प्यासी औरत और पड़ोस का लड़का

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फ्रेंड्स
दीपा मल्होत्रा अंबाला छावनी से दानापुर आ गई तो नए जगह होने के कारण अभी तो किसी से मेरी परिचय नही थी, वैसे छावनी में तो सारे परिवार आर्मी के ही थे, मैं मायके से वापस आई तब तक सारे सामान को मेरे पति ने अरेंज करवा दिया था और दीपा को अब तो ढाई साल के बेटे को संभालना होता था, विवेक तो सुबह से शाम तक ऑफिस में होते थे तो एक कामवाली बाई घर के लिए रख लिए थे, फ्लैट फर्स्ट फ्लोर पर था और ठीक सामने के फ्लैट में मेजर राघव देसाई रह रहे थे और मेरी मुलाकात उनकी बीबी से हुई जोकि मुझे हर तरह से सहयोग करने को तैयार थी लेकिन उनकी बीबी सुलोचना जी की उम्र ४०-४२ वर्ष की थी और उनका बेटा रितेश उनके साथ रहता था जिससे मेरी मुलाकात पहले दिन ही हो चुकी थी साथ ही उसने अपना मोबाइल नंबर भी दे दिया था ” दीदी आप यहां नई हो यदि किसी तरह की जरूरत हो तो मुझे कॉल कर दीजियेगा
( मैं तो दीदी शब्द सुनकर ही हतप्रभ रह गई थी लेकिन दीदी को बीबी बनाने में बहुत वक्त लोगों को नही लगता ) हां भाई तुम मुझे एक बार यहां का शॉपिंग सेंटर, मेडिसिन शॉप सब दिखा दोगे तो फिर तुम्हें परेशान नही करूंगी ” उस दिन उसके शब्द ” दीदी ” सुनकर समझ चुकी थी की रितेश काफी अनुशासित लड़का है, उम्र २० वर्ष तो कद ६ फिट के आसपास साथ ही गोरा रंग तो शरीर बिलकुल स्लिम और मेरी नजर उस पर टिक चुकी थी जबकि दीपा २६ साल की शादीशुदा महिला जिसको दो साल का एक बेटा है, लंबाई ५’६ इंच तो फिगर ३४-२६-३६ थी, गोल गुंबदाकार चूतड तो गोरा बदन लेकिन पिछले पांच साल में दो दर्जन मर्द /लड़कों के साथ सेक्स कर चुकी थी। दानापुर मायके से पहुंची तो पहली रात मेरे पति विवेक ने मुझे रात भर प्यार दिया फिर अगले दिन छुट्टी के कारण मुझे पटना शहर ले गया जहां हमलोग कुछ जगह घूमे फिरे और अगले दिन मैं घर में ही थी, सामने के फ्लैट की बालकनी मेरे बालकनी के समानांतर थी तो मैं अपने बेटे ऋषि के सोते ही बालकनी में जाकर बैठ जाती थी और उस दिन मैं कुर्सी पर बैठी हुई थी तो कामवाली बाई घर में साफ सफाई कर रही थी, मेरी नजर उस बालकनी की ओर गई तो रितेश कुर्सी पर बैठकर मोबाइल में कुछ देख रहा था, अब मुझे कुछ बदमाशी सूझी तो मैं अपने कमरे में जाकर उसको कॉल की, वो हड़बड़ा कर कॉल रिसीव किया ” हां दीदी बोलिए क्या बात है
( मैं जानबूझकर दर्द में कराहते हुए बोली ) रितेश तुम क्या फुर्सत में हो
( वो ) हां दीदी बोलिए तो क्या हुआ आपकी आवाज में दर्द है
( मैं ) हां भाई, अभी स्नान करने गई थी तो बाथरूम में फिसल गई और कमर से पैर तक चोट आई है, प्लीज कोई दवाई ला दो
( वो ) आप अपने पति को कॉल की
( मैं ) हां उनका नंबर नॉट रिचेबल है
