Aapki Meena – Dirty Sex Tales

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हैल्लो फ्रेंड्स

आपकी मीना हाज़िर है एक नई सेक्स कहानी के साथ.

मेरे बारे मैं तो आप सभी लोग जानते ही है..

जो लोग पहली बार मेरी कहानी पढ़ रहे है उनको अपना परिचय दे देती हूँ..

मेरा नाम मिनाक्षी है, राजस्थान कि रहने वाली हूँ, शादी शुदा हूँ और मेरे पति अब इस दुनिया मैं नहीं है तो मैं विधवा हो चुकी हूँ, मेरे पति से मुझे एक बच्चा भी है जो 10 साल का है, मेरी उम्र अब 34 साल कि है लेकिन मैं 34 साल कि लगती नहीं हूँ.. मैंने पहली बार अपने पति के साथ ही सेक्स किया था और उन्होंने ही मेरी सील तोड़ी थी..

मेरा रंग ना ज्यादा गौरा है और ना काला, मेरी हाइट लगभग 5.5 फ़ीट है, शरीर पतला दुबला है और मेरे बूब्स का साइज 30 है, कमर 28 और हिप्स 34 है.. शादी के बाद से ही मुझे चुदाई का चस्का लग गया था, पति के मरने के बाद मेरी चुत मेरे काबू में नहीं रही और मैंने अपने ससुर, भाई और जीजाजी से भी चुत मरवा ली.. दिखने में मैं एक दम देसी लड़की हूँ और मेरी चुत भी एक दम देसी है, मतलब चुत के लिप्स गहरे रंग के है जो झांटो से गिरे हुए है… मैं अपनी झांटे कभी कबार ही शेव करती हूँ, क्यों कि मुझे चुत पर बाल रखना बहुत पसंद है..

तो ये था मेरा परिचय..

अब मैं कहानी पर आती हूँ………

नवरात्रा ख़तम हुए और मोहल्ले के सभी लोग पिकनिक मनाने जाने वाले थे, सभी मोहल्ले वासियों ने पैसे इकठ्ठा करके पिकनिक का प्लान बनाया और सभी बस में जाने वाले थे..

सुबह 4-5 बजे लगभग बस रवाना होने वाली थी..

मेरी मम्मी ने मेरी मौसी को भी आने को कहा और मौसी को रात में ही मेरे घर बुला लिया..

सुबह होते ही सभी लोग तैयारियां करने लगे और सभी चले गए..

मुझे उसी दिन स्कूल का कोई प्रोजेक्ट बनाना था इसलिए मैं उनके साथ नहीं गई, घर पर ही रुकी..

मैं भी सुबह जल्दी उठ गई, मेरे लिए नाश्ता बनाया, नहाई धोई, घर का काम किया, तब तक 11 बज चुके थे…

11 बजे मेरे पास मौसी के लड़के का कॉल आया..

मैंने फ़ोन उठाया

वो बोला – गुड मॉर्निंग मीना दीदी

मैं – गुड मॉर्निंग

भाई – मेरी मम्मी से बात करनी है, करवा दो ना..

मैं – कैसे करवाऊं? चली गई तेरी मम्मी तो..

भाई – आप कहाँ हो? उनके साथ नहीं हो क्या?

मैं – नहीं, मैं घर पर ही हूँ..

भाई – आप क्यों नहीं गए?

मैं – कुछ काम था स्कूल का, तो वो करना है..

भाई – ओर कौन है घर पे?

मैं – कोई नहीं है, सभी लोग गए है..

भाई – आप क्या कर रहे हो? अकेले..

मैं – कुछ नहीं, काम निपटा कर फ्री हुई हूँ..

भाई – सारा काम हो गया?

मैं – हाँ..

भाई – नहा भी लिए?

मैं – हाँ

भाई – अरे यार,

मैं – क्या हुआ?

भाई – मैं नहीं नहाया, आपके साथ नहा लेता मैं भी..

मैं – क्यों तेरे घर पानी नहीं है क्या??

भाई – पानी तो है, पर आप नहीं हो ना…

मैं – अच्छा, मैं क्या करुँगी तेरे नहाने में..

भाई – मुझे नहला देते, मैं आपको नहला देता, आपकी बॉडी पर साबुन मल देता ओर क्या.

मैं – अच्छा..

