मामा और भांजी की प्रेम कहानी : भाग १०

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जिया दुबारा लन्ड चूसने वाली थी की मैरी मोबाइल बजने लगी और मैं कॉल रिशिभ की ” हां मां बोलो
( मां ) अरे दोपहर के १२:०० बज चुके हैं तुम्हें भूख तरास लगी है की नही
( जिया ) अभी तो अनाज की बोरियां लादी जा रही है, एक डेढ़ घंटे में काम खत्म हो जाएगा तो फिर आ जाऊंगी ” चलो कम से कम अभी के लिए बला टली, मैं समर के लन्ड पकड़ मुंह में ले ली फिर चूसना शुरू की तो समर लेटे हुए मेरे बूब्स दबाने लगे, पिछले तीन दिनों में नानी घर में बहुत घूमना फिरना है लेकिन सेक्स की दुनिया में तो साथ निभाते हुए मामा जी, ना उनकी इच्छा मुझसे भरी थी और ना ही मेरे पास विकल्प था और मुखमैथुन करते हुए मेरी बुर अब गुदगुदी से मेरी जान ले रही थी तो समर भी चूची दबाते हुए ” ओह आह मेरी रानी अब चूसना छोड़ तो तेरी बुर का स्वाद लूं ” और मैं उसके लन्ड मुंह से निकाल बैठी रही फिर मामा अपने कमर से तोलिया लपेटकर गोदाम से शायद बाहर निकले तो मैं नंगे लेटी हुई थी, समर के लन्ड का इंतजार मेरी बुर को था। वो आया फिर मुझे एक गर्भ निरोधक दवाई खाने को दिया तो मैं उसे खाकर लेट गई, मेरी जांघो को फैलाकर समर घुटने के बल बैठा फिर लन्ड को बुर के दरार में रगड़ने लगा, वैसे भी इसका लन्ड दो बार खाकर मस्त हो चुकी थी और उसका सुपाड़ा घुसा की मामा मेरे कमर पर हाथ रखे लन्ड को अंदर चांपने लगा, खसखसाता हुआ उसका मुसल लन्ड अंदर जाने लगा तो मेरी जान निकल रही थी, सही में देहाती मर्दों का लन्ड शहरी से अधिक कड़ा होता है और तभी समर धक्का देकर पूरा लन्ड घुसाया तो मैं चिंख उठी ” उह साला जितनी बार चोदता है लगता है बुर फट जायेगी उह समर थोड़ा आराम से चोद ना रेणु दीदी को, इतने में मामा मेरे मुंह पर हाथ रखा फिर धकाधक चोदता हुआ मेरे ऊपर सवार हो गया, जिया उसके बदन को सहलाने लगी तो उसकी चौड़ी छाती से मेरी गोल मुलायम चूंचियां रगड़ खा रही थी, बुर में लन्ड का होना लड़के और लड़की के लिए समागम सी होती है और इस प्राकृतिक प्यार पर किसी का नियंत्रण नहीं होता लेकिन सामाजिक बंधन के कारण ही रिश्तों में लोग सेक्स नही किया करते, क्या मेरी जैसी जवान खूबसूरत लड़की पर मेरा भाई का ध्यान नहीं जाएगा या फिर वो मेरे नंगे जिस्म देख तड़प नही उठेगा, यहां तो लोग रिश्तों को ताख पर रखकर शारीरिक संबंध बनाते हैं और मेरी चूदाई करते हुए समर मेरे गाल और चेहरे को चूमने लगा तो मैं किसी बेबस लड़की की तरह उसके बदन के नीचे लेटकर चुदवाने लगी ” उह ओह बुर में कितनी गर्मी हो रही है चोद साले मादरजात अपनी भांजी को रण्डी बनाकर चोदता रह
( मामा का मुसल लन्ड मेरे कोमल योनि में तेज घर्षण पैदा कर रहा था ) ओह जिया तुम्हारी जैसी लड़की मेरे तकदीर में कहां, चुचियों की गोलाई हो या चूत का नशा तेरे में तो हर वो खूबी है जिसके सहारे तू हर कुछ पा सकती है
( मैं चूतड उछालने लगी ) फिलहाल चोद अब रस निकलेगा ” और फिर उसके आठ दस धक्के ने बुर का पानी निकाल दिया, मैं ढीली पड़ गई थी तो मामा लन्ड निकालकर बोला ” थोड़ा रेस्ट कर ले फिर दूसरे आसन में ”