( वो ) ठीक है मैं तुरंत मेडिकल स्टोर जाकर आपके लिए दवाई ले आता हूं ” मेरे जाल में वो फंस चुका था, अब देखूंगी की दीदी केसे उसकी बीबी बनती है और फिर मैं डाइनिंग हॉल आई तो कामवाली बाई बोली ” ठीक है दीदी, मेरा काम हो गया अब शाम को आती हूं ” फिर वो चली गई तो मैं अपने सलवार सूट को उतारकर पीले रंग की साड़ी, बेकलेश ब्लाउज साथ ही पेटीकोट और ब्रा तथा पेंटी पहनकर तैयार हो गई और अपने बाल को संवारकर डाइनिंग हॉल से उठी फिर दरवाजा खुला ही छोड़ दी, अब अपने बेडरूम में जाकर लेटी तो रितेश के आने का इंतजार कर रही थी, साले से पैर और कमर तक की मालिश कराऊंगी फिर वो खुद ही मेरे जिस्म का छुवन पाते ही कामुक हो उठेगा। दीपा मर्द हो या लड़के को अपने जाल में फांसना जानती थी, मेनका और उर्वशी जैसी औरतें मेरे सामने टिक नही सकती यदि साधु संत का ध्यान या तपस्या तोड़ना हो और मोबाइल लेकर देखी तो १२ – १४ मिनट पहले उससे बात की थी, कुछ देर बाद मेरे मोबाइल पर कॉल आया तो मैं कॉल रिसीव की ” हां रितेश दवाई लेकर कब तक आओगे
( वो बोला ) आपके फ्लैट के दरवाजे के बाहर खड़ा हूं
( मैं ) दरवाजा खुला हुआ है, अंदर आकर बंद कर देना और मैं बेडरूम में हूं ” फिर वो अंदर आया तो मैं अपने घुटनो तक पहले से ही साड़ी उठाए उसको पकड़ दर्द से कराहने लगी और रितेश अंदर आया तो मैं बोली ” एक बोतल पानी लाकर देना ताकि दवाई खा लूं ” वो दवाई बेड पर रखकर डाइनिंग हॉल की ओर गया फिर एक ग्लास पानी लाकर दिया तो मैं जानबूझकर किसी तरह उठकर बैठी फिर उससे ग्लास लेकर बोली ” डाइनिंग हॉल में रैक में एक तेल की बोतल है ले आना ” वो चला गया तो मैं दवाई के पत्ते से एक एक दवाई निकालकर बेड के गद्दे के नीचे रख दी साथ ही पानी पी ली तो वो तेल की बोतल लेकर आया और मैं करवट लेटकर अपने साड़ी सहित पेटीकोट को घुटनों से काफी ऊपर उठा दी ताकि मेरे मोटे चिकने जांघो को देख मेरी ओर आकर्षित हो सके, वो मेरे पैर के पास बैठा ” दीदी आपको तो मालिश कामवाली बाई से करवा लेना था
( मैं चेहरा उसकी ओर की ) क्या रितेश दर्द से मरी जा रही हूं और तुम मालिश करने की जगह बहस कर रहे हो ” ये कहते हुए साड़ी सहित पेटीकोट को नीचे की और बोली ” ठीक है तुम जाओ शाम को कामवाली आएगी तो मालिश करवा लूंगी ” वो खड़ा हुआ फिर बोला ” सॉरी दीदी मालिश अभी कर ही देता हूं आपको दर्द हो रहा है ” और वो बैठा तो मैं साड़ी सहित पेटीकोट को इस बार और ऊपर उठा दी, यकीनन चूतड के कुछ हिस्से से लेकर चूत उसको दिख रही थी और अब वो हथेली में तेल लिए मेरे जांघो से लेकर पैर तक लगाया फिर हल्के हाथों से मालिश करने लगा, साला कितना भी बड़ा साधु होगा उसकी लन्ड को तो तड़पा ही दूंगी ” , रितेश का हाथ मेरे पैर से जांघो तक को सहला रहा था तो मैं अपने कमर पर हाथ रख साड़ी को थोडा और ऊपर कर ली, भले ही करवट लिए बिस्तर पर लेटी हुई थी फिर भी मेरे सेक्सी चूतड का सामना वो कर रहा था और मेरी जांघो तक तेल की मालिश करते हुए पूछा ” दीदी लेकिन आपको सही में दर्द कहां पर है
