मेरी मां का आशिक : भाग-३

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दोस्तों,
जिया मात्र १३-१४ साल की उम्र में ही अपनी मां को किसी लड़के के बाहों में देख ली तो मेरी नजर में वो चरित्रहीन महिला हो गई लेकिन मुझे ये सोचकर भी दुख होता था कि आखिर मां किसी जवान लड़के के साथ क्यों हमबिस्तर हुई, पता नहीं प्रीतम जैसे कितने लड़के मेरी मां को चोदे होंगे लेकिन मैं चाहकर भी ना तो डैड को बोल सकती थी और ना उनसे पूछ सकती थी। मैं उस वक़्त आठवें क्लास में थी और छह महीने पहले से ही मेरा मासिक स्राव शुरू हुआ था तो बदन में बदलाव की सुखद अनुभूति होती थी लेकिन काम क्रिया और कला का ज्ञान नहीं के बराबर था। मैं अब अपनी मॉम रेणु को बदचलन औरत के रूप में देखती थी, उनके हमबिस्तर होने की घटना ने मेरे सोच में काफी परिवर्तन किया साथ ही मॉम के हरकतों पर ध्यान रखने लगी, उनके मोबाइल को छुपके से लेकर लड़कों के नंबर खोजती थी लेकिन मॉम काफी चालाक औरत थी जिसके मोबाईल में सारे रिश्तेदारों के नंबर थे साथ ही कोई भी नंबर किसी अनजान लड़के के नाम से शेभ नहीं था और एक शाम जब मैं अपनी सहेली कमला के घर घूमने गई थी तभी वापस घर आते वक़्त प्रीतम दिख गया और मैं उससे नजरें फेरते हुए आगे बढ़ गई। एक सुबह स्कूल के लिए निकली फिर लंच टाइम होते ही टीचर्स रूम गई और क्लास टीचर शशिकला मैडम से बोली ” जी मेरी तबियत ठीक नहीं है
( मैडम पूछी ) ओह तेरा मासिक आ गया क्या
( मैं बोली ) जी पेट में दर्द भी काफी है ” और फिर मैं स्कूल से घर के लिए निकली, ना तो मेरी तबियत बिगड़ी थी और ना मैं घर आराम करने जा रही थी बल्कि मुझे लगा कि शायद मेरी मॉम किसी लौंडे के साथ रंगरेलियां मना रही होंगी और आज तो डोर बेल बजाने का भी मन नहीं था, पिछे की ओर जानेवाले रास्ते मेन गेट खुलने के बाद थे तो वो खुला ही रहता था लेकिन बरामदे की ओर खुलने वाला दरवाजा मॉम बन्द रखा करती थीं खासकर तब जब वो अकेले होती थीं। दोपहर के १२:४५ बजे होंगे और मैं मेन गेट से अंदर घुसी फिर बागान कि ओर जाने से पहले स्कूल बेग को सीढ़ी घर में रख दी, क्या मॉम का नंगापन देखने को मिलेगा या फिर यूं ही वो आराम से घर में होगी। मैं बागान में गई फिर आहिस्ते से मॉम के रूम की खिड़की की ओर जोकि बागान कि ओर खुलती थी, खिड़की खुली तो थी लेकिन रूम में बेड पर मॉम और एक दूसरा लड़का था जिसे मैं पहचानती तक नहीं थी, वाह रें मां के जिस्म की भूख जिसे मेरे डैड मिटा नहीं सकते थे या फिर रेणु जी को स्वाद बदल बदलकर लंड चखने कि आदत थी, जिया की नजर उस अनजान व्यक्ति पर पड़ी तो उसका काल्पनिक नाम फिलहाल रवि रख रही हूं। बिस्तर पर मॉम के बदन पर सिर्फ़ ब्लाऊज़ और पेटीकोट था तो रवि के बदन पर चढ्ढी और बनियान, रवि का गोरा रंग, मोटे मोटे जांघो