सहेली के पति : मेरे गुलाम

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फ्रेंड्स,
दीपा किसी खुली किताब की तरह अपने जीवन के हर आयाम को दर्शाते थी तो उम्र २८ साल लेकिन अब तक ना तो कोई बच्चा और ना कोई अतरिक्त जिम्मेवारी तो मेरे बदन का रस मेरे भाई राहुल, मेरे पति नमन, उनके सीनियर गुरदीप, डॉक्टर रवि साथ ही प्लेबॉय जेम्स ने अब तक जमकर पी है तो मेरी काम इच्छा कभी भी पूरी नहीं होती यहां तक की भाई और उसका दोस्त इक़बाल ने एक साथ मुझे सभोग सूख दिया था, ये वाकया दशहरा के आसपास की है जब मैं अंबाला से अपने मायके कानपुर आईं लेकिन मेरे पति नमन मुझे छोड़कर अपने घर इटावा चले गए और यहां मॉम की वहीं फरमाइश ” क्या दीपा, तेरी शादी के छह साल हो गए लेकिन अब तक कोई खुश खबरी नहीं
( मॉम ) अगले दशहरा आऊंगी तो अपने नवासी का मुंह देखना ” तो दशहरा का तीसरा दिन और मैं अपनी सहेली शिखा से मिलने उसके घर गोविंदपुरी गई, उसकी शादी के ३-४ साल हुए थे और उनके पति कानपुर आर्म्स डिपो में ही अधिकारी थे, सोची की शिखा को बिना कॉल किए उससे मिलने जाऊंगी फिर दिन भर उसके साथ गप्पें मारूंगी तो राहुल भी कुछ काम में व्यस्त था, सो घर से निकल ऑटो स्टैंड गई फिर ऑटो रिक्शा लेकर उसके घर निकल पड़ी, दीपा ने ब्राउन रंग की लेगिंग्स साथ ही बिन बाहों वाली कुर्ती पहन रखी थी तो उसके घर पहुंचकर मेन गेट के अंदर घुसी और फिर डोर बेल बजाने लगी, कुछ देर बाद दरवाजा खुला तो सामने शिखा के पति मयंक खड़े थे और मुझे देख बोले ” अंदर आइए
( मैं अंदर घुसी लेकिन पूर्ण शांति देख थोड़ी चिंतित हो गई ) शिखा नहीं है क्या
( मयंक मुस्कुराए ) बैठिए साली जी, वो मार्केट से आती ही होगी ” तो मैं सोफ़ा पर बैठ पर्स को सामने टेबल पर रखी और उसके पति मयंक किचन की ओर गए फिर एक ग्लास पानी लाकर मुझे दिए, उनसे पहले भी एक दो बार मुलाकात हो चुकी थी तो वो काफी स्मार्ट और हैंडसम पर्सनलिटी के थे और मेरे सामने बैठ वो पूछे ” तो कब आना हुआ
( दीपा ) जी परसों ही आई हूं
( मयंक ) तो अब तक आप दोनों का फैमिली प्लानिंग चल रहा है ” मैं झेंप गई फिर शर्म के मारे चेहरा को झुका ली, मुझे मयंक की बातों पर भरोसा नहीं हो रहा था कि शिखा मार्केट से आने पर है और उसकी नीयत में खोट झलक रहा था आखिर दीपा भी सेक्सी, खूबसूरत और जवान लड़की/औरत है फिर वो बोले ” जब तक आपकी दोस्त नहीं आ जाती तब तक क्या कॉफी लेंगी या ड्रिंक्स
( मैं सकपका गई ) कॉफी तो समझी लेकिन आप ड्रिंक्स की बात क्यों किए
( मयंक हंसने लगा ) अरे आपके पति आर्मी में हैं तो लगा कि आप भी कभी कभार ड्रिक्स लेती होंगी ” मैं चुप रहना बेहतर समझी लेकिन मयंक के मन में कुछ चल रहा था और वो उठा फिर अपने रूम की ओर गया तो देखी की वो एक व्हिस्की की बोतल लिए रेफ्रिजरेटर की ओर जा रहा है, जरूर साले कि नियत में खोट है तो मैं उठते हुए बोली ” जीजू मैं चलती हूं, पता नहीं शिखा कब आएगी
