पैतृक गांव में मस्ती : भाग-७

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हैलो फ्रेंड्स,
दीपा अपने चचेरे भाई विनय के साथ गन्ने कि खेत में ओरल सेक्स का आनंद ले रही थी तो उसके कमर पकड़ लंड चूसते हुए मुझे एहसास हो रहा था कि मेरे मुंह में उसका लौड़ा टाईट हो रहा है और खेत खलिहान घूमने के बहाने अगर चुदाई हो जाए तो क्या प्रॉब्लम, वैसे भी प्राकृतिक छटे का आनंद लेते हुए सेक्स करना सबको अच्छा ही लगता है तो मैं साड़ी और पेटीकोट साथ ही ब्लाऊज, ब्रा और पेंटी पहनी हुई थी सिर्फ इसलिए की इस ड्रेस में बिना कपड़ा उतारे भी चुदाई संभव है, विनय का लौड़ा चूसते हुए मेरे मुंह से लार टपक रहा था तो मैं लंड छोड़कर उठ खड़ी हुई और वो मेरे साड़ी के पल्लू को सीने से नीचे करके चूचियों को पकड़ दबाने लगा और मेरा हाथ विनय के लौड़ा पर था जिसे हिलाते हुए उसके चेहरे को चूम रही थी ” यार जगह तो मस्त है सिर्फ एक चादर की जरूरत है
( विनय मेरे गरदन चूमते हुए ब्लाऊज़ की डोरी को खोल दिया ) बेबी, साड़ी में धूल लग जाएगी यहीं ना
( मेरे ब्लाऊज़ निकाल वो अब मेरे पीछे खड़ा हुआ और गरदन से लेकर पीठ चूमने लगा तो मेरे दोनों बूब्स वो पकड़ दबाने लगा ) यहां नंगा मत करना डियर, कोई देख लिया तो क्या समझेगा
( विनय ब्रा की हूक खोल मेरे छाती को नंगा कर अब पीठ चूमते हुए बूब्स पकड़ दबाने लगा ) ओह सेक्सी मुझे क्या तुम्हे भी कोई प्रॉब्लम नहीं होगी बस उसे भी अपनी चूत दे देना ” और मैं अब कामुकता के गिरफ्त में आ चुकी थी तो पीछे मुड़कर उससे लिपट गई और वो मेरे कमर पर हाथ रख साड़ी खोलने लगा, मैं झट से उसका हाथ पकड़ ली फिर बोली ” देखो डियर ऊपरी हिस्सा नंगा कर दिए कोई बात नहीं लेकिन नीचे रहने दो, क्यों ” तो विनय बिना कुछ बोले मेरे स्तन को पकड़ चूमने लगा तो अब मेरे पैर में थरथरी होने लगी और उसके बाल पकड़ मैं सिसकने लगी ” उह ओह अब मुझे बैठने दो फिर तेरी मां बनकर तुझे दूध पिलाऊंगी ” और फिर खेत में ही बैठ गई तो विनय मेरे बगल में बैठकर चूची को मुंह में लिए चूसने लगा तो उसका हाथ मेरे बाईं चूची को पकड़ कर मसल रहा था, दीपा उसके गाल सहलाने लगी ” बेटा तुझे दूध पिलाने में मुझे दिक्कत हो रही है जरा चूची छोड़ना ” और अब मैं अपनी साड़ी और पेटीकोट को कमर तक किए कमर में ही खोंस ली तो पेंटी बुर रक्षक बना हुआ था, अब उसके सामने घुटनों के बल हुई तो वो मुझे गोद में लिया और इस आसन में तो चूची चूसाई क्या चुदाई भी हो सकती थी। विनय मेरे बूब्स पकड़ थोड़ा चेहरा झुकाया फिर चूची को मुंह में लिए चूसने लगा तो मैं उसके पीठ सहलाने लगी, मेरी बड़ी बूब्स जिसपर ३६ डी साईज की ब्रा लगती है को पूरी तरह से मुंह में लेना संभव नहीं फिर भी विनय मजे लेते हुए चूची चूसने लगा तो उसके हाथ मेरे चूतड़ के नीचे यानी