भाई – मैं आ जाऊं क्या आपके घर.. आप अकेले क्या करोगे, पूरा दिन बोर हो जाओगे..

मैं थोड़ा घबरा गई कि उसको आने को बोलू या नहीं.. ऐसे अकेली घर पे हूँ और वो आएगा, कही कोई देखेगा तो क्या सोचेगा..

फिर मैंने सोचा कोई देख भी लेगा तो क्या हो जाएगा.. भाई ही तो है.. और फिर मैंने उसको मेरे घर आने के लिए हाँ कर दी..

भाई – ठीक है, मैं थोड़ी देर मैं आता हूँ..

मैं – हाँ आ जा, लेकिन दिन 2 बजे मुझे कहीं जाना है, वापस 4-5 बजे तक आउंगी..

वो बोला – कोई बात नहीं, जा के आ जाना, मैं भी 2 बजे चला जाऊँगा..

मैंने कहा – ठीक है..

थोड़ी ही देर में वो मेरे घर आ गया…

मैंने उससे कहा – तु सच मैं आ गया, मैं तो डर रही थी तुझे यहां बुलाने से, यहां के लोग ख़राब है, बात का बतंगड़ बनाने में पीछे नहीं हटते है…

भाई – अरे मीना दीदी, क्या डरते हो आप भी..

मुझे कहीं ना कहीं अभी भी डर था, लेकिन अब क्या कर सकती थी. उसको वापस जाने को बोलने का मेरा मन भी नहीं था… इतना अच्छा मौका मैं कैसे जाने दू..

मैंने उसको खाने का पूछा तो उसने भी हाँ कर दी..

फिर हम दोनों ने खाना खाया.. फिर मैंने उससे कहा – चल ऊपर हॉल में टीवी देखते है..

और फिर हम ऊपर वाले हॉल मैं चले गए

वहां मैंने एक दरी बिछाई और हम दोनों उस पर लेट गए और टीवी देखने लगे..

मेरा फेवरट सीरियल आ रहा था तो मेरा ध्यान उसमे था..

वो बोला – क्या फ़र्ज़ी फ़र्ज़ी सीरियल देख रहे..

मैं – देखने दे, आधे घंटे का ही है..

फिर वो भी देखने लग गया..

कुछ ही मिनट मैं टीवी पर ब्रेक आ गया..

वो मेरी तरफ मुड़ा और मैं उसकी तरफ

उसने मेरी बाजुओं पर अपना हाथ रखा और सहलाने लगा.. मैंने उसका सिर पकड़ा और उसके होंठ को चूमने लग गई..

हम दोनों एक दूसरे को चूमते रहे और तभी वापस सीरियल स्टार्ट हो गया..

मैं सीधी होकर लेट गई और सीरियल देखने लग गई..

थोड़ी देर में वापस ब्रेक आया और उसने मेरे बूब्स पर हाथ रख दिया और उसको सहलाते सहलाते मेरे होंठों को चूमने लगा.. मैं भी उसका साथ देने लगी..

वापस सीरियल स्टार्ट हुआ और मैं सीरियल देखने लग गई.. और भाई सीरियल ख़त्म होने का इंतज़ार करने लगा..

फाइनली सीरियल ख़त्म हो गया..

मैंने टीवी ऑफ किया और वो मेरे ऊपर लेट गया और मुझे लिप किस्स करने लगा.. मुझे चूमते चूमते उसका लंड खड़ा हो गया जो मुझे अपनी चुत पर महसूस हो रहा था..

वो मेरे गालों, कन्धों, गर्दन और छाती पर चूमने लगा फिर मेरे बोबे पकड़ लिए और उनको दबा दबा कर मुझे लिपकिस करने लग गया..

मैंने कहा – रुक

भाई – क्या हुआ?

मैं – फर्श पर चुभ रहा है, अंदर रूम मैं चले, पलंग भी है वहां..

भाई – हाँ ठीक है..

हम दोनों उठे, मैंने दरी समेट कर रखी और मैंने उससे कहा कि एक बार दरवाजा चेक करके आ जाए कि अंदर से बंद है या नहीं..

वो बाहर दरवाजा देखने चला गया और मैं रूम में चली गई और मेरा पजामा खोल कर साइड में रख दिया..

भाई अंदर आया तब मैं टीशर्ट पहने हुए थी और नीचे पैंटी..

