुकसाना वाशरूम से बाहर आई और बेड पर बैठकर दोनों की चुदाई देखने लगी, मैं अब नमन के कमर पर हाथ रख चूतड़ उछालना शुरू की तो नमन चार पांच मिनट से चोद चोदकर थोड़ा सुस्त पड़ गया लेकिन मैं चूतड़ को उछाल उछालकर चुदाने में लीन हुई तो रुकसाना पूछी ” दीदी आप खाना खाई हैं या कुछ बना दूं
( नमन बोला ) ये कितना लंड खाकर आईं है साली चुदक्क़ड को सिर्फ लंड चाहिए क्यों बेबी
( मैं चूतड़ स्थिर की ) हां जनाब आखिर काम की पुजारन हो हूं, काम की ज्वाला में जलते रहती हूं और अब तो आप भी कभी कभार ही मेरे साथ सेक्स करते हो
( नमन मेरे ओंठ चूमने लगा ) तो कितनों का लौड़ा हजम करोगी, मैं तुम्हे सात साल से चोद रहा हूं और अब थोड़ा स्वाद बदलने के लिए ऐसा करती हो कोई आश्चर्य नहीं ” फिर नमन मेरी बुर से लंड निकाल बगल में लेट गया तो उसका लौड़ा खंभा की तरह खड़ा था और मैं रुकसाना को देख इशारे में उसके लंड पर बैठकर चुदाने को बोली, रुकसाना अपने ब्रा और पैंटी पहन रखी थी, वो अब नमन के लंड को पकड़ सहलाने लगी फिर खुद ही अपने ब्रा और पेंटी को उतार नंगी हो गई। मेरे सामने ही नमन के लंड के ठीक ऊपर चूत किए बैठी तो जांघे फैली हुई और मैं देख रही थी कि वो लंड पकड़ अपने बुर में घुसाने को कोशिश कर रही है, उसके करीब खिसकी फिर नमन का लंड पकड़ रुकसाना की चूत पर सुपाड़ा रगड़ने लगी तो सुपाड़ा अंदर घुसते ही रुकसाना अपने गोल गद्देदार चूतड़ को लंड पर धंसाने लगी लेकिन अभी भी मैं पति का लंड पकड़ रखी थी, आधा लंड घुसते ही नमन ने रुकसाना के कमर को पकड़ा फिर नीचे से ही लौड़ा का तेज धक्का दे मारा और रुकसाना खुशी में झूम उठी ” साहब आपके लंड को पाकर धन्य हो उठी, साला ब्योड़ा तीन चार मिनट तक लंड पेल कर टिकता है और बुर में रस चुवाकर सुस्त पड़ जाता है
( नमन चोदता हुआ मस्त था ) चिंता मत करो रुकसाना, तुम्हें बीच बीच में लंड मिलता रहेगा ” तो रुकसाना अपने चूतड़ को उछाल उछालकर चुदाने में लीन थी तो मैं अब नमन के चेहरे के उपर जांघें फैलाए बैठी, पति तो मेरे फैले बुर को चूमना शुरु कर दिया तो उसके हाथ का स्पर्श मेरी चूतड पर था, अब मैं उंगली से बुर को फैलाई तो नमन उसमें पूरा जीभ घुसाए चाटने लगा और आज मैं तो शाम के चार बजे से अभी तक सेक्स में ही लिफ्त थी। दीपा की बुर में पति का जीभ था तो अब रुकसाना चूतड़ को इस कदर लंड पर घुमाए जा रहीं थीं मानो ओखली में मूसल लिए हो तो मेरे बूब्स पकड़े नमन दबा रहा था और अब चूत को उनके लंड की जरूरत थी ” उह ओह प्लीज चोद ना मुझे ” फिर मैं नमन के चेहरे के उपर से उतर गई तो रुकसाना पति के लंड को निकाल बगल में बैठी और नमन उठकर वाशरूम चला गया तो मैं बेड पर लेट रुकसाना से पूछी ” क्या और चुदवाने का मन है
