रेणु की प्यासी जवानी : भाग ३

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रेणु तो अपने घर के नौकर या यों कहिए खेतो की देखभाल करने वाला रघु के साथ सेक्स कर ली लेकिन मेरी उम्र २० वर्ष की थी, लंबाई ५ फीट ४ इंच तो गोरा रंग साथ ही बूब्स छोटे छोटे और टाईट, उस पर ३२ सी साईज की ब्रा पहनती हूं तो मोटे चिकने जांघो के बीच योनि, जिसे हर लौंडा या मर्द पसंद करता है तो उसकी झिल्ली सुहागसेज़ पर फटी और मेरे पति ने मुझे जीवन में पहली बार चोदा, दर्द तो असहनीय हुआ लेकिन फिर मजा भी आने लगा और वो तो काम कला में निपुण थे, मेरी योनि को जब वो चाटे तब मुझे लगा कि ये तो कामसूत्र पुस्तक तक को पढ़े हुए हैं, तीन महीने तक हर रात पति के साथ बिस्तर पर शारीरिक संबंध बना तो मुझे भी चुदाई की आदत सी हो गई और मैं भी लन्ड को चूसने लगी, शादी के पहले हमेशा सेक्स की सोचती थी तो लगता था की मर्द अपनी बीबी के साथ आखिर में करता क्या होगा, सिर्फ चुदाई यानी अपना लिंग औरत की योनि में घुसाकर धक्का देना और फिर अपना रस ( वीर्य ) गिराकर खुद को संतुष्ट करना लेकिन सुहागसेज पर हर वो काम हुआ जो मेरी कल्पना से परे था, मेरे ओंठ को चूसे तो चुचियों को चूस चूसकर मुझे कामुक कर दिए और जब मेरी योनि पर चुम्बन देने लगे तो मैं तो तड़प उठी फिर जीभ तक से योनि की चुदाई और मुझसे लन्ड चुसवाना, यकीनन सब कुछ मेरे सोच से परे थे लेकिन अपने मायके पहुंचकर समझो तो प्यासी औरत की तरह मर्द के संसर्ग के लिए तड़पने लगी और आखिर में रघु मेरे मन में आया तो उससे अपने बूब्स चुसवाई साथ ही योनि को चटवाई लेकिन आम के बगीचे में आखिरकार मुखमैथुन करते हुए उसके लन्ड से निकला वीर्य पी गई, सच कहो तो पति के लन्ड का वीर्य तक नही मुंह में ली थी और अब रघु से चुदाई का विचार था। अगले दिन मैं स्नान करके नाश्ता की तो रघु मेरे पिता जी से मिलने आया था और मैं स्कर्ट साथ ही टॉप्स पहनकर तैयार हुई तो मां मुझे देख पूछी ” किसी सहेली के यहां जाना है क्या
( मैं बोली ) उहूं, मार्केट में काम है लेकिन सोच रही हूं की कैसे जाऊं
( पिता जी बोले ) मोटरसाइकिल से चली जाओ, रघु तेरे साथ चला जाएगा ” मेरे मन की मुराद तो मानो पूरी हो गई, रघु कुर्ता और पैजामा पहना हुआ था तो वो बोला ” हां मालिक मुझे भी कुछ खाद और बीज लेना है ” तो समझो सुबह के ११:०० बजे रघु के साथ मोटरसाइकिल पर बैठकर मार्केट की ओर चल दी, गांव के लोगों का सोच तो काफ़ी रूढ़िवादी होती है इसलिए बाईक पर उससे थोड़ी दूरी बनाए बैठी थी साथ ही दोनो पैर एक ही ओर किए बैठी हुई थी लेकिन ज्योंहि गांव से बाहर हुए मैं रघु से चिपककर बैठ गई तो मेरा दाहिना बूब्स उसके पीठ से सटा हुआ था और मैं रघु के कमर पर हाथ रख बोली ” मार्केट में दस मिनट का ही काम है और तुम वो खरीदे
( रघु बोले ) कंडोम तो वहीं ले लूंगा और आपको नहर की ओर ले चलूंगा
( मैं बोली ) ओह लगता है तेरा विचार कुछ खास करने का है
( वो बोला ) मालकिन आपकी इजाजत के बगैर नहीं करूंगा ” तो दोनो मार्केट पहुंचे और मुझे कोई काम तो था नही फिर भी एक कपड़ा की दुकान में गई और रघु को मेडिकल स्टोर भेज दी, दुकान से अपने लिए दो पेंटी और ब्रा खरीदी फिर रघु वहां आया और दोनो मार्केट में ही थे, रघु अपने पॉकेट से मुझे कुछ निकालकर दिया तो मैं उसे देखने लगी ” अरे बुद्धू, ये कंडोम नही है तुम को कागज में लिखकर दी फिर भी ये कौन सा गर्भ निरोधक दवाई लेते आए
