छोटी मौसी स्नेहा – Dirty Sex Tales

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स्नेहा के साथ रात को सम्भोग सुख का आनंद लिया था! वो अगले सुबह मेरे साथ बालकोनी मे चाय पिते हुए मुझसे बाते कर रही थी और मौसी की बड़ी-2 चुचि ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब थी, उसके करीब कुर्सी को खिंसकाया और मौसी के ब्लाउज पर हाथ लगा दिया, उनके गोलाई को दबाता हुआ बोला…….. “मौसी चलो कहि घुमने उसी बहाने उधर मजा करेंग़े

(स्नेहा) ठीक है मै नहा धोकर तैयार होती हु. ” दोनो स्नान ध्यान करने चले गये और फ़िर 10:30 बजे के आसपास नाश्ता करके घुमने के लिये तैयार होने लगे ! मौसी आसमानी रंग़ कि साड़ी, बिन बाहो वाली ब्लाउज पहनकर सुंदर लग रही थी ! वो अपने 9 साल के बेटे को कुच्ह समझाकर फ़िर अपनी बड़ी बहन से बात करके मेरे साथ निकल पड़ी! दोनो बाइक पर सवार होकर चल पड़े, मौसी मुझसे चिपककर बैठी थी और अपने उभार को मेरे पिठ से दबाती भी थी, मै तो उसको लेकर सुनसान इलाके के लिये निकल पड़ा और स्नेहा बोली…… “राहुल हमदोनो किधर जा रहे है

(राहुल) खुद देख लेना मौसी बहुत मस्त जगह है मौज मस्ती करने के लिये

(स्नेहा) राहुल अब मुझे मौसी मत बोलाकर, स्नेहा बोल ना

(राहुल) ठिक है लेकिन सबके सामने भी

(स्नेहा) तुमहारा दिमाग तो ठीक है. ”

मै और स्नेहा सुनसान इलाके मे पहुंच चुके थे और नदी के तट के समीप दोनो घांस पर बैठ्कर बात करने लगे, और फ़िर मेरा हाथ मौसी के साड़ी पर था, उनके सिने से साड़ी को हटाकर दोनो हाथ उनके दोनो स्तन पर लगा दिये और जोर-2 से मौसी की चुचि को मसलने लगे ! वो मेरे करीब थी और मेरे ओंठ को चुमने लगी, फ़िर मै अपना लम्बा सा जिभ उसके मुह्न मे ड़ाल दिया और मौसी मेरे जिभ को चुसते हुए मस्त थी ! मै मौसी के ब्लाउज का हूक जोकि उसके आगे की ओर हि था को खोलने लगा और उनके दोनो मांसल चुचक ब्लाउज से बाहर और ब्रा मे कैद थे ! वो जिभ चुस रही थी तो मै उसके ब्रा को भी खोल दिया और उनके मस्त चुचि को दबाने लगा, पल भर बाद वो जिभ मुह्न से निकालकर घास पर लेट गयी और उनके नग्न छाती पर औंध कर मै एक चुचि को मुह्न मे भर लिया और चुभलाते हुए दुसरे स्तन को दबाने लगा, मेरा लंड़ जिंस मे खड़ा हो रहा था ! दोनो चुचि को पिकर उनके पेट से नाभि तक को चुमने लगा और वो घास पर लेट्कर मस्त थी ! स्नेहा अर्ध नग्न अवस्था मे नदी के किनारे लेटी हुई थी, अब मै उनके साड़ी और साया को कमर कि ओर करने लगा, मौसी की मोटी-2 जङ्हा को फ़लकाकर बुर को सहलाने लगा और उनके दोनो जङ्हा को जमिन से थोड़ा उपर करके अपना सर झुकाया, मौसी की चुत्तर हवा मे थी और मै उसके बुर पर चुम्बन देने लगा, मौसी उंग़ली कि मदद से बुर को फ़लकाने लगी तो मै उसके चुत मे अपना जिभ पेलकर चुत चाट्ने लगा ! स्नेहा सिसकने लगी और मै उसके बुर को अपने जिभ से चोदने लगा, पल भर बाद बुर चुसकर उठा और पास मे खड़े-2 मुतने लगा !

