Papa-Mummy ki Chudai Live dekhi

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हैल्लो दोस्तों,

ये बात तब कि है, जब मैं शादी के बाद अपने मायके कुछ दिनों के लिए अपने मम्मी पापा के पास रहने गई थी। जब मैं वहां पहुंची तो पता चला कि घर पर सिर्फ पापा और मम्मी ही है, मेरे भाई बहन नानी के घर चले गए थे। उस समय सभी के पास मोबाइल फ़ोन भी नहीं हुआ करते थे इसलिए उन्हें मैं वापस भी नहीं बुला सकती थी।

खैर..

जिस घर में हम लोग रहते थे वहाँ एक बड़ा कमरा और कमरे के बाहर एक बड़ा बरामदा था जिस पर छत नहीं थी। इसलिए हम सभी भाई बहन और मम्मी पापा एक ही कमरे में सोते थे।

मेरे पापा काफी शराब पीते थे और फिर नशे कि हालत में मम्मी से काफी झगड़ा और मार पीट करते थे। मम्मी को तो जैसे आदत हो गई थी मार सहने कि।

जिस दिन मैं ससुराल से मायके गई थी उस दिन भी रात को पापा नशे में धुत्त होकर आए थे। उनको कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनकी बेटी उनसे मिलने आई है, उनको सिर्फ पीने से मतलब था। हाँ, जब वो नशे में नहीं होते थे तब तो वो एक दम जिम्मेदार आदमी थे और हमको बहुत प्यार करते थे, लेकिन पीने के बाद तो जैसे कोई रावण कि आत्मा उनके शरीर में आ गई हो वैसा बर्ताव करते थे। हर छोटी छोटी बात पर मम्मी से लड़ाई करते और मम्मी थोड़ा भी अपना मुँह खोल ले तो मारपीट भी करते।

मेरी उम्र उस समय 21-22 साल होगी…..

पापा नशे में धुत्त होकर घर आए, और अपनी बाइक बरामदे में चढ़ा दी। फिर कमरे में आए और अपनी जेब से शराब का पव्वा निकाल कर पेग बना दिया और मम्मी को बोला खाना लगाने को।

मम्मी उन दोनों के लिए खाना ले आई और वो दोनों खाना खाने लगे। मैं पहले ही खाना खा चुकी थी।

पापा खाना खाते खाते ही शराब भी पी रहे थे और फिर मम्मी से किसी बात पर बहस करने लगे। तो मम्मी ने मुझसे कहा – मीना, तु सो जा। तेरे पापा तो ऐसे ही है, करते रहते है।

मैं भी वही पास में बिस्तर बिछा कर सो गई, और वो दोनों बहस कर रहे थे।

मम्मी ने पापा से कहा – आज तो मत करो कम से कम, आज भी पी कर आ गए, शादी के बाद पहली बार बेटी घर आई है, लेकिन आपसे दारु नहीं छूटती है।

पापा इस पर और आग बबूला हो गए और मम्मी को एक तमाचा झड़ दिया।

मैं उनकी बातें सुन रही थी, और मैंने अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया, क्यूँ कि हम भाई बहन ये सब बचपन से देखते आ रहे थे, और पापा से डर भी लगता था।

कुछ देर बाद दोनों ने खाना खा लिया और मम्मी ने दोनों के लिए बिस्तर लगा दिए, और दोनों सो गए। लेकिन पापा कि बड़बड़ अभी भी जारी थी।

उन्हें लग रहा था कि मैं सो चुकी हूँ, लेकिन मैं उनकी सारी बाते सुन रही थी और सोने का नाटक कर रही थी।

पापा ने पतला सा पजामा पहना हुआ था और मम्मी ने पेटीकोट ब्लाउज पहना हुआ था।

मैं मम्मी के पास थोड़ी दुरी पर सो रही थी और मेरा मुँह मम्मी कि तरफ और आँखे बंद थी। और मम्मी भी मेरी तरफ मुँह करके लेटे हुए थे और उनके पीछे पापा सो रहे थे जो कुछ ना कुछ बोले जा रहे थे।

मुझे तो पापा कि बड़बड़ से नींद ही नहीं आ रही थी इसलिए मैं आँखे खोलकर इधर उधर देखने लगी, लेकिन मम्मी कि आँखे भारी होने लग गई और कुछ ही देर में उनकी आँख लग गई।

जब पापा को पता चला कि मम्मी तो चुकी है और पापा ऐसे ही बोले जा रहे है, तो वो भी चुप हो गए और मम्मी कि तरफ करवट लेकर सो गए और उनका हाथ मम्मी कि कमर पर रख दिया।

कमरे में जीरो वाट का पीली रौशनी वाला बल्ब जल रहा था इसलिए ज्यादा अँधेरा नहीं था, और मुझे सब कुछ दिख रहा था।

पापा ने मम्मी कि कमर से हाथ को ऊपर कि ओर बढ़ाते हुए मम्मी के ब्लाउज पर रख दिया और ऊपर से ही उनका एक बोबा सहलाने लग गए। उन दिनों गर्मी का मौसम था इसलिए हम ओढ़कर भी नहीं सो रहे थे।

