पैतृक गांव में मस्ती – Dirty Sex Tales

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फ्रेंड्स,
दीपा मल्होत्रा अपने पति और बेटे के साथ अपने पैतृक गांव पहुंची तो दो दिन रहने के बाद मेरे पति ऑफिस ज्वाइन करने के लिए चले गए, मेरे डैड और मॉम भी वही थी तो संयोगवश ही ऐसे माहौल में रहने को मिलता था तो मै कुछ दिनों तक यहां रहने वाली थी, सीतापुर जिले के पास हम लोगों का पैतृक गांव है तो वहां मेरी बड़ी चाची और उनका परिवार रहता है, उनका बड़ा बेटा बाहर जॉब में है जोकि एक शादी में आकर चला गया तो छोटा लड़का फिलहाल सरकारी नौकरी के लिए प्रयासरत है, उसकी उम्र मुश्किल से २३-२४ साल होगी तो लम्बाई छह फीट के करीब साथ ही देहाती छोकरे के तरह हट्ठा – कट्ठा शरीर तो सांवला रंग साथ ही मोटे मोटे जांघ और बाहें तो वो मुझे काफी घुर रहा था और मैं उसकी मंशा समझ चुकी थी, शादीशुदा औरत के साथ उसकी क्या चाहत है! ये समझते हुए ही दो दिनों तक इंतजार की, पति के जाते ही मैं थोड़ी स्वतंत्र हो गई तो बता दूं कि यहां एक दो मंजिला मकान है जिसके निचले तल पर चाचा और चाची रहते हैं तो उपर की मंजिल खाली पड़ी रहती है हां उनका छोटा लड़का उस मंजिल पर रहता है तो फिलहाल उपर के मंजिल पर मैं अपने बेटे के साथ हूं तो दूसरे रूम में मॉम और डैड तो तीसरे रूम में चचेरा भाई विनय, पति को वो स्टेशन पर छोड़कर वापस आया फिर मेरे रूम आया तभी शाम के सात बजे थे और संयोगवश मैं अपने बाबू को छाती से लगाकर दूध पीला रही थी, अपने ब्लाऊज़ को थोड़ा ऊपर किए स्तन बाहर निकाल दूध पीला रही थी तो उसके रूम में घुसते ही मैं पल्लू से उसके चेहरे और स्तन को ढक ली तो विनय बोला ” दीदी ट्रेन टाइम पर ही थी
( मैं हंस दी ) हां तेरे जीजा जी से बात हुई ” फिर वो मेरे पलंग के किनारे में बैठा तो मैं अब बाबू को बेड पर लिटा फिर आराम से अपनी चूची पर ब्लाऊज़ को की ताकि वो क्षण भर के लिए मेरे स्तन देख सके, अब उसको देख पूछी ” विनय तुमसे एक बात पूछूं
( वो ) हां हां पूछिए दीदी
( मैं ) एक तो तुम मुझे दीदी मत बोलो और दूसरी बात ये है कि जब से मैं यहां आईं हूं मुझे क्यों ऐसा लग रहा है कि तुम मुझे बुरी नजर से देख रहे हो
( वो सर झुकाए बोला ) सॉरी दीपा लेकिन क्या करूं कभी कभार खूबसूरती पर नजर चली ही जाती है लेकिन ऐसा फिर नहीं होगा
( मैं उसके करीब खिसकी ) ओह आज पता चला कि मैं खूबसूरत हूं
( उसके बाहं से मेरी चूची सट रही थी तो मैं उसके जांघ पर हाथ रख दी ) बोलो विनय क्या मैं खूबसूरत हूं
( वो मेरी ओर देखा ) हां आप बेहद खूबसूरत हैं