( वो व्हिस्की की बोतल साथ ही कोल्ड ड्रिंक्स की बोतल लाकर टेबल पर रखे ) रुकिए जरा आपकी दोस्त से पूछूं की कितने देर में घर आएगी ” फिर वो अपना मोबाइल लिए शिखा से बात करने लगा और उसकी बात से समझ पाई की आधे घंटे में ही वो घर आ पाएगी, फिर मयंक सामने वाले सोफ़ा पर बैठ मेरे सामने ही ड्रिंक्स बनाने लगे और मैं थोड़ी सहमी हुई थी ” क्या एक छोटा पैक बनाऊं
( मैं सहमते हुए बोली ) नहीं, मुझे पसंद नहीं ” लेकिन मयंक मेरे सामने ही बैठकर ड्रिंक्स लेने लगा साथ ही मुझे बेशरम की तरह घुर रहा था और मैं गुस्से में आकर उठी फिर दरवाजे की ओर गई, झुककर सैंडल पहन रही थी कि मयंक पीछे से आकर मुझे दबोच लिया ” अरे साली जी आप तो बुरा मान गई
( मैं अपने कोहनी से उन्हें पीछे की ओर धक्का दी ) ये क्या बदतमीजी है, आप तो बहुत ही बेशरम हो ” लेकिन उनके मोटे बाहों कि गिरफ्त से मैं निकल नहीं पाई और वो मुझे कसकर पकड़े मेरे गर्दन को चूमने लगे साथ ही मुझे अपने नियंत्रण में करने के लिए बूब्स पकड़ दबाने लगा तो मेरा विरोध ढीला पड़ने लगा, आखिर एक स्मार्ट मर्द के ओंठ का प्यार मिल रहा था तो मैं बोली ” जीजू चलो तुम जीते और मैं हार गई लेकिन पहले मुझे आराम से बैठने तो दो ” और मैं दरवाजे के पास से हटकर उसके सामने हो गई और बाहों के घेरें में लिए चेहरा चूमने लगी तो मयंक मेरी चूतड़ को सहलाने लगा और दोनों खड़े खड़े सेक्स की दुनिया में खो गए, मुझे अपनी सहेली से मिलने का प्लान महंगा पड़ा तो मयंक मेरे रसीले ओंठ पर ओंठ रख चुम्बन देने लगा और उसकी आगोश में समाए मैं उसकी छाती से अपनी बूब्स रगड़ने लगी साथ ही पल भर में ही मेरा लम्बा सा जीभ मयंक के मुंह में था तो वो मेरे जीभ चूसने लगा साथ ही मेरे लेगिंग्स को कमर से नीचे खड़का रहा था तो मैं अपने आपको काबू में रख नहीं पाई और उसके शॉर्ट्स को कमर से नीचे करने लगी, एक ओर मेरी जीभ चूसने में मस्त था तो मेरी लेगिंग्स पैर में आ फंसी थी साथ ही उसके शॉर्ट्स उतारते ही मोटा लंबा लंड मेरी हाथ में था, उसको सहलाते हुए जीभ चुसवा रही थी तो मेरे नग्न चूतड़ पर मयंक हाथ फेरने लगा और मेरी झिझक ख़तम हुई तो जीभ बाहर निकाल ली और दोनों का निचला हिस्सा नंगा था और मैं अब खुद ही अपनी कुर्ती उतार कर ब्रा भी खोल दी फिर दोनों नग्न अवस्था में ही सोफ़ा पर बैठ गए और मैं शरमाने लगी ” जीजू जो करना है जल्दी कीजिए कहीं मेरी दोस्त ना आ जाए लेकिन वो इशारे से मुझे बताए की शिखा अपने मायके गई है, अब तो दिन भर ये साला मुझे चोदेगा तो मेरी जैसी चुदक्क़ड चुदवाने से पीछे नहीं हटने वाली…. to be continued.

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