मम्मी ने एक दम उनका हाथ पकड़ लिया और बोले – क्या कर रहे हो? मीना सो रही है पास में।

पापा ने थोड़ा सा ऊपर उठकर देखा और बोले – सो रही है वो तो…, क्यूँ कि मैंने फिर से आँख बंद कर दी थी।

मम्मी फिर से आँख बंद करके सो गए और पापा उनका बोबा मसलने लग गए, और मैंने वापस आँख खोल दी और उनको देखने लग गई।

पापा ने ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा के हूक भी खोल दिए जिससे मम्मी के दोनों बोबे नंगे हो गए। और पापा दोनों बोबे बारी बारी मसल रहे थे, और निप्पल को मसल रहे थे। मम्मी कि आँखे बंद थी, लेकिन वो भी शायद बोबे दबवाने का मजा ले रही थी।

पापा का कमर से निचे वाला हिस्सा हिल रहा था, शायद वो मम्मी कि गांड पर अपना लण्ड रगड़ रहे थे, लेकिन मुझे पीछे का सीन नहीं दिख रहा था।

पापा ने मम्मी का पेटीकोट ऊपर किया, जिससे मुझे मम्मी कि पैंटी दिख गई। और पापा मम्मी कि जाँघों के बिच अपना हाथ फेरने लगे।

मम्मी भी पड़ी पड़ी मचलने लगी, शायद वो भूल चुकी थी कि उनके सामने में सो रही हूँ। आँख तक नहीं खोली मम्मी ने, या तो वो आँख इसलिए नहीं खोल रही थी, क्यूँ कि वो नहीं चाहती थी कि मुझसे उनकी नज़रे टकराए और उनको शर्मिंदा होना पड़े, और या फिर वो आँख बंद कर के मजे लूट रही थी, लेकिन जो भी हो, मुझे वो सब देखने में बहुत मजा आ रहा था, और डर भी लग रहा था।

पापा ने मम्मी कि पैंटी के अंदर हाथ घुसा दिया और चुत को सहलाने लगे। मैं मम्मी कि चुत को देखने कि कोशिश करने लगी कि किसी तरह उनकी चुत दिख जाए, पता नहीं क्यूँ? लेकिन मेरे अंदर भी वासना जागने लग गई।

मम्मी के बोबे तो में कई बार देख चुकी थी, उनको कपडे बदलते हुए या नहाते हुए। पापा ने दबा दबा कर ढीले कर दिए थे जो अब पेट कि ओर लटकते है। मम्मी कि उम्र भी उस समय 34-35 साल के आस पास होगी इसलिए दिखने में आम औरतों कि तरह थी। ज्यादा घूमना फिरना नहीं था इसलिए फिगर मेन्टेन करना तो बहुत दूर कि बात है। उनका काम था घर संभालना, पति को संभालना, बच्चों को संभालना और जब पति का मन करे पति के सामने नंगी हो जाना। इसलिए मम्मी एक साधारण औरत थी।

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मैं अब मम्मी कि पैंटी खुलने का इंतज़ार करने लगी। पापा पैंटी में हाथ डालकर मम्मी कि चुत सहला रहे थे और पीछे से शायद वो अब भी मम्मी कि गांड पर अपना लण्ड रगड़ रहे थे।

फिर पापा ने मम्मी कि पैंटी को नीचे खिसका कर घुटनो तक खिसका दी, मम्मी मेरे सामने आगे से बिलकुल नंगी हो चुकी थी, उनके बोबे तो नंगे थे ही, अब चुत भी मेरी आँखों के सामने थी जिसे देखकर मेरी चुत भी मचलने लग गई। जब कि मैं चुत कि ठीक से नहीं देख पा रही थी, क्यूँ कि जाँघों के बीच केवल उनकी झांटें ही नज़र आ रही थी।

फिर पापा ने मम्मी का ऊपर वाला पैर हल्का सा ऊपर उठा कर चुत कि फांको को खोला और उसमे ऊँगली करने लगे, तब जाकर मुझे मम्मी कि चुत दिखाई दी, पूरी तरह झांटों से घिरी हुई, और बिच का दाना गीला होकर चमक रहा था।

तभी पापा ने अपने दोनों हाथ पीछे ले लिए और अपना पजामा खोलने लग गए, मुझे तब पता चला जब उनका पजामा उनके घुटनो तक आ गया।

मेरी धड़कने काफी तेज हो गई, मुझे पता चल गया कि आज मेरी माँ चुदने वाली है, मैंने पहले कभी भी चुदाई नहीं देखी थी, मोबाइल और इंटरनेट तो इतने चलन में ही नहीं थे, और ना कभी किसी और कि चुदाई देखी।

आज पहली बार में किसी कि चुदाई देखने वाली थी, और वो भी अपने मम्मी-पापा कि, ये सोचकर ही में बहुत उत्तेजित होने लग गई थी।

