ट्रेन का सफर : सहयात्री बना हमसफर (भाग ३)

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फ्रेंड्स
दीपा अपने कूप में बाबू के बगल में लेट गई और चादर ओढ़कर इस इंतजार में थी की कब तीसरा यात्री अपने ऊपर के बर्थ पर जाए और मैं राज के साथ सहवास सुख का आनंद ले सकूं, इलाहाबाद जंक्शन से ट्रेन खुली और संयोगवश तीसरा यात्री एक शादीशुदा महिला थी जोकि ३६-३७ साल की होगी और मैं थोड़ी निश्चिंत थी की वो ऊपर के बर्थ पर जाकर लेटेगी फिर मैं संभोग सुख राज के साथ लूंगी, लेकिन फिलहाल तो उसका लन्ड मुरझा चुका था और उसका वीर्य मैं चख चुकी थी। मेरी हालत वैसी ही थी जैसी की मछली की हालत बिना पानी के होती है, भले ही रस झड़ा और मैं सुस्त पड़ गई लेकिन हकीकत में मेरा हमसफर खुद ही सुस्त था और बिना उसके लन्ड के टाईट हुए चुदाई तो संभव था नहीं, अकेली महिला अपने बैग को बर्थ के नीचे डालकर पर्स को ऊपर बर्थ रखी लेकिन मैं तो अपने बर्थ का पर्दा खींचकर आराम से लेटी हुई थी तभी राज कूप में आया और मेरे बर्थ के पर्दा को हटाते हुए बोला ” ये आपके लिए ” तो मेरा मनपसंद कोल्ड ड्रिंक्स मुझे हाथ में दिया फिर मैं पर्दा हटाई और उठकर बैठी तो वो महिला अभी फर्श पर ही खड़ी थी, फिर मुझे देख मुस्कुराई और ऊपर के बर्थ पर चली गई, मैं सामने बैठे राज को देख इशारे से पास बुलाई तो वो मेरे बर्थ पर आकर बैठा तो मैं इशारे से ही पूछी की उसका औजार कब तक टाईट हो जाएगा
( वो मेरे कंधे पर हाथ रख कान के पास फुसफुसाया ) आधे घंटे में बेबी तब तक रेस्ट करो ” फिर मैं भी बर्थ पर लेट गई, दिन की थकावट थी ही और मुझे कब नींद आ गई पता नही, मैं गहरी निंद्रा में थी और इलाहाबाद से ट्रेन रात के १२:५० बजे खुल गई और मैं बाबू को पकड़े सोई हुई थी, अचानक से मुझे एहसास हुआ कि मेरे नाईट गाऊन में किसी का हाथ घुसा हुआ है और नींद में होने की वजह से मैं घबड़ाकर उठते हुए बोल पड़ी ” कौन कौन है
( आंख खुली तो कूप के नाईट बल्ब में राज का चेहरा दिखा जोकि मेरे कमर के पास बैठा हुआ मेरे नाइटी में हाथ डाले चूतड सहला रहा था ) धीरे बोलो बहन जी ” मैं करवट लेटी थी और अब चित होकर बेशर्म की तरह नाईट गाऊन की डोरी खोलकर दो दिशा में कर दी तो राज मेरे बदन पर हाथ फेरता हुआ जांघो के बीच हाथ रखा और बुर को हथेली से रगड़ने लगा, मैं धीरे से बोली ” चलो उसी बर्थ पर
( वो बोला ) इसी पर रहो उसपर बाबू को सुला दो नही तो वो देख सकती है ” मैं समझ गई फिर उठकर नाईट गाऊन की डोरी बांध ली और राज के बर्थ पर बाबू को लिटाकर कंबल से घेर दी, अब हम दोनो ठीक उसी बर्थ पर थे जिसके ऊपर बर्थ पर एक महिला सो रही थी। राज मुझे लेटने को बोला तो मैं लेट गई और मैं बर्थ का आधे दूर तक का पर्दा खींचकर बाबू की ओर भी ध्यान रखी तो अपने चरित्र का भी, राज अपने पैजामा को खोला तो उसका लन्ड देख मैं थोड़ी असमंजस में पड़ गई, बगैर ओरल सेक्स के लन्ड इतनी जल्दी कैसे टाईट हो गया तो मैं टांग फैलाए लेटी हुई थी और वो मेरे ऊपर सवार होकर मेरे गाल चूमने लगा, मैं उसके गाल चूमते हुए धीमे स्वर में पूछी ” इतनी जल्दी खड़ा हो गया डियर