( वो बोला ) दीजिए वापस कर आता हूं
( मैं उस दवाई को ध्यान से देखी ) ठीक है इससे भी काम चल जाएगा ” फिर दोनो बाईक पर सवार होकर निकल पड़े, मुझे मालूम था की रामगंगा नहर और पास में नदी बिलकुल ही सुनसान इलाका है तो रघु बाईक को तेज रफ्तार से चलाता हुआ मुझे उस नहर की ओर ले गया, वैसे ये अप्रैल का महीना था तो थोड़ी बहुत गर्मी थी और अब नहर के पास पहुंचे तो रघु बाईक लगाया, मैं बाईक पर से उतर गई फिर बोली ” उधर चलो पेड़ की छांव में ” दोनो पेड़ के नीचे बैठे तो मैं उसके मोटे जांघ पर चूतड रखकर बैठी फिर उसके कंधे में बाहें डालकर गाल चूमने लगी, रघु की लंबाई ५ फीट ७ इंच होगी तो सांवला रंग लेकिन सीना चौड़ा तो लन्ड का तो कहना ही बेकार है, पूरा टाईट होकर ७ इंच का होगा साथ ही मोटा भी लेकिन उसका लन्ड चूसते हुए विर्येपान की थी तो वो जल्दी ही रस स्खलित कर दिया था। मैं घुटनो तक की लंबाई वाली स्कर्ट और टॉप्स पहन रखी थी और अब रघु भी मेरे चेहरे को चूमने लगा साथ ही मेरे पीठ सहला रहा था, मैं उसके गर्दन को जब चूमने लगी तो वो मेरे चूतड के नीचे हाथ देकर स्कर्ट को ऊपर करना चाहा, फिर क्या था मैं उसकी जांघो से चूतड को थोड़ा ऊपर की तो स्कर्ट को रघु कमर तक उठाया और मैं उसके पीठ सहलाते हुए कुर्ता को खोलना चाही तो वो कुर्ता बाहर कर मेरे चूतड को सहलाने लगा, मैं अब उठकर खड़ी हुई फिर उसको लेटने को बोली, अब मैं उसके कमर के पास बैठकर पैजामा के नाड़ा को खोल दी तो उसका लन्ड चढ्ढी में ही टाईट लग रहा था, चढ्ढी उतारकर उसके लन्ड पकड़ ली ” रघु मैं तेरे ऊपर लेकिन चेहरा इधर किए लेट जाऊंगी, समझे
( वो हंस दिया ) जी मालकिन तब मेरे मुंह के ऊपर आपकी चूत रहेगी और चाटना है
( मैं बोली ) हां समय कम है और काम ज्यादा इसलिए पहले दोनो एक दुसरे के लिंग योनि को चाटेंगे फिर असली काम ” अब मैं अपने पेंटी को उतार दी और उसके ऊपर डॉगी स्टाइल में सवार हुई लेकिन अपना चेहरा उसके लन्ड कि ओर किए तो मेरी चूतड हो या चूत उसके मुंह के ऊपर, अब मैं टॉप्स को गले से निकाल दी तो लन्ड पकड़े चूमना शुरू की और मुझे एहसास होने लगा की रघु मेरी गांड़ पर हाथ फेरता हुआ बूर को चूमने लगा, काफी शांति थी नहर के पास और वो भी अप्रैल का महीना और फिर मैं लन्ड के सुपाड़ा को जीभ से चाटने लगी तो उधर रघु मेरी बूर को उंगलियों से फैलाकर जीभ से बूर कुरेदने मे लगा हुआ था, मैं अब झट से उसका लौड़ा मुंह में लिए चूसने लगी फिर सर का झटका देते हुए मुखमैथुन करने लगी तो रघु मेरी बूर को जीभ से ही चाटे जा रहा था। रामगंगा नहर के किनारे पेड़ की छांव में मैं सिर्फ ब्रा पहनी थी तो स्कर्ट मेरे कमर पर था, रघु को तो मानो हीरे का भंडार ही मिल गया हो और वो मेरे चूतड पर हाथ फेरता हुआ बूर को जीभ से चाटने में लगा हुआ था, उसका मूसल लन्ड मेरे मुंह में अकड़ चुका था तो मैं लन्ड को मुंह से निकाली फिर उसे जीभ से चाटने लगी, रघु के मुंह पर मैं अपना चूतड धंसा रखी थी ताकि बूर चाटने में उसे दिक्कत ना हो और वो जीभ बूर से निकाला तो मैं उसके तन पर से उतर गई, आगे अगले भाग में।

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