भाई मुझे देखने लगा…

मैंने कहा – खोल ना पैंट..

उसने भी अपनी पैंट खोल दी.. और मेरे पास आया..

मैं पलंग पर लेट गई और एक शोव्ल अपनी कमर तक ओढ़ लिया..

वो भी पलंग पर चढ़ गया और मेरी शॉल हटाने लगा, मुझे शर्म आ रही थी इसलिए मैंने उसको रोका और शॉल को थोड़ी ऊपर करके उसको शॉल के अंदर आने को कहा..

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उसने दम लगा कर शॉल मुझसे खींच ली.

अब मैं उसके सामने पैंटी मैं लेटी हुई थी..

उसने मेरी पैंटी पर हाथ फेरना शुरू किया और मेरी चुत को सहलाने लगा..

मैंने भी उसके अंडरवियर पर हाथ रख कर उसका लंड सहलाने लग गई..

उसने झट से अपनी अंडरवियर खोल दी और अपना लंड मेरे हाथ में थमा दिया…

मैंने उसका लंड सहलाना शुरू किया और देखते ही देखते उसका लंड तन कर कड़क हो गया..

फिर उसने मेरा टीशर्ट खोल दिया और मैंने अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी तो मेरे बूब्स उसके सामने नंगे हो गए..

वो मेरे ऊपर चढ़ गया और घुटनो के बल बैठ गया, मतलब उसके घुटने मेरे अगल बगल थे और वो मेरे ऊपर…

उसने मेरे बोबे दबाने शुरू कर दिए… वो कभी उनको जोर से मसलता, कभी मेरे निप्पल को निचोड़ देता तो कभी उनको खींच कर हलके से थप्पड़ मारता, इस सब से मैं बहुत ही उत्तेजित हो रही थी…

फिर उसने मेरी छाती पर अपना लंड रखकर मेरे बोबों के बीच दबा दिया और फिर लंड को बोबों के बीच रगड़ने लगा…

मैंने भी अपने बोबों से उसके लंड को कसने लगी..

मेरे बोबों पर उसके लंड का स्पर्श मुझे बहुत ही मदहोश कर रहा था.. और मैं आंखे बंद करके उसको महसूस कर रही थी… तभी उसने उसका लंड मेरे होंठों पर फेरना शुरू कर दिया..

उसके लंड कि महक से मेरी चुत पनिया गई…

मैंने गप्प से उसका लंड अपने मुँह में लिया.. और उसको चूसने लगी..

उसने मेरा सिर पकड़ा और अपना लंड मेरे मुँह में अंदर बाहर करने लगा..

उसका लंड इतना बड़ा था कि वो मेरे गले तक जा रहा था और उसके लंड से जो चिकना रस निकल रहा था उससे मुझे कई बार खासी आ जाती…

कुछ देर तक मैंने कुल्फी कि तरह उसका लंड खाया..

फिर वो नीचे कि तरफ उतरा और मेरी पैंटी खोल कर मुझे नंगी कर दी..

मैंने अपनी चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे इसलिए मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी.. मैं अपने हाथों से चुत को छुपा रही थी..

उसने मेरे हाथ हटा कर मेरी चुत पर अपना मुँह रख दिया और मेरी चुत को चूमने लगा..

मेरी चुत के हर कोने को उसने चूमा और मेरी जाँघों को भी सहला सहला कर चूमा…

फिर उसने मेरे चुत कि फांकों को अपनी उँगलियों से दूर करके अपनी जीभ से चुत के अंदर चाटने लगा.. जैसे ही उसकी जीभ मेरी चुत के अंदर टच हुई, मेरे पसीने छूटने लगे और मैं उत्तेजित होकर कांपने लगी..

मैंने उससे कहा

भाई, अब मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा है, अब चुदाई शुरू कर दे..

ये सुनते ही भाई ने मेरे पैर चौड़े किये और अपने लंड को पकड़ कर मेरी चुत पर रगड़ने लगा…

उसका लंड और मेरी चुत पूरी तरह से चिकने हो रहे थे.. तभी भाई ने मेरी चुत पर लंड रख कर चुत में एक झटका मारा.. और उसका लंड एक ही झटके में मेरी चुत में घुस गया..

वो मेरे ऊपर लेट गया और अपना लंड मेरी चुत के अंदर बाहर करके मुझे चोदने लग गया..