( वो मेरे ओंठ पर ओंठ रख चुम्बन दिया ) तेरी जैसी दीदी को देख खड़ा तो होगा ही ” फिर वो चूमता हुआ मेरे बूब्स को पुचकारने लगा तो मैं जल्दी से चुदवाने के मूड में थी और राज भी कमर की ओर तेजी से किस्स करता हुआ बढ़ा फिर वो मेरे जिस्म पर से उठ गया तो मैं जांघ फैलाई लेटी हुई थी और इस आसन में चुदाई मुझे तो मजा आता है, वो बिना देर किए मेरी बुर को किस्स किया फिर लन्ड थामे जांघो के बीच बैठा तो मुझे लगा की बुर को कुछ तो प्रोटेक्शन चाहिए, कही साला पेट से कर दिया तो पति घर से लात मारकर भगा देगा और मैं इशारे से उसे रुकने को बोली फिर लेटे लेटे अपने पर्स को खोली तो एक गर्भनिरोधक दवाई मिली, जिसे उसको बढ़ाई और इशारे से बुर में घुसाने को बोली तो वो पहले उंगली से बुर को मापा फिर उस दवाई को उंगली की मदद से अंदर घुसाया, मैं धीमे स्वर में बोली ” जब बोलूंगी तब डालना ” तो राज मेरे ऊपर लेटकर चूची को पकड़ मुंह में लिया और वो दवाई तो बुर की गर्मी और काम क्रिया से ही जल्दी पिघलती, उसे छाती से लगाए दूध पिला रही थी तो बुर के अंदर की कोताहल चरम पर थी और मैं तो चुदाई के लिए तड़प रही थी, ज्योंहि मुझे महसूस हुआ की बुर के अंदर दवाई पिघल चुका है, मैं उसके कान के पास बोली ” चलो शुरू करो और आराम से देर तक टिकना
( वो चूची मुंह से निकाल दिया ) हां बेबी ” फिर वो उठकर मेरी जांघों के बीच बैठा तो मैं उंगली के मदद से बुर फैलाई, राज अपना लन्ड अंदर घुसाया और आराम से पूरा लन्ड मेरी बुर रानी हजम कर गई, मैं उसके धक्के से खुश थी लेकिन मेरे बदन पर लेटता तो चूतड उछाल उछाल कर चुदाई का आनंद लेती, राज जिस अंदाज में चोद रहा था उससे लग रहा था की ये लंबे समय से चुदाई का आनंद ले रहा है, मैं उंगली से इशारा कर उसे अपने जिस्म पर लेटने का आमंत्रण दी तो राज मेरे ऊपर लेटकर तेज धक्का बुर में देने लगा, ट्रेन की रफ्तार से अधिक लन्ड की गति से मेरी बुर का रस सूख सा गया और मैं उसके पीठ पर हाथ फेरते हुए चूतड उछालना शुरू की, अब मुझे परम आनंद की प्राप्ति हो रही थी लेकिन चाहत थी की कम से कम ७-८ मिनट इसी तरह चोदता रहे, क्या कहूं मैं तो बहुत बड़ी चुदक्कड हूं, साला दिन में दो लन्ड खाऊं तब भी शाम को भूख जगी रहती हैं, इसिको जवानी कहते हैं जनाव, मैं चूतड उछाल उछाल कर चुदी जा रही थी साथ ही दोनो बूब्स उसके बदन से रगड़ खा कर मुझे ओर्गास्म की ओर ले जा रहे थे, मैं अब चूतड को स्थिर की और बुर तो आग की भट्टी हो चुकी थी कसम से तंदूर रोटी आप सेंक सकते थे, मैं अब ” उहूं आह उह और तेज चोदता रह साले ” कहते हुए मस्त थी तो राज हांफने लगा, वैसे भी तीन मिनट की चुदाई वो कर चुका था तभी मैं कुछ बोलती उसके पहले ही वो मेरे बदन पर से उठा ” फ्रेश होकर आता हूं फिर डॉगी स्टाइल में ” अगले भाग का इंतज़ार कीजिए

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