तभी पापा ने मम्मी का पैर फिर से ऊपर उठाया और अपना लण्ड हाथ में पकड़ कर मम्मी कि चुत के ऊपर ले आए और चुत पर रगड़ने लगे।

पापा का लण्ड देखकर तो मैं इतना डर गई थी कि मेरी धड़कन तेज हो गई, कही में हार्ट अटैक से ही ना मर जाऊ। क्यूँ कि मैं सोच रही थी कि ये मम्मी कि चुत में डालेंगे तो मम्मी का क्या होगा। इतना बड़ा लण्ड, मेरी ज़िन्दगी में पहली बार देखा था।

पापा ने मम्मी कि चुत पर लण्ड को रगड़ा और फिर चुत के छेद पर टिका कर धीरे धीरे अंदर धकेलने लगे, और मम्मी भी अपनी गांड को पापा कि तरफ दबाने लगी और पापा के लण्ड को चुत में घुसने का रास्ता देने लगी। अगले ही पल पापा लण्ड गायब, मम्मी ने पूरा लण्ड अपनी चुत में ले लिया था।

मैं बढ़ी हुई धड़कनो के साथ ये सब देख रही थी, और कमाल कि बात ये थी कि मम्मी ने अभी तक भी अपनी आँखे नहीं खोली थी।

अब पापा ने धीरे धीरे अपने लण्ड को अंदर बाहर करके मम्मी को चोदना शुरू कर दिया। पापा का लण्ड मम्मी कि चुत में घुसता और बाहर निकलता मुझे साफ़ साफ़ दिख रहा था। और मैं भी चुदवाने के मूड में आ गई थी। मम्मी कि आँखे तो बंद थी, इसलिए मैंने मेरे पजामे का नाडा खोला और पजामे में हाथ डाल कर अपनी चुत को सहलाने लग गई। पापा का लण्ड अंदर बाहर होता देख मेरी चुत गीली हो गई थी।

अब पापा रुक गए और उन्होंने मम्मी को इस तरह से खींचा, जैसे वो मम्मी को सीधा लेटने को बोल रहे हो।

उनकी इस हरकत से मैंने एक दम से अपनी आँखे बंद कर दी और पजामे से हाथ बाहर निकाल दिया। मम्मी ने आँख खोल कर मेरी तरफ देखा तो मैं जैसी कि तैसी सोई हुई थी।

मम्मी भी पापा के कहने पर सीधी होकर लेट गई और पापा उनके बगल से उठकर मम्मी के ऊपर लेट गए, और फिर से मम्मी कि चुत में अपना लण्ड घुसा दिया।

कुछ ही देर बाद जब मैंने वापस आँख खोली तो देखा कि पापा मम्मी के ऊपर लेटकर उनकी चुत मार रहे थे।

दोनों का ध्यान चुदाई में था, मम्मी कि आँखे बंद थी और पापा का मुँह मम्मी कि तरफ था और लगातार झटके मार रहे थे।

मैंने फिर से अपनी पैंटी में हाथ डाल दिया और चुत के अंदर ऊँगली घुसा कर अंदर बाहर करने लग गई। मैं सोच रही थी कि पापा मम्मी को नहीं मुझे चोद रहे है। वो जैसे ही मम्मी कि चुत से लण्ड को बाहर निकालते मैं भी अपनी चुत से ऊँगली बाहर निकाल देती, और जब वो वापस अंदर डालते तो मैं भी अपनी ऊँगली ठीक उसी टाइम चुत के अंदर डालती, इससे मुझे बहुत उत्तेजना हो रही थी, और पूरी तरह से में कल्पना कर रही थी कि मेरी चुत ही चुद रही है।

कुछ ही देर में पापा ने मम्मी को जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया, और फिर एक दम रुक गए और मम्मी के ऊपर ही ढेर हो गए। शायद उन्होंने मम्मी कि चुत में अपना माल छोड़ दिया था।

मम्मी ने उन्हें हल्का सा धक्का देकर एक तरफ पटक दिया था, अपने कपडे ठीक करके सो गई।

मैंने भी दूसरी तरफ मुँह कर लिया और आँखे बंद कर दी।

अभी जो चुदाई मैंने देखी थी, वो सब मैं होने दिमाग में रिवाइंड करने लग गई और जोर जोर से अपनी चुत को उंगलियों से चोदने लग गई। कुछ ही देर में मैं भी झड़ गई, और मुझे भी नींद आ गई। मेरे पजामे का नाडा भी खुला ही रह गया जो मैंने सुबह उठने के बाद बाँधा…

सुबह जब मैं उठी, तब मम्मी पापा जाग चुके थे और अपने अपने काम कर रहे थे।

आज भी कभी सोचती हूँ मम्मी पापा कि चुदाई के बारे में, तो मैं उत्तेजित हो जाती हूँ… और उन्हें आज तक नहीं पता कि मैं उनकी चुदाई देख चुकी हूँ।

धन्यवाद

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