Sachin Ki Kahani, Meena ki Jubaani

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हैल्लो दोस्तों,

मैं आपकी मीना, आपके लिए एक और रोमांस और सेक्स से भरी कहानी लेकर आई हूँ। उम्मीद करती हूँ आपको पसंद आएगी।

पिछले कुछ हफ़्तों से गूगल चैट पर मेरी एक जेंटलमैन से बात हो रही है जिनका नाम सचिन है। इनकी उम्र 44 साल है, और ये दिल्ली में अपनी फॅमिली के साथ रहते है। घर में पत्नी और 2 बेटियां है। पत्नी दिल्ली के ही किसी स्कूल में टीचर कि नौकरी करती है और सचिन किसी कंपनी में काम करते है।

बात कुछ 6 साल पुरानी है, जब इनकी पत्नी स्कूल से घर आने के बाद घर पर भी बच्चो को टूशन पढ़ाती थी। तब इनके घर एक सुन्दर सी लड़की भी पढ़ने आती थी जिसका नाम स्वीटी है। सिर्फ नाम से ही नहीं दिखने में भी काफी स्वीट लगती थी। उम्र कुछ 15-16 साल होगी।

एक दिन सचिन घर ही थे और उनकी पत्नी बच्चों को पढ़ा रही थी, तभी स्वीटी को प्यास लगी और उसने कहा – मैडम, प्यास लग रही है, पानी पी कर आऊं क्या मैं?

सचिन कि वाइफ ने सचिन को कहा कि वो स्वीटी को पानी पिला देवे। सचिन उठे और स्वीटी को पानी का गिलास थमा दिया और बाकि बैठे बच्चों को भी पानी पिलाया।

पानी पीने के बाद स्वीटी ने सचिन को थैंक यू अंकल बोलकर एक सेक्सी सी स्माइल दी, जिससे सचिन को भी एक झटका लगा।

कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा, और सचिन भी स्वीटी कि तरफ उसकी खूबसूरती और स्माइल कि तरफ आकर्षित होने लगे थे।

एक दिन सचिन अपनी पत्नी को स्कूल छोड़ कर वापस घर कि तरफ आ रहे थे, तभी उनकी नज़र एक लड़की पर पड़ी जो स्कूल ड्रेस पहने टैक्सी का इंतज़ार कर रही थी।

सचिन ने गौर से उस लड़की को देखा तो उनको पता चला कि ये वही स्वीटी है।

सचिन उसके पास गए और उससे पूछा कि बेटा, यहाँ क्यूँ खड़ी हो?

स्वीटी – अंकल, स्कूल जाना है, तो मैं टैक्सी का इंतज़ार कर रही हूँ।

सचिन ने सिर से पैरों तक उस पर नज़र डाली। स्वीटी ने एक शर्ट और स्कर्ट पहनी थी। उसकी गोरी गोरी जांघें स्कर्ट से बाहर झाँक रही थी। और उसने अपने कन्धों पर स्कूल बैग टाँग रखा था जिससे उसका शर्ट एक दम टाइट हो रहा था, और उसके उभार एक दम कसे हुए दिख रहे थे।

सचिन ने कहा – बेटा, मैं छोड दूँ क्या?

स्वीटी – ठीक है अंकल।

स्वीटी सचिन कि बाइक पर बैठ गई और दोनों स्कूल के लिए रवाना हो गए।

स्वीटी सचिन से एक दम चिपक कर बैठी थी जिससे उसके बूब्स सचिन कि कमर में दब रहे थे, जिससे सचिन को बहुत अच्छा फील हो रहा था।

सचिन को पता चल चूका था कि स्वीटी के स्कूल का क्या टाइम है, इसलिए सचिन अपनी वाइफ को स्कूल छोड कर आते और फिर स्वीटी को भी उसके घर कि गली के नुक्कड़ से अपनी बाइक पर बैठा कर उसे स्कूल छोड आते। कई बार वो उसे बाहर नाश्ता भी करवा देते थे।

स्वीटी सचिन से चिपक कर ही बैठती थी और उसके बूब्स का स्पर्श सचिन को बहुत उत्तेजित करने लगा था। अब सचिन हमेशा उस लड़की के बारे में सोचते रहते थे।

शुरू शुरू में तो सचिन को लगा था कि लड़की छोटी है, नादान है, बेटी कि उम्र कि है इसलिए अब तक सचिन चुप थे। लेकिन स्वीटी के बूब्स कि गोलाइयों को अपने कमर पर महसूस करने के बाद सचिन का मन डोलने लगा, और वो जब भी अपनी पत्नी कि चुदाई करते तो उनके ख्याल में स्वीटी कि खूबसूरती और उसके उभरे हुए बूब्स का स्पर्श ही आता था।