मैं लेटी हुई रही फिर समय देखी तो लगा की जल्दी में ही संभोग क्रिया कर लिया जाए और मामा तो सिगरेट फूंकते हुए मुझे देख रहे थे, मैं उनसे सिगरेट ली फिर फूंकते हुए उठकर बैठी ” क्या घुटनो और कोहनी के बल हो जाऊं
( मामा बोले ) तीन आसन में संभोग कर चुके हैं कोई अलग ” मैं सोच ली की इसके लन्ड पर बैठकर ही चूदाई करवाती हूं और इस आसन में तो अच्छे अच्छे पहलवान ढीले पड़ जाते हैं ” मामा अब तू लेट और तेरी ये चुदक्कड भांजी तेरे लन्ड पर बैठकर चुदाएगी ” समर बेड पर लेट गया और मैं तो गीले बुर के कारण ही इस आसन में चूदाई कराना चाहती थी, उसके लेटते ही उसके कमर के ऊपर टांगें फैलाए साथ ही चूतड को ऊपर की ओर किए बैठी तो समर मेरे कमर को थाम लिया और मैं खुद से उसका लन्ड पकड़े बुर में घुसाने लगी, बुर तो इलास्टिक की तरह होती है और फिलहाल उसके आधा लन्ड को आराम से निगल गई फिर क्या था, मैं अपने चूतड को नीचे की ओर करते हुए लन्ड को अंदर घुसाने लगी, इतने में समर नीचे से धक्का मारकर बुर चोदने लगा, मैं खुद ही चूतड उछालने लगी तो लन्ड लंबा होने के कारण आराम से उसके कमर पर बैठे हुई चूदाई का लुफ्त उठा रही थी तो मेरी चूचियां आपस में टकरा भी रही थी, मामा नीचे से धक्का दे देकर चोद रहे थे तो मैं अपने गोल गद्देदार गांड़ उछालते हुए चुद्वा रही थी फिर तो उसके बदन पर लेट गई, बिल्कुल ही डॉगी स्टाइल में और उसके ओंठ चूमने लगी ” अब तू धक्का दे देकर चोद साले चाहे पांच मिनट में लन्ड ढीला पड़े या पंद्रह मिनट में, मुझे तो इसी आसन में चुदाना है
( समर नीचे से धक्का देता रहा और मैं मस्त थी ) सही में तू तो अपनी मां से भी बड़ी छिनार निकली लगता है तू शादी के बाद भी इधर उधर मुंह मारते फिरेगी
( मैं अपने चूतड को आगे पीछे करते हुए लन्ड का मजा ले रही थी ) अरे मामा शर्म कर अपनी भांजी को चोद रहा है ” तो समर नीचे से तीव्र गति से लन्ड का धक्का देता हुआ बुर में आग लगाए हुआ था और मैं उसके सीने से चुचियों को रगड़ते हुए मस्त थी, अभी तो दूसरे राउंड का तीन चार मिनट ही हुआ है और पहले भी दो तीन मिनट ही मेरे बुर को चोदा था, मैं उसके जिस्म पर पूरी तरह से सवार हो चुकी थी तो उसका लन्ड अब खर्ंजा समान बुर को चुभ रहा था, ओंठ चूमते हुए बोली ” समर जितनी देर चोदना है चोद ले क्योंकि रात तो रेणु दीदी को ही चोदना है
( उसका लन्ड बुर में गपागप अंदर बाहर हो रहा था ) अच्छा तो तू क्या करेगी ” मैं चुप रही और कुछ देर बाद समर तेजी से चोदता हुआ हांफने लगा ” बस बेबी बस अब निकला ” और साले के लन्ड। से गर्म चिपचिपा वीर्य निकलकर बुर को ठंडा कर दिया, मैं उसके ऊपर लेटी रही और ओंठ चूम ली ” तुम भी चोदने में उस्ताद हो जल्दी से मामी घर पर लाओ
( वो मेरे ओंठ चूम लिया ) जरूर डार्लिंग ” फिर दोनो अलग हुए तो मैं अपनी योनि को साफ की फिर थोड़े देर तक आराम कर कपड़ा पहन घर चले गए, अब तो मेरी मां रेणु की चूदाई बाकी है, अगला भाग ” भाई और बहन का नैसर्गिक प्यार ” पढ़ें।

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