Sasur Ji Ne Fir Se Chod Diya

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हैल्लो दोस्तों

हाल ही में मेरी ननद कि डेथ हो गई.. मुझे सुबह सुबह मेरी सास ने कॉल करके ये जानकारी दी..

मैं मम्मी के साथ अपनी ननद के घर चली गई..

दोपहर तक उनका अंतिम संस्कार हो गया और सभी मेहमान भी चले गए..

मम्मी और मैं भी घर जाने के लिए तैयार थे… हम निकलने ही वाले थे कि मेरी सास ने मुझसे कहा कि मैं मम्मी के साथ घर ना जाऊ और अपने ससुराल जाऊ..

इसकी वजह सास ने ये बताई कि वो मेरी ननद के घर ही कुछ दिन रुकेगी… क्यों कि कुछ दिनों तक शोक मनाने मेहमान आएँगे… और घर पर यानि मेरे ससुराल में पापा यानि मेरे ससुर अकेले होंगे तो उनके खाने पीने का ध्यान रखना..

मेरी मम्मी घर के लिए रवाना हो गई और मैं शाम तक वहीँ रुकी..

शाम को मैं अपने ससुराल चली गई जो कि ननद के घर से ज्यादा दूर नहीं था.. कुछ 15-20 मिनट कि दुरी पर ही था..

ससुर जी दोपहर में ही अंतिम संस्कार के बाद घर आ गए थे… और अभी वो घर ही थे..

मैं घर आकर नहाई और फिर चाय बना कर ससुर जी को दी और मैंने भी पी…

और फिर मैं खाना बनाने लग गई…

खाना बनाने के बाद मैंने ससुर जी को उनके कमरे में खाना ले जाकर दिया और मैं अपने लिए खाना अपने रूम में ले जाकर खा लिया..

फिर मैंने बर्तन साफ़ किये रसोई कि सफाई कि और ससुर जी को हल्दी वाला दूध देने उनके रूम मैं गई…

जैसे ही दरवाजा खोला तो ससुर जी सामने ही पलंग पर बैठे थे और उनकी आँखे भीगी हुई थी..

मैंने पूछा – क्या हुआ पापा?

वो बोले – कुछ नहीं बेटा…

मैंने कहा – आप रो क्यों रहे हो?

वो बोले – मेरी बेटी मुझे छोड़ कर चली गई.. मेरे सामने पैदा हुई मेरे सामने बड़ी हुई और आज मुझे उसकी चिता देखनी पड़ी.. मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा था कि वो ऐसे बेवक़्त हमें छोड़ कर चली जाएगी..

मैंने दूध का गिलास टेबल पर रखा और उनके पास जाकर बैठ गई..

वो बोले – पहले मुझे मेरा बेटा छोड़ कर चला गया और आज मेरी बेटी… मैं अपने आप को बहुत ही बेबस महसूस कर रहा हूँ…

ये बोलते बोलते उनकी आवाज भारी हो गई और वो बिलख पड़े..

मैंने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा – पापा भगवान् ने जो किस्मत में लिखा है वो तो सभी को भुगतना ही है.. और एक ना एक दिन तो सभी को ये दुनिया और शरीर छोड़ कर तो जाना ही है.. आप अपने आप को सम्भालो..

ये कहते हुए मेरी आँख में भी आंसू आ गए…

मैं उठी और दूध का गिलास ससुर जी के हाथ में थमाया और कहा कि आप दूध पियो और आराम करो… और ज्यादा मत सोचो आपकी तबियत ख़राब ना हो जाए..

उन्होंने दूध का गिलास खाली किया और मुझे थमा दिया…

मैंने रसोई में वो गिलास रखा और अपने कमरे में सोने चली गई..

ससुर जी कि बातें अब भी मेरे कानों में गूंज रही थी और उनका रोता हुआ चेहरा अब भी मेरे आँखों के सामने आ रहा था.. इसलिए बहुत कोशिश के बाद भी मुझे नींद नहीं आ रही थी..

रात को करीब 2 बजे मैंने सोचा कि पापा सोए होंगे या नहीं…. इसलिए उनको ज़रा देख आती हूँ..

मैं अपने कमरे से निकल कर बरामदे से होते हुए उनके कमरे कि तरफ बढ़ी..

कमरे का दरवाजा अंदर कि तरफ से लॉक नहीं था तो मैंने जाते ही दरवाजे पर जोर लगाया और वो खुल गया..

पापा सामने ही लेटे हुए थे.. और नींद निकाल रहे थे..

उन्होंने नाड़े वाला कच्छा पहना हुआ था और बनियान पहनी थी… रजाई पलंग के एक कोने में पड़ी थी..