उन्होंने मन बना लिया कि अब तो किसी भी तरह से स्वीटी कि जवानी का स्वाद लेना ही है।

एक दिन सचिन ने स्वीटी को उसके घर कि गली के नुक्कड़ से अपनी बाइक पर बैठाया, और थोड़ी दूर निकल कर स्वीटी से बोले – आज तुम स्कूल मत जाओ, मैं तुम्हे शॉपिंग करवा लाता हूँ।

शॉपिंग के नाम से ही स्वीटी खुश हो गई और बोली – ठीक है अंकल।

सचिन उसको एक शोरूम में ले गए और उसे एक जीन्स टोपर दिलवा दिया। फिर वो बोले – स्वीटी, अब कुछ खाने चलते है, तुमको भूख भी लगी होगी, और मुझे भी लग रही है।

स्वीटी बोली – हाँ अंकल, स्कूल में तो अब तक लंच कर चुकी होती।

सचिन ने एक होटल में ओयो रूम बुक करवा लिया, और दोनों रूम में चले गए।

रूम में जाकर दोनों ने कुछ खाना खा लिया, और फिर स्वीटी जीन्स टॉप को बैग से निकाल कर देखने लगी।

सचिन – कैसी है ड्रेस?

स्वीटी – बहुत अच्छी है अंकल।

सचिन ने स्वीटी का हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींच कर उसके होंठ चूम लिए।

स्वीटी को एकाएक कुछ समझ नहीं आया कि अचानक से ये क्या हुआ?

तभी सचिन ने फिर से स्वीटी का मुँह अपने हाथों में लिया और उसके होंठ चूमने लगे।

स्वीटी अब समझ चुकी थी कि अंकल को क्या चाहिए, लेकिन वो नई ड्रेस लेकर काफी खुश थी और उसे बाहर होटल का खाना भी मिला इसलिए उसने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि वो भी सचिन के होंठों को चूमने लगी।

स्वीटी ने स्कूल ड्रेस ही पहन राखी थी, उसकी जांघें स्कर्ट से बाहर ही थी। सचिन ने किस्स करते हुए स्वीटी कि जाँघों को सहलाना शुरू कर दिया, और एक हाथ को स्वीटी कि कमर के पीछे से घुमा कर उसके बूब्स पर रख दिया।

स्वीटी पूरी तरह से सचिन कि गिरफ्त में थी, एक हाथ जांघ पर, एक बूब्स पर और होंठ पर होंठ।

फिर सचिन ने स्वीटी के शर्ट के बटन खोल कर शर्ट में हाथ डाल दिया और ब्रा के ऊपर से बूब्स को दबाने लगे।

स्वीटी को शायद हल्का हल्का दर्द महसूस होने लग गया था इसलिए उसकी साँसे बहुत तेज होने लगी थी।

तभी सचिन ने स्वीटी का शर्ट पूरा खोल दिया और ब्रा भी खोल कर रख दी।

स्वीटी के नंगे बूब्स को देख कर सचिन कि आँखों में मानो चमक सी आ गई, जिन बूब्स को सचिन अपनी कमर पर ही महसूस कर पाते थे, आज वो उनकी आँखों के सामने थे वो भी नंगे।

सचिन ने स्वीटी को पलंग पर लेटा दिया और उसके दोनों बूब्स पकड़ कर दबाने लगे और उसके निप्पल को भी निचोड़ने लगे।

सचिन ने जितना अनुमान लगाया था उससे भी बड़े बोबे थे स्वीटी के, उनका साइज 30 तो होगा ही। 16 कि उम्र में उसके इतने बड़े बोबे, सोचा नहीं था सचिन ने।

सचिन उसके बोबे आमों कि तरह दबा दबा कर चूसने लगे, और स्वीटी दर्द से छटपटा रही थी, लेकिन उसे बूब्स चुसवाने में मजा भी आ रहा था।

बूब्स दबाते दबाते सचिन ने स्वीटी कि स्कर्ट को थोड़ा ऊपर किया और उसकी चुत पर अपना हाथ रख दिया जो अभी पैंटी से ढकी हुई थी।

सचिन उसकी चुत को सहलाने लगे और उसके निप्पल को चूसने लगे।

फिर सचिन उठे, और स्वीटी कि स्कर्ट का हूक खोल कर स्कर्ट पूरी खोल दी, और पैंटी को भी खींच कर खोल दी।

स्वीटी अब पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी।

सचिन ने उसकी चुत पर नज़र डाली और उसे देखते ही रह गए, इतनी खूबसूरत थी स्वीटी कि चुत।

