Bhai ko diya chut ka sukh…

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हैल्लो फ्रेंड्स,

मेरी पिछली कहानियों में मैंने आपको अपनी ज़िंदगी कि घटनाओं से रूबरू करवाया था. अगर आप लोगों ने नहीं पढ़ी हो तो जरूर पढियेगा, उससे आपको पता चल पाएगा कि मुझे अपनी शारीरिक इच्छाओं कि पूर्ति के लिए क्या क्या करना पड़ा और कितने पापड बेलने पड़े..

जब जिस्म मैं आग लगी हो तो जिस्म रिश्ते नाते सब भूल जाता है और कुछ भी करने को तैयार हो जाता है, चाहे आप ये बात मानें या ना मानें लेकिन यही सच है..

यही मेरे साथ भी हुआ था जब मेरे पति कि मृत्यु हो गई और मुझे शारीरिक सुख मिलना बंद हो गया था तो मजबूरन मुझे अपने पिता समान ससुर से ही सम्बन्ध बनाने पड़े थे..

अब ये सही है या गलत ये तो मैं नहीं जानती हूँ, लेकिन इतना जरूर कहूँगी कि जिससे आपको ख़ुशी मिले वो काम करने मैं झिझकना नहीं चाहिए..

हाँ अगर मेरे ससुर जी मना कर देते कि वो ऐसा नहीं कर सकते या मैं गलत हूँ तो मैं उनके साथ जबरदस्ती नहीं कर सकती थी, लेकिन मेरे ससुर जी ने उनकी ख़ुशी देखी और मैंने मेरी.. जब दोनों ही खुश थे तो फिर मेरे नज़रिये में ये गलत नहीं होता है..

खैर.. मैं आपको ज्यादा बोर नहीं करती हूँ, मुझे पता है आपको मेरी आगे कि कहानी सुननी है कि मैं अपना ससुराल छोड़ कर पीहर आ गई तो फिर मेरी जिस्मानी भूख का क्या हुआ होगा..

पीहर आने के बाद मेरे सारे रास्ते बंद हो गए थे. घर में मम्मी, बेटे और भाई के साथ रहती थी और मम्मी तो पूरा टाइम मेरे साथ ही रहते थे. ना तो कोई अलग कमरा है मेरे लिए और ना बेड..

बिलकुल भी प्राइवेसी नहीं मिल पाती.. प्राइवेसी के नाम पर सिर्फ लेट बाथ ही थे जहां मैं अकेली जाती थी उसके अलावा तो मानो कैद सा महसूस होता है..

पीहर आए हुए मुझे 3 साल हो चुके थे, तब तक मैंने किसी से भी सम्बन्ध नहीं बनाया था..

शुरूआती दिनों मैं तो मेरी रातों कि नींद उड़ गई थी, चुत मैं ऐसी खुजली होती थी कि मन करता घर से भाग जाऊ और कॉल गर्ल बन जाऊं जहां पैसा भी मिलेगा और चुदाई भी..

लेकिन ये सभी ख़याली पुलाव थे..

जाँघों के बीच तकिया फसाकर उस पर अपनी चुत रगड़ कर मेरी रातें कट रही थी.. लेकिन वो भी डर डर कर कि कहीं मम्मी ना देख ले..

मैं तन्हाई से इतनी डरने लगी थी कि मैंने अपनी चुत को छूना भी बंद कर दिया, क्यों कि मुझे डर लगता था कि अगर छुआ तो चुत कि आग भड़क जाएगी और फिर चुदाई नहीं मिलेगी तो दिल टूट जाएगा..

उसके बाद मैंने अपने आप को समझाना और संभालना सीख लिया.. मैं ऐसा कोई काम नहीं करती थी जिससे मुझे सेक्स कि जरुरत महसूस हो..