1 बज गए थे.. मैं घडी भी देख रही थी, क्यों कि 2 बजे मुझे जाना था….

वो मुझे चोदे जा रहा था और मैं भी टाँगे उठा उठा कर उससे चुदवा रही थी..

1.30 बज गए लेकिन भाई ने चोदना बंद नहीं किया..

मैं 1-2 बार झड़ भी चुकी थी लेकिन वो शॉट पर शॉट मारे जा रहा था..

मैंने कहा – भाई, हो गया?

भाई – नहीं दीदी, अभी तक तो नहीं.

मैं – बस कर ना, मुझे वापस तैयार भी होना है..

भाई – बस दीदी, मेरा निकलने दो..

मैं – तो जल्दी कर ना,..

भाई – मैं क्या करू मीना दीदी, आप इतने समय के बाद मिले हो, तो बाकि दिनों कि कसर भी तो निकालनी पड़ेगी..

मैं – अरे, तु कसर बाद में निकाल लेना, मुझे छोड़ अब..

भाई – अरे, ऐसे बीच मैं कैसे छोड़ दू..

मैं – तु क्या कोई दवाई खा के आया है चुदाई करने कि,? कबसे चोदे ही जा रहा है, अब तो मेरी चुत भी जलने लग गई है..

भाई – नहीं यार दीदी, दवाई तो नहीं खाई है, लेकिन मैं यही तो चाहता हूँ कि चोद चोद कर अपनी चाल ही बदल दूँ.

जब आप चलो तो लोगों को भी पता चल जाए कि आप चुद कर आए हो..

मैं – चुप कर, और प्लीज जल्दी कर, अब लेट हो रही हूँ.. सिर्फ 15 मिनट बचे है…

उसने अपनी चोदने कि स्पीड बढ़ा दी लेकिन उसने 2 बजे तक मुझे रगड़ रगड़ कर मेरी जान निकाल ली.. तब जाकर वो ठंडा हुआ, और उसके लंड से तेज गर्म लावा मेरी चुत कि गहराइयों में महसूस हुआ… और वो मेरे ऊपर ही चित्त होकर लेट गया..

मैंने उसको साइड किया और बाथरूम चली गई.. अपनी बॉडी को और चुत को पानी से साफ़ किया और सलवार सूट पहन लिया..

वो भी बाहर आ गया..

मुझसे बोला – मीना दीदी, आज तो आपने बहुत मजा दिया है, पहली बार आपको बिना कपड़ों के बिना किसी डर के चोदा.. असली चुदाई तो आज हुई है..

मैंने कहा – आज अकेले है इसलिए पॉसिबल हुआ..

वो बोला – अभी जाना जरुरी है क्या? नहीं जाओगे तो अपन और मजे ले सकते है..

मैं – नहीं यार, इम्पोर्टेन्ट काम है..

भाई – ठीक है.. फिर उसने मुझे हग किया, लिप किस्स किया और मुझे पलट दिया और मेरे बोबे दबाने लगा और बोला – मेरा मन तो नहीं कर रहा कि आपको जाने दू..

और फिर मेरी चुत और मेरे बोबे दोनों साथ मैं सहलाने लगा..

मेरा भी मूड बनने लगा तभी मैंने उसको रोक लिया..

बस कर अब, जाने दे..

फिर मैंने उससे कहा कि मैं 4 बजे तक वापस आ जाउंगी, घरवाले तो शायद रात को लेट आएँगे.. तो मैं तुझे कॉल करू तो तु आ जाना..

मैं तेरी मम्मी को और मेरी मम्मी को भी बता दूंगी कि मैं तुझे बुला रही हूँ.. और तभी मेरा फ़ोन बजा

ये मेरी मम्मी का फ़ोन था.. उन्होंने वही कहा जो हम अभी बात कर रहे थे..

वो बोले कि वो रात को लेट हो सकते है तो तु भाई को बुला लेना, अकेली मत रहना..

बस फिर क्या था… हम दोनों ही खुश हो गए..

फिर मैं रवाना हो गई और वो भी अपने घर चला गया..

मैं 4 बजे वापस आ गई और 4.30 बजे तक वो भी वापस मेरे घर आ गया…

उसके बाद हमने मेरे घर पर क्या क्या किया वो मैं आपको मेरी अगली कहानी मैं बताउंगी..

धन्यवाद्

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