ठीक से जवान भी नहीं हुई थी, गोरी गोरी जाँघों के बीच एक दम बारीक बालों के बिच एक पतली सी लकीर, दोनों तरफ गुलाब कि पंखुड़ियों जैसे कोमल और फूली हुई फांकें, उन पर भूरे रंग के बारीक़ बारीक बाल, जो हाल ही में आना शुरू हुए होंगे, उनके बिच एक पतली सी लकीर, जो चुत के रस से थोड़ी भीगी हुई थी और चमक रही थी।

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सचिन ने सालों पहले ऐसी चुत देखी थी, जब वो अपनी पत्नी को ब्याह कर घर लाए थे और सुहागरात पर उसकी चुत मारी थी, उसके बाद सीधे आज इतने सालों बाद उनको इतनी खूबसूरत चुत मिली थी।

सचिन ने बिना देर किये अपने सारे कपडे खोल दिए और नंगे होकर स्वीटी के बाजू में लेट गए और उसकी चुत को सहलाने लगे।

फिर वो स्वीटी कि टांगों के बिच आ गए और उसके घुटने मोड़ कर पैर फैला दिए, और उसकी चुत पर चूमने लगे, और चुत के अंदर अपनी जीभ से चाटने लगे।

बहुत देर तक चुत चाटने के बाद सचिन ने स्वीटी को उठाया और उसके होंठ पर अपना लण्ड रगड़ने लगे।

स्वीटी के होंठ काफी मुलायम थे इसलिए सचिन को बहुत अच्छा लग रहा था, इस तरह उसके होंठ पर लण्ड फेरना।

फिर सचिन ने स्वीटी के बाल पकडे और अपना लण्ड उसके मुँह में घुसा दिया।

स्वीटी ने उनका लण्ड हाथ में पकड़ा और उसको चूसने लग गई।

सचिन ने स्वीटी को कुल्फी खाते हुए देखा था, वो इसी तरह कुल्फी खा रही थी जिस तरह वो अभी लण्ड को चाट चाट कर चूस रही थी।

सचिन उसके बाल पकड़ कर उसके मुँह में अपना लण्ड डालकर आगे पीछे कर रहे थे, जिससे उनका लण्ड स्वीटी के गले तक भी जा रहा था, और स्वीटी को कई बार खासी भी आ गई।

फिर सचिन ने स्वीटी को वापस लेटने को कहा और वो पलंग पर लेट गई।

सचिन उसके पैरों के बिच बैठ गए और उसकी चुत को उँगलियों से सहलाने लगे, और जब उन्होंने चुत को चौड़ी कर के देखा तो पाया कि उसकी चुत एक दम गुलाबी रंग कि है जो किसी विदेशी लड़की कि लग रही थी।

सचिन ने उसकी चुत पर अपना लण्ड रगड़ना शुरू किया और स्वीटी से बोले – पहले कभी सेक्स किया है?

स्वीटी – नहीं अंकल।

सचिन – इसका मतलब तु वर्जिन है?

स्वीटी ने कोई जवाब नहीं दिया…

सचिन ने अपना लण्ड उसकी चुत के छेद पर टिकाया और उसके ऊपर लेट गए, फिर धीरे धीरे उस पर दबाव डालकर लंड को अंदर घुसाने लगे, लेकिन स्वीटी कि चुत इतनी कसी हुई थी, कि लण्ड एक दम टाइट होकर घुस रहा था।

अभी लण्ड का टोपा ही अंदर गया होगा, कि स्वीटी चिल्ला उठी, आह्ह्हह्ह, अंकल दर्द हो रहा है, बाहर निकाल दो इसको, मुझे नहीं करना है सेक्स।

सचिन ने बाहर निकाल दिया और उसको प्यार से पुचकारने लगे, और उसको समझाने लगे कि पहली बार में दर्द होता है, उसके बाद बहुत मजा आएगा, तु खुद चाहेगी कि कोई तेरे अंदर डालकर सेक्स करे।

लेकिन स्वीटी ना नकार करती रही…

सचिन वापस उसके निप्पल चूसने लगे, और कुछ ही देर में वो गरम हो गई, और उसकी साँसे फिर से चढ़ गई।

तभी सचिन ने अपना लण्ड उसकी चुत में घुसा दिया, और उसका टोपा फिर से अंदर चला गया।

स्वीटी जैसे ही चिल्लाई, सचिन ने उसके होंठ अपने होंठों में दबा दिए और चुत में लण्ड को दबाने लगे।

लण्ड धीरे धीरे उसकी चुत में जगह बनाता हुआ आगे बढ़ रहा था, और स्वीटी दर्द से कांपने लग गई थी।