सेक्स के बारे मैं सोचना भी कम कर दिया और अपने लिए एक जॉब ढूंढ ली और अपने आप को व्यस्त रखने लग गई…. मेरा यही रूटीन हो गया था…. और ऐसे ही 3 साल बीत गए.. मेरे पति को मरे हुए 5 साल हो चुके थे..

3 साल बाद सर्दी कि छुट्टियों में मेरी मौसी ने मुझे कुछ दिनों के लिए उनके घर पर बुला लिया, और मेरी मम्मी ने भी मुझे जाने के लिए अनुमति दे दी, वो बोले कि चली जा अभी छुट्टियां ही है तो तेरा भी मन लग जाएगा वहां..

मैं उनके घर चली गई और मेरा बेटा उसकी दादी के घर चला गया..

मौसी का घर मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं है, वहां वो अपने 3 बेटों के साथ और उनकी मम्मी यानी कि मेरी नानी के साथ रहती है.. मौसी के तीनो लड़के मुझसे छोटे ही है.. और उस समय मेरी उम्र करीब 28-29 साल थी…

रात को हम लोग खाना वाना खा कर सो गए.. मौसी के वहां एक ही रूम है तो हम सब उसी रूम में सोए..

मौसी के दो लड़के तो बेड पर सोए, और बाकि बचे हम, यानि मैं, मौसी, नानी और मौसी का तीसरा लड़का हम चारों नीचे फर्श पर बिस्तर लगा कर सोए.

मौसी का लड़का और मैं, हम दोनों बीच मैं सोए और हमारे बगल मैं एक तरफ नानी और एक तरफ मौसी…

मौसी का कमरा काफी ठंडा रहता है, हालाँकि उन सभी को तो आदत हो चुकी थी ठण्ड मैं सोने कि लेकिन मुझे तो बहुत ठण्ड लगती है और उस रात भी वही हुआ, करीबन दो बजे ठण्ड कि वजह से मेरी नींद खुल गई और ठण्ड को सहना मेरी बर्दाश्त से बाहर हो गया..

मैंने भाई को जगाया और कहा कि ओढ़ने के लिए एक्स्ट्रा रजाई या कम्बल है या नहीं? मुझे ठण्ड लग रही है..

मेरी आवाज सुनकर मौसी जाग गई, और पूछा – क्या हुआ मीना?

मैंने कहा – ठण्ड लग रही है.

तो मौसी बोली – रजाई तो नहीं है, एक काम कर तुम दोनों ( मैं और मौसी का लड़का ) अपनी रजाई को कंबाइन कर के ओढ़ लो..

मैंने वही किया, दोनों कि रजाई को कंबाइन कर ली और ओढ़ कर सो गए..

मौसी का लड़का मुझसे 6 साल छोटा है, उस समय 22-23 साल का था..

मैंने उस रात पेटीकोट और टीशर्ट पहना था, अधिकतर मैं रात को सोते समय यही पहनती हूँ, और ब्रा खोल देती हूँ, क्यों कि उसके हुक और स्ट्रिप चुभते है तो नींद नहीं आती..

सभी लोग सो चुके थे और मुझे भी नींद आ गई थी, फिर करीबन रात कि 3 बजे मुझे मेरे पेट पर टीशर्ट के ऊपर कोई हरकत महसूस हुई जिससे मेरी नींद खुल गई.. वो मेरा भाई का हाथ था, उसने नींद मैं अपना हाथ मेरे पेट पर रख दिया था..

मैंने भी वापस अपनी आँखे बंद कर ली लेकिन अब मुझे नींद नहीं आ रही थी, क्यों कि थोड़ी थोड़ी देर मैं उसका हाथ हिल रहा था जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.. इतने सालों के बाद किसी लड़के का हाथ मेरे शरीर से छू रहा था..

मेरे शरीर मैं पुरानी वाली मीना वापस जाग गई थी जो एक समय मैं चुदक्कड़ बन गई थी..

