रेखा और रोहित का जिस्मानी प्यार : भाग ३

Posted on

पिछले भाग में आपने पढ़ा की मेरी चचेरी बहन रेखा मेरे घर आई हुई थी और फिर दोनों ने छुपकर शारीरिक संबंध बनाए, अगले सुबह जीजा जी किसी काम से निकल गए तो घर में मैं, मॉम और रेखा दीदी ही थीं फिर मैं स्नान ध्यान करके तैयार हुआ तो रेखा पूछी ” कहीं घूमने जा रहे हो
( मैं हंस दिया ) नहीं कोचिंग क्लास से आ रहा हूं, क्यों कोई काम
( वो बोली ) उहूं कुछ नहीं कब तक वापस आओगे
( मैं बोला ) शाम को आऊंगा तब तक खाओ पियो और आराम करो ” फिर मैं घर से निकल गया तो मां ने मार्केट से कुछ सामान लाने का भी लिस्ट दे दिया और मैंं पहले तो कोचिंग क्लास गया फिर वापसी में मार्केट से सामान लेता आया, दोपहर के १:०० बजे घर पहुंचा तो रेखा दीदी डाइनिंग हॉल में बैठ मॉम से बातें कर रही थी, मैं उनकी ओर एक नजर देखा फिर सीधे अपने रूम चला गया, वो पीले रंग की साड़ी तो डिप नेक ब्लाउज पहन रखी थी और उनके बूब्स के उफान को देखता हुआ रूम घुसा फिर कपड़ा बदलकर फ्रेश हुआ और इतने में दीदी रूम मे आई, मैं बेड पर लेटा हुआ था तो वो मेरे पैर के पास बैठ गई ” बहुत जल्दी आ गए रोहित
( मैं उनकी ओर देख मुस्कुराया ) हां बस इतने देर का ही काम था ” और दोपहर में खाना खाकर मैं ऊपर के कमरे में आराम करने चला गया, कुछ देर बाद रेखा वहां आई तो मैं समझ गया कि साली की इच्छा फिर से काम क्रिया करने की हो रही है तो मैं रेखा दीदी को देख बोला ” बैठिए दीदी
( वो मेरे बगल में बेड पर बैठ गई ) अबे तुम दीदी हूं की पी बीबी समझ नही आता ” और वो मेरे छाती को सहलाने लगी, मेरा हाथ उनके साड़ी के पल्लू पर गया तो पल्लू सीने पर से हटाकर बूब्स को ब्लाउज पर से ही दबाने लगा, मस्त गदराई चूचियां थी जिसे मसलते हुए मैं दीदी के कमर में हाथ लगा डाला और उनको अपनी ओर खींचा तो दीदी खुद ही मेरी छाती पर अपने बड़े बड़े बूब्स रख मेरे चेहरे पर चुम्बन देने लगी और मेरा हाथ उनके गोल गुंबदाकार गांड़ पर फिसल रहा था। रेखा मेरे ओंठ पर ओंठ रखे हुए चूमती रही तो मैं उनके गर्दन में हाथ डाले अपना जीभ मुंह से निकाला फिर तो रेखा मेरे जीभ को ही मुंह में लिए चूसने लगी, उनके बूब्स मेरी छाती को सुखद अहसास दे रहे थे तो उनका साड़ी सहित पेटीकोट घुटनों से ऊपर आ चुका था जिसे मैं और ऊपर करते हुए कमर तक कर नग्न गांड़ के दरार में उंगली करने लगा, रेखा मेरे जीभ चूसते हुए मेरे सर के नीचे हाथ लगाई थी तो मैं अब रेखा के मुंह से जीभ निकाल बोला ” क्यों डार्लिंग तुझे थोड़ा भी सब्र नहीं है रात को आराम से मजा करते
( रेखा मेरे बदन पर से उठकर ब्लाउज को खोली फिर लेट गई ) रात हो या दिन बदन की आग कभी भी जग जाती है ” , तो मैं उनके बगल में बैठ बूब्स पकड़ दबाने लगा फिर उनके छाती पर चेहरा झुकाए चूची को मुंह में लेने के लिए तैयार हुआ तो रेखा खुद ही अपनी चूची पकड़ मेरे मुंह में घुसाई, उनकी बूब्स का १/२ हिस्सा मुंह में था तो मैं चूसता हुआ दूसरे बूब्स को दबाने लगा और रेखा मेरे कमर पर हाथ लगाए पेंट को नीचे खिसका दी फिर मेरे लन्ड को पकड़ सहलाने लगी, मेरा अर्ध टाईट लन्ड उनके कोमल हाथ में था तो मैं उनकी चूची चूसने में मस्त था ” आह उफ़ इतना मजा तो तेरा जीजा भी नहीं देता, बस मेरी जांघों को फैलाया और अपना बम्बू डालकर तीन चार मिनट चोद खुद से तृप्त हो जाता और मुझे प्यासा ही छोड़ देता