( मैं उसके जांघ पर हाथ फेरते हुए चूची को उसकी बाहों से रगड़ने लगी ) तो तुमने कब मेरी खूबसूरती देखी विनय ” ये कहते हुए मैं अपने सीने पर से साड़ी की पल्लू नीचे कर दी तो वो बेचारा तिरछी निगाहों से मेरी बूब्स देखने लगा ” क्या फट्टू की तरह देख रहे हो ” और उसके हाथ पकड़ मैं अपने बूब्स पर रख दी, विनय हक्का बक्का रह गया तो उसने हाथ बूब्स पर से हटाया लेकिन मैं उसके हाथ पकड़ फिर से अपनी चूची पर रख दी तो वो धीरे धीरे दबाने लगा। दीपा साड़ी, पेटीकोट और ब्लाऊज़ में थी तो मॉम और डैड पड़ोस में घूमने गए थे और वो चूची पकड़ जोर जोर से दबाने लगा तो मैं उसके पैजामा के ऊपर से ही लौड़ा पकड़ दबाई ” उह दीपा तुम वाकई सेक्सी हो ” और इतने में उसने मुझे बेड पर लिटाया फिर मेरे ऊपर सवार होकर चूमने लगा तो ब्लाऊज़ से चूचियां निकलने को बेताब थी साथ ही उसके चुम्बन से मेरा मन छटपटाने लगा तो मैं विनय के पीठ को सहलाने लगी, अब विनय मेरे रसीले ओंठ पर ओंठ रख चुम्बन देने लगा तो मैं उसके मुंह में ही अपना ओंठ घुसाई फिर वो ओंठ चूसने लगा तो उसकी चौड़ी छाती से मेरे बूब्स दबे जा रहे थे तो विनय के सामने नंगी होकर सेक्स करने का मन था, फिर से भाई बहन का रिश्ता शर्मशार होने वाला था तो विनय मेरे ओंठ चूसकर उसे छोड़ा फिर मेरे ऊपर सवार हुए ही गरदन चूमने लगा तो अब मेरे ब्लाऊज पर से ही चूची को दबाने लगा तो मैं उसके गाल चूमने लगी। विनय मेरे जिस्म पर से हटा फिर झट से मेरे बदन को करवट किए ब्लाऊज़ की डोरी खोलने लगा तो मैं मुस्कुराते हुए बोली ” ब्लाऊज़ खोल रहा है यदि तेरे पापा या मेरी मॉम आ गई तो
( वो मेरे ब्लाऊज़ की डोरी खोलकर पीठ सहलाने लगा ) ओह दीपा, तुम तो आग भी लगाई हो और फिर पानी भी डाल रही हो ” तभी मैं सीधी हुई फिर ब्लाऊज़ को बाहों से निकाल चूचियों को नग्न कर दी, मेरी चूची ब्रा मुक्त थी तो विनय मेरी बूब्स देखता हुआ ओंठो पर जीभ फेरने लगा ” चूस ले दूध भी निकलता है पी इसे ” मैं अपनी चूची पकड़ उसे आकर्षित करने लगी तो वो झुका फिर मुंह में चूची लेकर चूसने लगा साथ ही दूसरे स्तन को पकड़ दबाने लगा तो मेरी जिस्म में आग लग चुका था साथ ही सफ्ताह भर से छुट्टी में चूत खुजला रही थी और तभी विनय मेरी चूची चूसता हुआ मस्त हो रहा था तो दीपा अब उसके पैजामा के नाड़ा को खोलकर थोड़ा नीचे की फिर लंड बाहर कर सहलाने लगी, विनय मेरे सामने बैठा हुआ था तो उसके लंड पकड़ धीरे धीरे हिलाने लगी और यकीनन मेरे जीवन के सेक्स अध्याय में एक नया पार्टनर जोकि मुझसे उम्र में ४-५ साल छोटा था तो रिश्ते में भाई और बहन लेकिन जिस्म की आग और प्यार सब रिश्तों को ख़तम कर नए रिश्ते को जन्म देती है। दीपा अब बेझिझक विनय के लंड पकड़ आगे की ओर झुकी फिर उसके ७-८ इंच लंबे लंड को चूमने लगी, वो मेरे पीठ पर हाथ फेरता हुआ मेरे साड़ी और पेटीकोट को कमर तक करने लगा तो दीपा अब कामुक हुए अपने ओंठ लंड पर रख चुम्बन देने लगी, मेरे सीने से लटकते चूची को पकड़ दबाने लगा तो मेरे साड़ी और पेटीकोट कमर तक कर नग्न चूतड़ को सहला रहा था ” उह ओह दीपा तू सही में खूबसूरत है, मादक जवानी आह लंड पर ओंठ का प्यार ” और मैं तो उसके लंड पर चुम्बन देते हुए जिस्मानी प्यार के परम आनन्द को लेने लगी…. to be continued.

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