मैंने देखा कि वो नींद मैं है तो क्यों ना थोड़ा फायदा उठाया जाए,.. और मैंने धीरे से उसका हाथ उठाया और अपना टीशर्ट ऊपर करके उसका हाथ फिर से पेट पर रख दिया..

फिर धीरे धीरे उसके हाथ को ऊपर कि तरफ ले गई और फिर उसका हाथ मेरे स्तन तक पहुंच गया..

मेरे स्तन पर उसका हाथ लगते ही मेरे तन बदन मैं आग लग गई और मैंने अपना एक स्तन सहलाना शुरू कर दिया..

जब में पूरी तरह गर्म हो गई तो मैंने आव देखा ना ताव उसकी तरफ घूम कर उसका चेहरा पकड़ा और उसके होंठ चूमने लगी.. उसकी आँख खुल गई और वो चौंक गया, वो मुझे देखने लगा और उसने पाया कि उसका हाथ मेरे स्तन पर था…

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वो सारा सीन समझ गया और मेरे स्तन को सहलाना शुरू कर दिया

मैंने फिर से उसका चेहरा पकड़ कर उसके होंठ चूमने लग गई और चूमते चूमते एक हाथ उसके शॉर्ट्स पर रख कर लंड सहलाने लग गई, देखते ही देखते उसका लंड खड़ा हो गया….

वो मेरे होंठों को चूमे जा रहा था और साथ ही मेरे बोबे दबा रहा था…

फिर उसने मेरा पेटीकोट ऊपर किया और मेरी जांघें सहलाने लग गया..

मैं एक दम मदमस्त हो चुकी थी और मचल रही थी..

उसने अपना हाथ मेरी पैंटी पर फेरना शुरू किया.. मेरी गांड और जाँघों के बीच सहलाने लगा और फिर पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया..

अब वो मेरी चुत को सहला रहा था और मेरी झांटों से खेल रहा था..

मेरी चुत गीली हो चुकी थी…

उसने अपनी एक ऊँगली मेरी चुत मैं डाली और मैंने उसका हाथ पकड़ लिया, वो भी रुक गया..

फिर मैंने एक लम्बी सांस ली और उसका हाथ छोड़ दिया..

उसने उसकी ऊँगली को अंदर बाहर करना शुरू किया.. और मैंने अपनी आँखें बंद कर दी..

वो ऊँगली अंदर बाहर करके मेरी चुत के मजे ले रहा था..

फिर उसने दो उंगलियां अंदर डाल दी और अंदर बाहर करने लगा..

उस रात को मैं बहुत खुश हो गई थी, इतने सालों के बाद मेरी चुत कि सेवा जो हो रही थी..

फिर मैंने उसके शॉर्ट्स मैं हाथ डाल कर उसकी अंडरवियर मैं हाथ डाला और उसके लंड को पकड़ लिया, उसका लंड एक दम तन्नाया हुआ था और गर्म हो रहा था..

भाई के पास काफी मोटा और लम्बा लंड था लेकिन वो अभी भी वर्जिन था, क्यों कि उसकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी इसलिए उसे कोई चुत नहीं मिली थी चोदने को..

मैंने उसके लंड को हिलाना शुरू कर दिया..

मुझे उसका लंड अपनी चुत मैं लेना था पर डर रही थी कि किसी ने देख लिया तो मेरी इज्जत कि धज्जियां उड़ जाएगी..

उसके लंड को हिलाते हिलाते मेरा हाथ भी दर्द करने लगा…. फिर मैंने उसका लंड छोड़ दिया और अपना हाथ बाहर निकाल दिया..

फिर मैं उसकी तरफ पीठ करके सो गई..

उसने मेरा पेटीकोट ऊपर किया और अपना शॉर्ट्स भी घुटनो तक खोल दिया, अब हम दोनों अंडरवियर मैं थे…

उसने मेरी कमर से पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींचा और फिर मेरी गांड पर अपना लंड सेट करके हिलाने लग गया….

वो भी पुरे जोश मैं था..