( मैं रेखा की बूब्स मुंह से निकाल दिया ) ठीक है बेबी तो तेरे जैसी खूबसूरत औरत के लिए क्या मर्द कम पड़ गए हैं, मजे लो और जीजा को शॉर्ट चुदाई करने दो ” मैं अब उठकर वाशरूम चला गया फिर मूतने के बाद फ्रेश हुआ।
बेड पर आया तो मेरी नजर दरवाजे पर पड़ी जोकि खुली हुई थी, मैं कमर से टॉवल लपेटकर दरवाजा बंद किया फिर बेड पर आया और रेखा के जांघों को फैलाकर उसके बीच चेहरा किए बुर चूमने लगा तो रेखा कोमल जननांग पर चुम्बन पाकर तड़पने लगी ” उह उफ हाई मेरी चूत इतनी खुजली ” और वो खुद उंगलियों की मदद से बुर फैलाई तो मैं अपना जीभ घुसाए बुर को चाटना शुरू किया, मैं रेखा को जल्दी में चोदना चाहता था और फिर रात को आराम से सेक्स करता। रेखा की लालिमा लिए चूत को चाटता हुआ अब मैं गर्म हो चुका था तो मेरा ७ इंच लम्बा २ इंच मोटा लन्ड चुदाई को तैयार था, जीभ निकाल झट से लन्ड पकड़े बुर में घुसाया और फिर जोर से धक्का देकर चोदने लगा तो रेखा ” ओह इतनी हड़बड़ी मेरी तो जान निकल गई
( मैं उसके जिस्म पर सवार होकर चोदने लगा जबकि उनका ऊपरी हिस्सा नंगा था तो साड़ी सहित पेटीकोट कमर पर ) साली तुम आकर मुझे कामुक कर दी नही तो रात को आराम से पेलता
( रेखा चूतड उछालना शुरू की ) क्या दिन क्या रात, चुदाई तो चुदाई होती है रात को आज गांड़ चुदवाना है ” में उनके चेहरे को चूमता हुआ गपागप लन्ड अन्दर बाहर कर रहा था तो रेखा मस्त थी ” आह मेरी बुर रसीली होने वाली है ” और उनकी चूत से रस निकलने लगा, गीली चूत में भी मैं लन्ड पेलता रहा लेकिन दीदी मुझे रूकने को बोली फिर मैं उनके ऊपर से हटा तो वो झट से अपने साड़ी सहित पेटीकोट खोल वाशरूम चली गई। मैं बेड पर लेट गया तो रेखा नंगे आई और उसके सेक्सी बदन को देख मन तड़प उठा और वो बिना देर किए मेरे लन्ड के ऊपर चूतड किए बैठी, दोनों जांघो को फैलाई थी तो बुर के सामने लन्ड था और मैं उसके कमर को कसकर पकड़ा तो वो मेरे लन्ड पकड़ बुर में घुसाने लगी, लन्ड तो सरसराता हुआ आधा से अधिक चला गया और मैं रेखा के कमर को पकड़ नीचे से धक्का दिया ” उई मां फाड़ दिया आराम से चोद ” तो मैं नीचे से धक्का देता हुआ चोद रहा था तो रेखा अपने नितम्ब को नीचे ऊपर करते हुए चुदवाने में लीन थी और मैं उसके बूब्स जोकि हिलकोरे मार रहे थे को पकड़ दबाने लगा, लन्ड पर औरत को बिठाकर चोदना आसान काम नही होता लेकिन रेखा दीदी का बदन हल्का था साथ ही उन्हें इस अंदाज में चुदाने का अनुभव था और अब मैं नीचे से धक्का देना बंद कर दिया तो रेखा खुद मेरे बदन पर लेटकर चूतड को आगे पीछे करतें हो साथ ही अपने बदन को हिलाते हुए बुर को लन्ड खिला रही थी। मैं रेखा के गाल चूम लिया फिर उसके पीठ सहलाने लगा ” उह ओह साली अब तो मेरे लन्ड से निकलने पर है तेजी से चूतड हिला ” और वो दुबारा मेरे लन्ड पर सीधे बैठी तो मैं नीचे से धक्का देने लगा फिर वीर्य निकलकर उसकी चूत को गीला किया साथ ही उसकी चूत से टपक कर मेरे झांट पर चुने लगा, रेखा कुछ देर तक बुर में लन्ड लिए बैठी रही फिर उठते हुए बोली ” अब रात को तेरी परीक्षा होगी देखूंगी मेरे गुदाज गांड़ में तेरा लन्ड कितनी देर तक टिकता है ” फिर वो फ्रेश हुई और मेरे रूम से निकल गई।

This content appeared first on new sex story .com

This story रेखा और रोहित का जिस्मानी प्यार : भाग ३ appeared first on dirtysextales.com