स्नेहा मौसी अपने ब्लाउज को पहनकर चुचि को ढक ली और मै उनके बगल मे बैठ्कर अपने जिंस को खोलंने लगा तो मौसी मेरे गाल को चुम रही थी ! वो मेरे जिंस के खुलते ही मेरा मुसललंड़ थाम ली और बोली….. “राहुल तेरा लंड़ तो मौसा से भि लम्बा और मोटा है, आज इसको चुसती हु

(राहुल) जरुर स्नेहा आज मेरे लंड़ का विर्य भी पी लो. ” मै घास पर बैठा था और मौसी अपने सर को झुकाकर लंद के सुपाड़ा को चुमने लगी, सुपाड़ा को अपने ओंठो पर रगड़ते हुए उसे अपने ओंठो के बिच मे ले ली और चुसने लगी, फ़िर मौसी मेरे पुरे लंड़ को अपने मुह्न मे भर ली और चुसने लगी ! सही मे मौसी लंड़ चुसने मे महारथ हासिल कि हुई थी, वो अपने मुह्न का झट्का मेरे लंड़ पर देने लगी और मै उसके सिने से झुलते चुचि को मसलने लगा! मौसी लंड़ को चुस-2 कर लाल कर चुकी थी, अब वो मुह्न से लंड़ निकाल कर अपने लम्बे जिभ से चाट रही थी ! मै मौसी को चोदने के लिये आतुर था और वो मेरे लंड़ पर जिभ फ़ेर रही थी, अब वो दुबारा मेरे मुसल लंड़ को मुह्न मे भरी और मुखमैथुन करने लगी, मेरा लंड़ पुरी तरह से गरम हो चुका था और फ़िर दोनो एक दुसरे से अलग हुए !

मौसी स्नेहा चुदने के लिये आतुर थी और मै उसको घास पर ही कुत्तिया बना ड़ाला, उसके भारी भरकम चुत्तर के सामने बैठ्कर मै उनके बुर को सहलाया और फ़िर एक साथ दो उंग़ली बुर मे घुसाकर बुर कुरेदने लगा ! वो अपने कोहनी और घुट्ने के बल घास पर थी तो मै बुर कुरेदता रहा और उनके चुत्तर पर थप्पड़ भी लगाने लगा, वो सिसकने लगी और बुर से पानी फ़ेंकने लगा ! अब मै बुर को कुत्ते की तरह चाटता हुआ रस का स्वाद ले रहा था, पल भर बाद उसके चुत मे मुसल लंड़ ड़ालकर चुदाई करने लगा तो स्नेहा अपने नितम्ब को हिला ड़ुलाकर चुदाई का मजा लेने लगी ! उनकि बुर लोचदार थी तो गहराई का अंदाज़ मेरा लंड़ नही लगा पा रहा था, बुर के दिवार पर लंड़ का प्रहार करता हुआ मस्त था ! वो मुस्कुराते हुए बोली…… ” बिन कोंड़म की चुदाई कर रहे हो अगर पेट से हो गयी तो

(राहुल) अबे साली चुपचाप चुद ना बाद मे देखा जायेगा. ” और स्नेहा की बुर मे आग लग चुकी थी तो मै लंड़ बाहर निकाल कर थोड़ी देर के लिये आराम किया !

स्नेहा अपने कमर तक साया और साड़ी किये ज़मीन पर बैठी थी और पल भर बाद मौसी को घांस पर सुला दिया, वो अपने दोनो पैर दो दिशा मे किये घांस पर थी और मै मौसी के बुर पर अपना लंड़ रखा और लंड़ को अंदर पेलने लगा ! 2/3 लंड़ उसकी बुर मे था और मै उसके कमर को थामे जोर का झट्का बुर मे दिया, मेरा पुरा लंड़ उसकी बुर मे था और वो चिंख पड़ी….. “अबे हरामी धीरे से चोद ना बुर फ़ाड़ देगा क्या. ” मै मौसी की बुर चुदाई करता हुआ उसके बदन पर औंधा और ओंठ को चुमता हुआ बोला….. “साली रांड़ दस घाट का पानी पीकर बुर फ़ट्ने कि बात करती है, गांड़ उच्हाल साली. ” और स्नेहा तेजी से अपने चुत्तर को उपर निचे करते हुए मुझसे चुदवा रही थी ! मौसी की मांसल बुर मे लंड़ पेलकर मजा आ रहा था और अब लंड़ रस फ़ेंकने को तैयार था, मै चिंख पड़ा….. “आह्हह ऊम्मम्मम ऊन्नन्नन्नन्हह्हह्हह मौसी ले मेरी रस बुर को पिला साली. ” और उसके बुर मे विर्यपात कराकर उसके बदन पर निढाल हो गया ! फ़िर दोनो आराम किये और वापस घर चले गये…….

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