उसने उसकी अंडरवियर से अपना लंड बाहर निकाल दिया और मेरी पैंटी पर रगड़ने लग गया..

फिर उसने मेरी पैंटी खोलने कि कोशिश कि, थोड़ी खोल भी दी थी लेकिन मैंने वापस पहन ली, क्यों कि मेरे दिमाग में यह था कि कहीं किसी को पता चल गया तो अच्छा नहीं होगा..

उसने कहा मुझे अंदर डालना है..

मैंने मना कर दिया..

तो वो गुस्सा होकर अपना शॉर्ट्स ऊपर कर लिया और पलट कर सो गया..

मैंने उसको 2-3 बार अपनी तरफ घुमाने कि कोशिश कि लेकिन वो नहीं घुमा..

फिर मैंने अपना टीशर्ट पूरा ऊपर कर दिया और पेटीकोट भी ऊपर कर दिया.. और फिर उसकी पीठ से चिपक गई

उसके शॉर्ट्स मैं हाथ डालकर लंड पकड़ा और मुठ मारने लग गई.. मेरा नंगे बोबे नंगी जाँघों से उसको मजा देने लग गई..

उससे लिपट कर मचल रही थी और उसके लंड को हिला रही थी जिससे वो बहुत उत्तेजित हो गया और कुछ ही देर मैं उसका माल निकल गया जिससे मेरी उंगलिया भी भीग गई..

फिर मैंने अपनी उंगलिया उसकी अंडरवियर से साफ़ कि और अपने कपडे ठीक किये और सो गई…

भाई कि आग को तो मैंने शांत कर दिया लेकिन इतने सालों के बाद मेरी चुत मैं जो आग जली थी उसको भी तो शांत करना था..

मेरे नानी सुबह 4 बजे उठ जाते है, तो 4 बजे के बाद कुछ हो पाना संभव नहीं था इसलिए मैं भी सो गई, और भाई भी सो गया..

6 बजे हम सब उठ गए, बेड पर सोने वाले अभी भी सो रहे थे…

मैं घर के बाहर नल लगा हुआ है वहां ब्रश कर रही थी..

तभी भाई भी आया.. कुछ देर तो उसने मुझसे नज़रें नहीं मिलाई..

फिर मैंने उससे पूछा – क्या हुआ?

वो बोला – कल रात को जो हुआ, वो अनजाने मैं नींद मैं हुआ?

मैंने कहा – नहीं.. मैं नींद मैं नहीं थी.. जान बूझकर किया..

फिर वो थोड़ा रिलैक्स हो गया..

यहां से हमारे रिश्ते ने एक नया मोड़ ले लिया और मैं अपने भाई कि गर्लफ्रेंड बन गई..

हालाँकि उसने मेरी चुदाई नहीं कि थी लेकिन ये तो सिर्फ पहली रात थी, अभी तो मैं 4 दिनों तक मौसी के वहां रुकी थी तो 3 रातें और बाकी है…

आगे तो आप लोग भी समझदार है..

हम रात होने का इंतज़ार करने लगे और वो समय भी आ गया जब उसका लंड मेरी चुत के अंदर झटके मार रहा था और मेरी चुत कि खुजली मिटा रहा था..

उस रात को किस तरह से उसने मेरी चुत मारी वो मैं आपको अगली कहानी मैं बताउंगी..

मुझे बुरा लग रहा था कि उस रात को मेरी चुदाई नहीं हुई, लेकिन यकीन के साथ कह सकती हूँ कि मुझसे ज्यादा बुरा उसे लग रहा है जो मेरी कहानी पढ़ रहा है.. वो खुद भी चाहता है कि मेरी चुदाई में कोई कमी ना हो..

खैर, आप लोग उदास ना हों, मेरी चुदाई अगले दिन हो गई थी,

कहानी पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद..

जल्द ही आउंगी मेरी कहानी के आगे के पार्ट के साथ..

Thank you

To be continued

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