मैंने देखा कि वो आराम से सो रहे है.. कोई परेशानी नहीं है तो मैं वापस मुड़कर जाने लगी..

जैसे ही मैं मुड़ने लगी तभी अचानक मेरी नज़र पापा के कच्चे के नीचे वाले हिस्से पर पड़ी..

कच्छा जांघो कि जगह से हवा में उड़ रहा था जिससे उनका लंड दिखाई दे रहा था जो मुरझाया हुआ था..

उनका लंड देखकर मेरे मन के विचार बदल गए और मेरा पूरा ध्यान उनके लंड कि तरफ हो गया..

मैं वहीँ खड़ी होकर उनका लण्ड देखने लगी… और कुछ देर इंतज़ार करने के बाद मुझे यकीन हो गया कि पापा गहरी नींद मैं है.. तो मैं दबे पाँव उनके बगल में जाकर बैठ गई और उनके कच्चे के ऊपर से उनका लण्ड छूने कि कोशिश करने लगी… लेकिन मुझे पुरानी बातें याद आ गई कि किस तरह मेरी सास ने मेरे ससुर को मुझे चोदते हुए पकड़ लिया था.. तो फिर से मेरी हिम्मत नहीं हुई और में उठ कर अपने कमरे में चली गई…

अब मुझे नींद नहीं आ रही थी और पापा का कच्छे से झांकता हुआ लण्ड मेरी आँखों के सामने आ रहा था.. साड़ी तो मैं पहले ही खोल चुकी थी और अभी पेटीकोट ब्लाउज में थी…

मैंने अपने बदन को सहलाना शुरू कर दिया.. एक हाथ से मेरी छातियों को और एक हाथ से मेरे पेट को सहलाने लगी….

मेरा हाथ पेट से होता हुआ नीचे कि तरफ बढ़ा और पेटीकोट का नाडा खोल कर पैंटी में हाथ डाल दिया.. और हाथ सीधा मेरी भोदी पर चला गया..

भोदी को छूते ही में गरम होने लग गई और मेरी चुदास बढ़ने लग गई…

अब मुझे अपनी चुत चुदवाने कि तड़प होने लग गई… और घर में एक ही मर्द था, मेरा ससुर… लेकिन उनको कैसे बताऊ कि मुझे चुदाई करवानी है….

फिर मैंने मेरी पुरानी वाली तरकीब ही लगाई…

सबसे पहले तो उठकर दरवाजे तक गई और अंदर से चिटकनी खोल दी… और एक गिलास लेकर बेड पर रखा और मैं बेड पर लेट गई…

लेटते वक़्त मैंने ब्लाउज और ब्रा खोल कर रख दिए जिससे मेरे बोबे नंगे हो गए.. और पैंटी भी खोल कर रख दी..

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पेटीकोट को जाँघों से भी ऊपर तक चढ़ा दिया जिससे सिर्फ चुत ही ढंकी थी…

फिर मैंने वो गिलास उठाया और जोर से जमीन पर फेंका..

गिलास कि आवाज सुनकर पापा कि नींद खुल गई हुए और वो मेरे कमरे कि तरफ आए और दरवाजे को धक्का लगते ही दरवाजा खुल गया…

दरवाजा मेरे पैरो वाली दिशा कि तरफ था इसलिए दरवाजा खोलते ही उनकी नज़र मुझ पर पड़ी…

मैं आँखे बंद कर के लेटी हुई थी…

पापा ने मेरे पैरो को देखा और फिर अपनी नज़र ऊपर कि और दौड़ने लगे…

उनकी नज़र मेरे पेटीकोट पर आकर रुकी.. क्यों कि जहां वो खड़े थे वहां से उनको मेरी चुत कि झांटे दिख रही थी…

और उन्होंने मेरी छातियों पर भी नज़र डाल ली थी…

ये सब काफी होता है किसी भी मर्द को अपनी तरफ खींचने के लिए.. और चुत को देखकर तो कोई भी मर्द चाहेगा कि वो चुत उसे मिल जाए.. और फिर मेरे पापा तो पहले भी मेरी चुत चोद चुके थे…

वो मेरे पास आकर बैठे और मेरी चुत पर अपना हाथ रख दिया..

मैंने एक दम जागकर चौंकने का नाटक किया…

पापा आप?

पापा मेरी चुत को सहलाते हुए बोले – हाँ बेटा मैं, वो कुछ गिरने कि आवाज आई थी आपके कमरे से तो मैं देखने आया था.. पर आप ऐसे क्यों सो रहे हो? ( उनका मतलब मेरा नंगी होकर सोने से था )

आप क्या रोज ऐसे ही सोते हो? ( उनका हाथ मेरी चुत को सहला रहा था )

नहीं पापा, रोज ऐसे नहीं सोती, बस जब मन करता है तब सो जाती हूँ… ( मैंने पापा से कहा )

पापा – आपको कुछ चाहिए क्या?