( वो बोली ) मैडम बस रस झड़ जाए फिर आप साहेब के साथ पूरी रात मजे कीजिए ” मैं नमन से चुदवाने को बेकरार थी कि रुकसाना उसके आते ही उससे लिपटकर उसके चेहरे को चूमने लगी और नमन अपने गोद में उसे बिठाया फिर रुकसाना खुद चूतड़ को लंड के उपर किए बैठी तो लंड रुकसाना की चूत में था और वो मेरे पति के कंधे पर हाथ रख चूतड़ को उछालने लगी साथ ही नमन उसे चोद रहा था तो मैं अब रुकसाना के बड़े बड़े बूब्स उसकी छाती से चिपकी देख रही थी और मुझे तो लग रहा था कि मैं किसी और के सामने जाकर लेट जाऊं और चुदवा लूं तो रुकसाना नमन से लिपटकर मस्त थी ” उह ओह और तेज बस अब मेरा झडने पर है फिर आप दोनों मजे लीजिएगा ” तो मैं उठकर बैठी, पल भर बाद रुकसाना की बुर से रस की धार निकल पड़ी तो वो उतरकर लेट गई और मैं अपने पति के लंड देख अब चुदाने को सोचने लगी। नमन का लंड बुर के रस से गीला हो चुका था तो मैं पास पड़े टॉवेल से लंड को साफ की फिर नमन के गोद में टांगे फैलाकर बैठी, चूतड़ को थोड़ा ऊपर कर रखी थी तो मेरे चूत से उसका लौड़ा टकरा रहा था जिसे मै अपने हाथ से पकड़कर बुर में घुसाई तो सुपाड़ा सहित १/३ लंड अंदर था और मैं अपने गोल गुंबदाकार चूतड को नीचे करने लगी, उसके भार से लंड अंदर घुसने लगा तो मैं अब बुर की खुजली मिटाने को बेकरार थी, थोड़ा लंड चूत के बाहर था कि नमन मेरे कमर और पीठ पर हाथ रख नीचे से चोदा और उसका लौड़ा मेरी बुर के अंदर जाकर चुदाई करने लगा, अब मैं खुद उससे लिपटकर चूतड़ उछाल उछालकर चुदाने लगी तो मेरे दोनों मुलायम बूब्स उसकी छाती से रगड़ खा रहे थे और रुकसाना बेड पर से उठकर चली गई तो मैं नमन के ओंठ पर जीभ फेरने लगी, उसे चाट रही थी कि वो मुंह खोलकर मेरे जीभ को अंदर लिया फिर लंड चूत में डाले जीभ चूसने लगा, मुझे भी मज़ा आ रहा था कि मैं खुद ही चूतड़ को धीरे धीरे ऊपर नीचे करने लगी, संभोग सुख का आनन्द दोनों के काम क्रिया पर है तो नमन मेरे जीभ मुंह से निकालकर अब चोदने लगा तो दीपा चुदाते हुए मस्त थी। अभी रात के ११:२५ बजे थे तो उनके लंड से बुर को मजा मिल रहा था लेकिन मुझे मालूम था कि ये जल्दी ही झड़ जाएंगे तो मैं अब चूतड़ उछाल उछालकर चुदाने लगी और साथ में सिसक भी रही थी ” उह ओह आह आज कि तीसरी चुदाई डियर प्लीज अब रस गिरा दो
( वो तेजी से चोदने लगा ) साली रण्डी तू सबसे चुदाते रह और मैं क्या मुठ मारूं
( मैं उसके चेहरे को चूम ली ) आपके लिए तो लौंडिया की लाइन लगा दू बस आप हुक्म तो कीजिए ” और मेरी बुर का हाल खराब था तो किसी भी पल बुर रस छोड़ सकती थी, तभी नमन चीनख उठे ” उई मेरा झड़ा
( मैं जोर जोर से चूतड़ उछालते हुए बोली ) आह मेरा भी निकलेगा ” फिर उनके लंड से वीर्य स्खलित होने लगा तो मेरी चूत भी रस छोड़ दी और दोनों के बीच सहवास का अंत हुआ।

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