प्रीति – Dirty Sex Tales

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मै विश्वनाथ धनबाद के एक सरकारी दफ्तर में काम करता हूं। मेरे साथी अशोक जो उम्र में मुझसे 14 वर्ष छोटा है, मेरे ही साथ हर वक्त रहता है और हम ऑफिस के सारे काम इकठ्ठे निबटा लेते हैं। चूंकि मैं अशोक से उम्र में बड़ा हूं, तो दोस्त के साथ भाई का भी कमी पुरा कर लेता हूं। मेरा उम्र करीब 48 वर्ष है और एथलीट फिगर के साथ पूरा फिट हूं, तो लोग मुझे काफी पसंद करते हैं। अशोक के फैमिली में वो मिया बीवी और एक बच्ची है। बच्ची सात साल की है, और वो दूसरी बच्चे के लिए पिछले तीन चार साल से कौशिश कर रहे हैं। अशोक की बीवी प्रीति का उम्र कोई 26 वर्ष होगा और वो बहुत ही सुन्दर दिखती है। उसे कोई स्कूल कॉलेज की लड़की नज़र आती है और कोई भी नहीं कह सकता कि वो सात साल के बच्ची की मा है। हम दोनों का परिवार खूब घुल मिल गए हैं और जब भी मी मिलते हैं, तो गर्मजोशी से मिलते हैं।
सब ठीक चल रहा था तो पिछले शुक्रवार अशोक के पिताजी का तबियत अचानक खराब हो गया। अशोक जाने वाला था तो बेटी ने जाने की जिद की। घर में सब बिखरा पड़ा था सो प्रीति जा नहीं पाई। अशोक ने फोन कर कहा, भैया मुझे निकालना पड़ रहा है, प्रीति को छोड़कर जा रहा हूं, ख्याल रखना थोड़ा। मै शाम को खबर लेने चला गया तो प्रीति तुलसी जी को दिया दिखा रहा थी। थोड़ी देर बैठने के बाद नज़दीक की किराना दुकान से कुछ सामान मंगवाई। ले आया तो देखा उसने नाइटी बदलकर लोंग स्कर्ट और टॉप पहन ली थी। बोली बैठिए, ठंडा पीकर जाइए। मै बैठ गया।
प्रीति स्प्राइट ले आई ग्लास में भरकर और देने लगी तो मेरा हाथ पकड़ ली। उसे पहले भी कई बार छुआ हूं, पर आज का स्पर्श कुछ अलग था। मैंने पूछा, क्या हुआ? कोई तकलीफ़? कोई डर? उसने मुझे देखती रही। उसने उल्टे पूछी की क्या आज कुछ अलग लग नहीं रहा? सच कहूं तो मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। कभी मजाक तो कभी परीक्षा लग रहा था। एक अजीब सा माहौल बन चुका था जहां केवल घड़ी के टिक टिक तो सुनाई दे रहा था पर समय रुक गया था। चुप्पी तोड़ते हुए उसने फिर कहा कि आप जो सोच रहें, मै वहीं बोल रही हूं। बहुत साहस और बेशरम जैसे कुछ मांग दी आप से, अब आप मुझे ठुकरा नहीं सकते वरना मै कहीं का नहीं रहूंगी। में एक सांस से पुरा पी गया और उठ खड़ा हुआ। ऐसा कुछ तो सपने में भी नहीं सोच सकता। प्रीति कुछ बोली नहीं और दो कदम बढ़कर मुझे बाहों में ले ली। मै 6 फिट का हूं, और वो 5-2की होगी। मै समझ गया कि वो छोड़ने के लिए नहीं पकड़ी, तो मैं हल्के हल्के से उसके पीठ पर हाथ फेरता चला गया। उसके नरम पीठ, उसके ब्रा का स्ट्रैप, हुक सब छु रहा था। अब उसके भी हाथ मेरे पीठ पर चल रहा था। उसने चेहरा उठाई तो मै उसके बालों को पकड़ का एक गहरा चुम्मा उखे कपाल, फिर आंख फिर होंठ पर सजा दिया। होठों पर चुम्मा जैसे खत्म नहीं हो रहा था और प्रीति बड़ी प्यार से आगे बढ़ रही थी। में अब उसके पीछे जाकर कमर पर हाथ रखा और का गर्दन गले पर किस करते हुए हथेली तक आ गया। अब मेरे हाथ उसके कमर से हटकर पर से होते हुए उसके नरम गोल मम्मे तक