सचिन ने अपना लण्ड बाहर निकाला और वापस एक झटके में अंदर घुसा दिया।

वापस निकाला और वापस झटका मार कर घुसा दिया। इसी तरह 4-5 झटकों में लण्ड स्वीटी कि चुत कि सील को तोड़ता हुआ अंदर घुस गया और सील के टूटते ही स्वीटी ने दर्द से चिल्लाना चाहा, लेकिन सचिन ने उसके होंठों पर हाथ रख दिया और अपना लण्ड बाहर खींच लिया।

सचिन ने देखा कि स्वीटी कि चुत से खून बाहर आ रहा है, और थोड़ा खून उनके लण्ड पर भी लगा हुआ है।

सचिन ने उसके मुँह से हाथ हटाया और अपने होंठ उसके होंठों पर रख कर चूमने लगे।

स्वीटी कि आँखों से आंसू कि धार बह रही थी और पूरा बदन पसीना पसीना हो गया।

सचिन ने अपने वॉलेट से एक कंडोम निकाला और उसे पहन कर फिर से स्वीटी के ऊपर लेट कर उसे चोदने लगे।

स्वीटी को काफी देर तक दर्द होता रहा और वो छटपटाती रही, और कराहती रही।

एक क्षण ऐसा आया जब उसकी कराह उसकी सिसकारियों में बदल गई। आह्ह्हह्ह आह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अंकल आह्ह्हह्ह्ह्ह

सचिन के लण्ड कि रगड़ उसकी चुत के अंदर उसको अच्छी लगने लगी थी और वो भी चुदाई का मजा लेने लगी।

कुछ देर बाद सचिन ने चुदाई कि गति बढ़ा दी और जोर जोर से शॉट मारने लग गए…

आह्ह्ह्हह्ह आह्ह्हह्ह्ह्ह धीरे अंकल आह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसी आवाजे सुनकर उनकी उत्तेजना बढ़ गई, और अगले ही मिनट सचिन ने अपना माल छोड दिया, और चित्त होकर स्वीटी के ऊपर ही ढेर हो गए, लेकिन स्वीटी अभी भी अपनी कमर हिला कर उनके लण्ड को अपनी चुत में हिलाने कि कोशिश कर रही थी, और वो भी रुक गई।

दोनों चित्त होकर ऐसे ही लेटे रहे। सचिन का लण्ड सिकुड़ कर चुत से बाहर आ गया।

फिर सचिन थोड़े नार्मल हुए और बाथरूम में जाकर कंडोम को फ्लश किया और वापस आ कर लेट गए।

कुछ देर बाद दोनों वापस एक दूसरे को सहलाने लगे, चूमने लगे और एक बार वापस दोनों चुदाई का मजा लेने लगे।

शाम हो चुकी थी और स्वीटी के स्कूल कि छुट्टी होने वाली थी इसलिए उन्होंने होटल से चेक आउट किया और सचिन ने स्वीटी को उसकी गली के नुक्कड़ पर ड्राप कर दिया।

अगले दिन वो टूशन आई, लेकिन वो ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही ना हो, सचिन को भी ख़ुशी थी कि बात ना ही हो तो बेहतर है।

कुछ महीनो तक उनके बिच इस बारे में कोई बात नहीं हुई। वो बात भी करते तो वो नार्मल ही होती थी।

फिर एक दिन सचिन को पता चला कि स्वीटी के फाइनल एग्जाम है उसके बाद उसका स्कूल भी बदल जाएगा और उसका टूशन भी बंद हो जाएगा।

एग्जाम से 2 दिन पहले ही सचिन फिर से उसके स्कूल चले गए और उससे कहा कि – जाने से पहले मैं एक बार और तेरी लेना चाहता हूँ।

स्वीटी भी मान गई….

दोनों उसी होटल में पहुंच गए और उस दिन भी दोनों ने खूब जम कर चुदाई का आनंद लिया।

उसके बाद स्वीटी के एग्जाम हो गए और वो दिल्ली छोड़कर अपने परिवार के साथ कही ओर शिफ्ट हो गई जिसका पता आज तक सचिन को नहीं लगा। वो आज भी स्वीटी को उसकी कमसिन चुत को और उसके कसे हुए बोबे मिस करते है। हालाँकि सचिन आज भी अपनी पत्नी कि चुदाई से खुश है, अक्सर अपनी पत्नी कि चुदाई करके उसे खुश कर देते है।

सचिन कि कहानी सुनकर मुझे लगा कि मुझे ये कहानी लिखनी चाहिए, शायद स्वीटी भी कही ये कहानी पढ़ रही हो और उसे याद आ जाए कि सचिन अंकल ने किस तरह उसे कली से फूल बनाया था।।।।

तो दोस्तों ये थी सचिन कि कहानी, मेरी जुबानी।।

धन्यवाद।।।।।।।।

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