को देखते हुए मेरी नजर उसके लंड के उभार पर पड़ी जोकि चढ्ढी पर से स्पष्ट थी तो रेणु उसके गाल चूमते हुए उसको बेड पर लिटाया और मेरी नजरो के सामने मॉम रवि के बदन से चढ्ढी और बनियान उतार रही थी, मेरी आंखो के सामने उसका लंड था जोकि यकीनन मोटा और लम्बा था तो उसे मॉम पकड़कर सहलाने लगी और तभी रवि बोला ” जानू आज दोनों एक साथ ही एक दूसरे की योनि चुसन करेंगे
( मॉम ) ओह समझ गई तो क्या मुझे किसी रण्डी की तरह खुद ही अपना कपड़ा उतारकर नंगा होना होगा ” और रवि के इशारे पर मॉम उसके बदन पर डॉगी स्टाईल में हो गई, रवि उनके चेहरे को चूमने लगा तो उसका हाथ रेणु के गोल गद्देदार चूतड़ पर था।
जिया अपने मॉम की करतूत को छुपकर देखे जा रही थी, रवि भी मॉम से उम्र में छोटा था मुश्किल से २९-३० साल का होगा तो स्मार्ट पर्सनैलिटी और उसके गोरे लंबे लंड, मॉम के रसीले ओंठ पर ओंठ रख रवि चुम्बन दे रहा था कि रेणु उसे मुंह में लिए चूसने लगी और रवि रेणु के ब्लाऊज़ की डोरी खोल चूचियों को नंगा कर दिया, बिना ब्रा के मॉम की दोनों चूचियां छाती से लटक रही थी कि किसी काम की देवी की तरह वो रवि के मुंह के ऊपर ही स्तन को की तो रवि चूची को मुंह में लेने के लिए मुंह खोला और पूरा तो नहीं लगभग चूची का आधा हिस्सा मुंह में लिए चूसने लगा साथ ही रेणु के पेटीकोट के नाडे को पकड़ खींचा, बाकी तो आपलोग समझ ही सकते हैं कि रवि पेटीकोट को कमर से नीचे कर उन्हें नंगा कर दिया। मॉम का मांसल बदन नंगा था तो रवि के उपर वो सवार हुए उनके मुंह में ही अपनी जीभ पैबस्त कर दी और वो मॉम के गरदन में हाथ डाले जीभ चूसने लगा, रूम की खिड़की पूर्व दिशा में थी तो बेड पर दोनों उतर दक्षिण दिशा में थे इसलिए मुझे दोनों नग्न अवस्था में काम क्रिया करते दिख रहे थे और फिर मॉम उसके बदन पर से हटी और अब रवि के तन पर डॉगी स्टाईल में हुई लेकिन चेहरा विपरीत दिशा में था, मां की चूतड़ के नीचे उसका चेहरा तो उसके लंड के सामने रेणु की बुर यकीनन पहली बार मेरी योनि में खुजली हो रही थी, रवि ने चेहरा थोड़ा उपर कर मॉम के फैले हुए चूत को और फैलाया फिर उसमें जीभ घुसाए चाटने लगा तो मॉम भी कम नहीं थी उसके लौड़े को पकड़ चूमे जा रही थी और दोनों ओरल सेक्स में लीन थे, अब मॉम रवि के मूसल लंड को मुंह में लिए चूसने लगी तो रवि का जीभ लपलप कुत्ते की तरह बुर में अंदर बाहर हो रहा था और दोनों काम की अग्नि में जल रहे थे लेकिन मैं मूकदर्शक बनी खड़ी थी और फिर रेणु मुंह में लंड लिए सर का झटका देते हुए मुखमैथुन करने लगी तो रवि मां की गांड़ में जीभ घुसाए चाटने लगा, मेरे पैर में थरथरी होने लगी तो दिमाग खराब लेकिन करती भी तो क्या, हटकर मूतने लगी और फिर…… to be continued.

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