ये पूछते हुए उन्होंने मेरे जवाब का भी इंतज़ार नहीं किया और मेरे निप्पल को अपने होंठों में दबाकर चूसने लगे…

मैं समझ गई थी कि मेरा काम हो गया…

मैंने उनका सर मेरी छाती पर दबा दिया और उनके बालों में अपनी उंगलिया फेरने लगी..

पापा मजे से मेरे दोनों निप्पल को बारी बारी चूस रहे थे और उनको दांतों से काट रहे थे…

कुछ देर बाद वो वहाँ से हटे और मुझसे बोले – बेटा मुझे माफ़ कर देना..

मैंने पूछा – क्यों पापा? क्या हुआ?

वो बोले – आपको मैं लम्बे समय से शारीरिक सुख नहीं दे पाया था, जबकि ये मेरी जिम्मेदारी थी कि मैं आपकी हर जरुरत पूरी करूँ..

मैंने कहा – पापा आप माफ़ी मत मांगिये.. जिसकी ये जिम्मेदारी थी वो तो कब से मुझे छोड़ कर जा चुके..

पापा – हाँ वो तो है, लेकिन मेरे बेटे के जाने के बाद आपकी जिम्मेदारी किसी को तो लेनी ही थी ना.. और आपने दूसरी शादी भी नहीं कि.. तो मेरा भी फ़र्ज़ बनता है कि मैं आपकी सभी जरूरतों को पूरी करूँ..

मैंने सिर्फ हाँ में सर हिला दिया….

पापा ने मेरा पेटीकोट खींच कर निकाल दिया और मुझे नंगी कर दी… और मेरी चुत को सहलाने लगे..

पापा का लण्ड भी अब तक तो खड़ा हो गया था..

मैंने उनका लण्ड पकड़ लिया और उस पर अपना हाथ फेरने लगी… तो पापा ने अपना कच्छा उतार दिया और बनियान भी उतार दिया…

अब हम दोनों ही नंगे हो गए थे…

पापा बोले – बेटा, आप नहीं जानते आपके जाने के बाद मैंने आपको कितना याद किया.. आपकी इस जवान चुत को देखने के लिए भी तरस गया था मैं…

मैंने कहा – पापा, मैंने भी आपको बहुत याद किया था, कई महीनो पहले लास्ट टाइम मैंने आपके साथ ही चुदाई कि थी उसके बाद तो मैं अभी तक प्यासी ही हूँ….

पापा ने मेरी चुत पर अपने होंठ रख दिए और मेरी चुत के होंठों को चूमने लगे और चाटने लगे…

मैंने अपने हाथों से अपने बोबे दबाने शुरू कर दिए…

फिर पापा मेरे ऊपर चढ़ गए और मेरी चुत में अपना लण्ड डाल कर मेरे ऊपर लेट गए और फिर जोर से धक्का मारा और अपना लण्ड मेरी चुत कि गहराई तक पेल दिया…

मैंने उनको कस कर पकड़ लिया और मेरे मुँह से एक आह निकल कर रह गई…

उन्होंने मेरे कंधे पकड़ लिए और मेरी चुत में झटके मारने लगे…

बहुत देर तक उन्होंने मेरी चुत कि चुदाई कि…

मैंने उन्हें बता दिया कि वो मेरे अंदर ना झड़े…

इसलिए उन्होंने अपना लण्ड बाहर निकाल दिया..

फिर मैंने उनका लण्ड पकड़ कर मुठ मारना शुरू कर दिया और फिर अपने मुँह में ले लिया…

मुँह में लेकर लण्ड को चूसने लगी… तभी उन्होंने मेरा सर पकड़ा और जोर जोर से मेरे मुँह में लण्ड को अंदर बाहर करने लगे और मेरे मुँह में झड़ गए..

उनके लण्ड से बहुत सारा माल निकला जिससे मेरा मुँह पूरा भर गया..

मैंने सारा माल गले में उतार लिया..

फिर हम दोनों सो गए..

अगले दिन हम उठे तब हम दोनों नंगे ही थे..

तब पापा ने मुझे सुबह फिर से चोद दिया..

मेरी सास 4 दिनों तक वहीँ रुकी थी इसलिए हमे 4 दिनों तक चुदाई करने का मौका मिल गया…

उन चार दिनों में पापा ने मुझे 15-20 बार चोदा… और चोद चोद कर मेरी चुत को सूजा दिया…

5वे दिन मम्मी आ गए.. और फिर मैं अपने घर आ गई…

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