बुर क्षेत्र में था और मैं अब सिसकते हुए ” उह उई बुर में खुजली हो रही है ” अपने पेंटी की हूक खोल दी, मेरे नग्न चूची तो कमर से लिपटा साड़ी और पेटीकोट देख कोई भी बोल सकता था कि दोनों सेक्स की दुनिया में खो चुके हैं और मैं उसके सर पर हाथ फेरने लगी तो उसका लौड़ा मेरे पेंटी यानी चूत पर ठोकर मार रहा था, अब विनय चूची मुंह से निकाला तो उसका तमतमाया चेहरा देखने लायक था फिर मेरे गांड़ सहलाते हुए पीछे की ओर से ही बुर में उंगली घुसाया और धीरे धीरे रगड़ने लगा तो मैं खुद ही अपनी बाई चूची पकड़ विनय के मुंह में ठूंस दी ” ले पी बेटा तू सही में मादरचोद है ” वो चूची चूसता हुआ बुर में उंगली करने लगा और इतने में मेरी बुर से रस स्खलित होने लगी तो विनय उंगली बुर से निकाला ” तेरे मुंह पर बैठकर ही मुतूंगी
( वो बुर से उंगली निकाल रस को जीभ से चाट लिया ) जो मर्जी बेबी ” फिर दोनों खेत में ही थे तो मैं अपने गोरे गांड़ के नीचे अपने खोली हुई सैंडल रख बैठी थी और मुझे यहां गर्मी भी लग रही थी तो मैं अब विनय से पूछी ” यार क्या इस खेत में ही सब कुछ सही रहेगा
( वो बोला ) तो फिर चलो स्टेट बोरिंग वहां एक बेड भी है ” और फिर मैं ब्रा, ब्लाऊज़ पहन ली तो साड़ी और पेटीकोट ठीक की तो विनय पैजामा पहन लिया, फिर दोनों खेत से निकले और दोनों खेत की मेढ़ पर ही चलते हुए स्टेट बोरिंग तक पहुंचे जोकि चौड़ी कच्ची सड़क के किनारे थी। विनय अपने पॉकेट से चाभी निकाल उसका रूम खोला फिर दोनों अंदर घुसे तो वो अंदर से ही बाहर दरवाजा में ताला लगाकर मुझे अपनी बांहों में ले लिया और अब मैं उससे दूर हुए अपने साड़ी को निकाल फेंकी तो देखी की एक लकड़ी की बेड साथ ही उसपर एक गड्ढा और तकिया भी है तो उसे बेड की ओर धकेल मैं खड़े खड़े हंसने लगी, विनय झट से अपना कुर्ता और पैजामा खोला फिर मुझे देख बोला ” जरा पीछे तो मुडो
( मैं पीछे मुड़कर अपना हाथ पीठ पर रख ब्लाऊज़ की डोरी खोल ब्रा भी उतार फैंकी ) और क्या चाहिए डियर ” मैं खड़ी थी तो विनय पीछे से आकर मुझे दबोच लिया फिर मेरे स्तन पकड़ वो दबाने लगा तो मेरे चूतड़ से उसका लौड़ा गड़ रहा था, वो मेरे गरदन पर चुम्बन देते हुए ज्योंहि पेटीकोट के नाड़े पर हाथ लगाया, मैं उसके हाथ पकड़ रोकी लेकिन मेरे हाथ झटक कर विनय ने मेरे पेटीकोट को खोल नंगा कर दिया। दीपा अब उसकी ओर हो गई तो वो भी नंगा था और विनय मेरे जांघ को पकड़ एक पैर बेड के किनारे पर रखा फिर घुटनों के बल मेरे सामने बैठा तो मेरी चिकनी चूत पर उसकी ओंठ चुम्बन दे रही थी साथ ही मेरे गोल गद्देदार गांड़ पर हाथ फेरने लगा और मैं खुद से उंगलियों की मदद से बुर फैलाई तो विनय की जीभ मेरे चूत को चाटने लगी और दोनों मजे ले रहे थे। to be continued.

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