पहुंच गया। अब मैं कभी धीरे कभी जोर से दबा रहा था। अपने कमर से उसके गान्ड का गोलाई अंदाज लगा रहा था। अब मैं धीरे धीरे टॉप को ऊपर उठाने लगा तो प्रीति बेडरूम जाना चाहा। मैं पीली टॉप उठाया तो जालीदार काली ब्रा मिली। ब्रा के बीच के खाई बहुत सुंदर है और जली के अंदर के नज़ारा का क्या कहना! मैं ऊपर से ही चुम्मा लेने लगा। अब प्रीति मेरे शर्ट का सारा बटन खोल चुकी थी, बेल्ट और चैन बटन भी पैंट का खोल दी थी। मै अब धीरे धीरे उसकी स्कर्ट को भी उतार दिया। हल्की नीली पैन्टी पहनी हुई है वो। मै भी अपना बनियान पैंट सब उतार दिया। अब आराम से प्रीति को प्यार देता चला गया। धीरे से अब उसके ब्रा फिर पैन्टी को नीचे सरका दिया। ओह क्या कमसिन बच्ची लग रही थी। कहीं एक बाल नहीं पूरे शरीर में, जैसे मेरे लिए साफ कर रखी हुई है।
गुलाबी निप्पल दबे दबे हुए हैं, चिकनी बुर हल्का सा फुली हुई। मैंने मम्मो को धीरे धीरे चाटना, फिर चूसना सुरु कर दिया। निप्पल बाहर आ गए। अब चुम्मा देते हुए नाभी फिर एकाएक बुर को चाटना सुरु कर दिया। वो अच्छा महसूस कर रही थी और कभी मेरे पीठ कभी सर पर हाथ फेर रही थी। अब उसने उठकर मेरे चड्डी भी उतार दी। कही ओह मेरे राजकुमार, कब से तुम्हे देखना चाहती थी! फिर चूमना, चाटना और जोर जोर चूसना शुरू कर दी। मेरा लन्ड तो कड़क लोहा बन गया। लंद के चमड़ी को तो कुछ सोचती ही नहीं, ईधर मेरे जान निकाल जाए। और चूसना! कहीं भी माल जमा हो लंद के मुंह पर आ जाए। अशोक का क्या हाल करती होगी ये! चूसते चूसते उसने मेरे माल निकाल दी फिर पुरा ही घटक गई, उफ़ क्या अनुभव रहा मेरा! अब उसने चूसकर फिर से मेरा लन्ड को खड़ा कर दी, बोली अब चोदिये देर तक, जबरदस्त। आसानी से झड़ेंगे नहीं। उसके बात सुनकर में आश्चर्य में पड़ जा रहा हूं। पूछा, प्रीति किस आसान में लोगी? बोली मिस्नारी में पहले चोदिए। फिर देखा जाएगा। देखा इसके मुड ही आज अलग है, सो मै एक तकिया उसके गान्ड के नीचे लगाया। पूछा सरसों का तेल दो। वो पूछी तेल क्यों चाहिए? में बोला जोरदार चुदाई में लगता है। अब किचेन से तेल लगाकर प्रीति की बुर में सेट किया। उसके दोनों घुटने को मम्मे से सटाया। अब तेल वाला लन्ड को प्रीति के टाईट बुरा के छेद में डालने लगा। गर्म बुर को फाड़ता हुआ लंद अंदर जा रहा था। अब जोरदार धक्के पे धक्का मारने लगा और प्रीति अनचुदी लड़की के जैसा हम्म हाम्म कर चुदाई का मज़ा लेने लगी। आधा घंटा करीब चोदने के बाद फिर से तेल लगाया लंद पर फिर पीछे से प्रीति के बुर में सटाया। उसके गान्ड के छोटा छेद देखकर मेरा शयतान जग गया और कुछ सोचने से पहले ही प्रीति के गान्ड में मेरा लन्ड का सुपाड़ा गायब हो गया। प्रीति चिल्लाई उई… पर तब तक काम हो गया था और मैंने जबरदस्त दो झटके में किला पर कर गया। फिर पहले धीरे धीरे और बाद में जोरदार झटके के साथ प्रीति का गान्ड मार दिया। उलट पलटकर जैसे मर्ज़ी करीब दो घंटे प्रीति को चोदकर उसके बुर में गरम माल छोड़ दिया। अब इंतजार है अगले महीने एक खुशखबरी मिलने का। बहुत ही जबरदस्त चोदा हूं, मुझे बधाई देना आपलोग।

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