ट्रेन का सफर : सहयात्री बना हमसफर (भाग ४)

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फ्रेंड्स
ट्रेन इलाहाबाद जंक्शन से खुल चुकी थी तो मैं और राज संभोग सुख में लगे हुए थे लेकिन मेरी बुर का रस राज के लन्ड ने सुखा दिया और दोनो छोटे से ब्रेक में चले गए, वो तो फ्रेश होने को निकला लेकिन मैं अपने बर्थ पर नंगी लेटी रही सिर्फ नाईट गाऊन को एडजस्ट कर ली, वैसे भी यहां कौन मुझे देखने वाला था और फिर राज वापस आकर कूप का दरवाजा बंद किया और मैं बर्थ पर उठकर बैठी फिर नाईट गाऊन को खोलकर डॉगी स्टाइल मे हो गई, मेरे जिस्म का अगला हिस्सा झुका हुआ था साथ ही दोनो हाथ बर्थ के दीवार पर रखी थी तो राज मुझे घुटनो और कोहनी के बल किए हुए चूतड के सामने लन्ड पकड़े बैठा हुआ था, मैं अपने बर्थ पर ही डॉगी स्टाइल में थी तो पीछे चेहरा किए देखी की राज बुर में लन्ड घुसा रहा है, वैसे भी मुझे सुपाड़ा सहित आधा लन्ड घुसने का एहसास मिला तो मैं आराम से चुदाई की क्रिया में मस्त थी और राज मेरे कमर को पकड़ धक्का दिया तो पूरा लन्ड बुर में था, दीपा चुदाई कला में दक्ष थी, हरेक आसन में चुदवाना पसंद करती थी और चलती ट्रेन में डॉगी स्टाइल में अपने चूतड को स्प्रिंग की तरह हिलाते हुए चुदाई के आनंद को पा रही थी। राज का लन्ड मेरे लिए ना तो छोटा था और ना ही लंबा बल्कि देर तक टिके यही सोच रही थी लेकिन राज दे दनादन चोदते हुए मेरे गर्दन पकड़ हांफने लगा और मैं ” ओह उह उफ लगता है दुबारा बुर से रस निकालकर ही तू दम मारेगा
( राज अब सीधे की जगह तिरछा होकर बुर में धक्का देने लगा ) ओह राज तुम बहुत ही स्ट्रॉन्ग हो, पटना में किधर रहते हो
( राज मेरे सीने से लटकते बूब्स को पकड़ पुचकारने लगा तो अब मैं चूतड को हिलाते हुए चुदाई करवा रही थी ) मैं तुम्हें मोबाइल नंबर तो दे दूंगा लेकिन एक शर्त है
( मैं बुर की गर्मी से परेशान थी ) हां जी बोल तो
( उसका लन्ड गपागप अंदर बाहर हो रहा था ) बेबी मेरे दो फ्रेंड हैं तो एक बार ग्रुप सेक्स करना पड़ेगा
( मैं चूतड स्थिर किए लन्ड का धक्का सह रही थी ) क्यों नहीं लेकिन मैं पहले उन दोनो से मिलूंगी क्योंकि दीपा सिर्फ स्वादिष्ट भोजन खाने की आदि है ” और पिछले चार पांच मिनट से राज मेरी बुर पर राज कर रहा था तो मैं अब घुटनो और कोहनी के बल हुए थक चुकी थी लेकिन राज के लन्ड की गति कम ना हो इसलिए थकान को भूलते हुए चूतड फिर से हिलाने लगी और वो चोदता हुआ मस्त था ” बहन जी मैं भी दानापुर में ही रहता हूं और हम दोनो जी भरकर सेक्स कर सकते हैं
( मैं बोली ) लेकिन जिस दिन तेरे लन्ड से मन ऊब गया उसके बाद नो सेक्सुअल रिलेशन ” और वो चोदता हुआ शायद आखिरी दौर में था और फिर वो बोल पड़ा ” हिलाओ ना अपनी गांड़ ओह अब और नही मेरा झड़ा ” तो आठ दस धक्का लगाया फिर उसके लन्ड से वीर्य मेरी बुर में निकल पड़ा, मैं अपने जांघो को सटाए लन्ड को बुर में कुछ देर दबाए रखी फिर वो लन्ड बाहर किया और झट से अपना कपड़ा पहन फ्रेश होने के लिए निकल पड़ा तो मैं बर्थ पर नंगे ही लेटी हुई टॉवेल से बुर को पोंछ दी, वीर्य बुर से बाहर निकल रही थी तो शरीर में जबरदस्त थकान महसूस हो रही थी लेकिन राज के आते ही मैं नाईट गाऊन बदन पर डाली फिर वाशरूम जाकर बुर को पानी से साफ की, मुंह हाथ धोई फिर बर्थ पर आकर सो गई, सुबह पटना जंक्शन पर उतरी तो पति मुझे रिशिभ करने आए थे।

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