( मैं चित होकर साड़ी को वैसे ही रहने दी ) दर्द मेरे पैर से कमर तक है, चाहे आगे हो या पीछे चाहे बीच में ” और रितेश का चेहरा तो लाल हो चुका था, मुझे ध्यान भी नही रहा की साड़ी कमर से ऊपर है और मेरा गुप्तांग वो देख रहा है। मैं उसकी ओर देखकर बोली ” शरमाओ नही दीदी का दर्द दूर कर दो ” वो कुछ नहीं बोला बल्कि मेरे मोटे जांघो से लेकर पैर तक तेल चुवाया फिर हाथों से मालिश करने लगा तो मैं अब जानबूझकर अपने दोनो जांघो को फैलाई तभी रितेश चेहरा फेरता हुआ बोला ” दीदी आप गलत कर रही हैं प्लीज साड़ी नीचे कर लीजिए
( मैं साड़ी को थोडा नीचे की ) अरे बुद्धू तुम मुझे दीदी कहते हो और चोट के जगह पर मालिश भी नहीं कर रहे हो, तो तुम घर जाओ ” रितेश उठा और अपना जींस उतारकर खूंटी में टांग दिया फिर शर्ट भी खोल दिया, साले की चौड़ी छाती और तंदरुस्त शरीर देख मन तड़प उठा तो मैं पूछी ” रितेश तुम अपना कपड़ा क्यों खोल रहे हो
( वो अपने चढ्ढी पर हाथ फेरने लगा ) दर्द के लिए इंजेक्शन देना होगा मैडम समझी तो उस इंजेक्शन को बाहर करने के लिए तो जींस खोलना ही होगा ” मैं मुस्कुराई और वो मुझे देखता हुआ बेड पर आया फिर मेरे बूब्स पर हाथ रख ब्लाउज पर से ही दबाना शुरू किया तो मैं उसका हाथ पकड़ ली ” रितेश इधर दर्द नही है
( वो मेरे साड़ी के पल्लू को नीचे कर गाल चूम लिया ) तू कब और कहां फिसल चुकी है मुझे पता है दीपा बहना, दर्द तुझे जिधर है दूर कर दूंगा ” और वो मेरे ऊपर सवार हुए मेरे गाल को चूमने लगा तो मैं उसको अपने ऊपर से हटाने लगी, दिखावटी गुस्सा करते हुए बोली ” रितेश तुम तो मुझे गलत समझ बैठे, मुझे कमर से पैर तक दर्द है छोड़ो नही तो चिंखूंगी
( वो मेरे ऊपर से हटा और साड़ी की गांठ को कमर से खोलकर नीचे सरका दिया ) तो भी कुछ नही होगा बहना अब तो इंजेक्शन लगाकर ही मानूंगा ” और मैं ब्लाउज सहित पेटीकोट में सेक्सी लग रही थी लेकिन सेक्स में आनंद बढ़ाने के लिए नखड़ा भी करने लगी, वो मेरे बगल में बैठा था तो मैं बेड पर से उठी और तेजी से अपने रूम से बाहर भागी तो पीछे से रितेश भी मुझे पकड़ने के लिए दौड़ा और मैं दूसरे कमरे में घुसकर दरवाजा बंद करना चाही तो रितेश धक्का देता हुआ दरवाजा खोला, मैं बेड पर चली गई तो वो भी आकर मुझे पकड़ लिया। दीपा को अपने बाहों में लिए चूमने लगा तो मैं भी उसके चेहरे को चूमने लगी, दोनो बेड के बीचों बीच बैठे थे और वो तो मुझसे पांच छह साल छोटा था, उसको बेड पर धकेल उसके ऊपर सवार हुई फिर उसके चेहरे को चूमने लगी और वो मेरे गोल गद्देदार चूतड पर हाथ फेर रहा था, उसके ओंठ चूमकर बोली ” समझे बहना के भाई आज करना मेरे… की सगाई ” फिर तो दोनो एक दूसरे को चूमने में लग गए…. to be continued.

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