मॉम ने अपना असली चेहरा दिखाया

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दोस्तों,
कुछ काम करने में हरेक को मजा आता है तो कुछ काम देखने में, सड़क पर लड़कों के बीच लड़ाई झगड़ा हो या मोहल्ला में औरतों या लड़कों का उपद्रव, ये देखने में ही अच्छा लगता है ना कि उसमें शामिल होने में लेकिन अगर आप किसी अपनों को शारीरिक सम्बन्ध बनाते देखेंगे तो जी करेगा कि आप भी उनके साथ सेक्स में शरीक हो जाएं। ये वाकया तब की है जब मैं कच्ची कली थी और मेरे जिस्म पर किसी का भी हाथ तक नहीं लगा था साथ ही सेक्स का थोड़ा बहुत ज्ञान तो था लेकिन कभी किसी के साथ इस संदर्भ में बात तक नहीं की थी, यहां तक कि मेरी सहेलियां आपस में बॉय फ्रेंड के साथ रोमांस की बातें करती थी लेकिन उनके शुरू होते ही मैं वहां से चली जाती थी लेकिन मेरी इच्छा भी काम की ओर जाने लगा, मुश्किल से १८-१९ साल की उम्र थी तो मॉम और डैड का कड़ा अनुशासन तो सिर्फ अपने इंटर कॉलेज में जाकर क्लास करना फिर सहेलियों के साथ वापस घर। मेरी मॉम रेखा तभी ३६-३७ साल की जवान औरत थी तो उसका गोरा मुखड़ा, खूबसूरत बदन और सेक्सी फिगर किसी को भी मोहित करने लिए काफी थे और वो मॉडर्न ख्यालात की थी लेकिन मेरे पहनावे और घूमने फिरने पर कड़ा प्रतिबन्ध तो समझो मुझे कितना खराब लगता होगा जब मॉम को बेकलेश और बिन बाहों वाली ब्लाऊज पहनते देखती हूं लेकिन मुझे सलवार सूट साथ में सीने पर दुपट्टा रखना पड़ता था तो कॉलेज में मेरी सहेलियां मुझे बहन जी कहकर चिढ़ाती थी और एक दिन मेरे घर बुआ और फूफा जी आए तो मेरे डैड भाई बहन में सबसे बड़े थे, उनकी बहन जोकि २६-२७ साल की होगी और बुआ दीपाली के पति कीर्ति कानपुर कुछ काम से आए हुए थे तो उनका इकलौता बेटा बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई करता था। मेरी मॉम रेखा और बुआ जी बैठकर बातें कर रही थी तो मैं सबके लिए चाय बनाने गई, शाम का वक्त था तो राहुल भी टहलने निकला था और डैड ऑफिस से वापस नहीं आए थे, मैं चाय का प्याला एक ट्रे में रख डायनिंग हॉल गई फिर सब साथ ही चाय पीने लगे, मई की गर्मी और लू से परेशानी थी तो तीन बेडरूम में कौन कहां सोएगा ये समझ नहीं आ रहा था और फिर रात के दस बजे सब लोग खाना साथ ही खाए तो मॉम बोली ” राहुल तुम डायनिंग हॉल में सो जाओ और बुआ जी तुम्हारे बेडरूम में
( राहुल ) ठीक है मॉम ” फिर मैं अपने रूम चली गई और बेड पर लेटकर कूलर ऑन की, लंबा सा फ्रॉक पहन ली ताकि गर्मी कम लगे और सोने की कोशिश करने लगी फिर मैं गहरी नींद में सो गई, मेरे और राहुल के बेडरूम के बीच वाशरूम है तो उसका दरवाजा दोनों रूम में खुलता है, लगभग दो घंटे बाद मुझे तेज पिसाब लगी और मैं उठकर वाशरूम घुस मूतने लगी तभी मुझे बुआ जी के रूम से कुछ आवाजें सुनाई दी और मुझे लगा की कहीं बुआ और फूफा जी संभोग सुख में तो ब्यस्त नहीं है, दोनों के काम क्रिया को देखने की इच्छा फिर मैं अपने रूम में आई और रूम से निकल डायनिंग हॉल गई जिधर रूम की खिड़की खुलती थी। डायनिंग हॉल में छोटा भाई राहुल खर्राटे भर रहा था तो उसके रूम की खिड़की आधी खुली हुई थी, अंदर झांकी तो लाल रंग के नाईट बल्ब में बिस्तर पर दो जवान जिस्म एक दूसरे के साथ सेक्स में लीन थे और मुझे मॉम का चेहरा दिखा जोकि बेड पर चित लेटी हुई थी तो कीर्ति यानी मेरे फूफाजी उसकी बूब्स को चूसने में मस्त थे और दोनों को नग्न देख मन तड़प उठा तो कीर्ति मॉम के जिस्म पर सवार होकर उनकी चूची चूसने में लीन थे तो मॉम फूफाजी के चूतड सहला रहे थे लेकिन मेरी बुआ दीपाली किधर है? देखी तो वो करवट लिए सो रही थी, तभी फूफा मेरी मॉम के तन पर से उठे और मैं मॉम को पहली बार नग्न अवस्था में देख रही थी, बड़ी बड़ी चूचियां साथ ही ब्राउन नीपुल, मोटी चिकनी जांघें और तभी फूफा उठकर वाशरूम चले गए तो मॉम दोनों जांघें फैलाए अपनी चूत सहलाने लगी, ब्रेड पकोड़ा की तरह उनकी गद्देदार फांकें तो बिल्कुल बार नहीं और चूत के दरार खुले हुए आखिर पुरानी चुदक्क़ड जो ठहरी लेकिन फूफा के साथ शारीरिक सम्बन्ध, मॉम से ये अपेक्षा नहीं थी। पल भर बाद फूफा आए तो वो कमर से टॉवेल लपेटे हुए थे। मॉम के बगल में बैठे तो मॉम उठकर उनके पैर के पास बैठी और कमर से टॉवेल हटा दी, जीवन में पहली बार लंड महाराज का साक्षात दर्शन हो रहा था तो फूफाजी की उम्र ३२-३३ साल होगी और मॉम अब फूफा के लंड को पकड़ उसका चमड़ा छीलकर झुकी फिर लंड को चूमने लगी तो मेरी चूत में भी हरकत होने लगी, खैर भाई सो रहा था और मैं खिड़की से अंदर झांकते हुए अपना हाथ फ्रॉक में डाली फिर चूत को पेंटी पर से ही सहलाने लगी तो मेरी सेक्सी मॉम फूफा के लंड को मुंह में लिए चूसने लगी और उनका गोल गुंबदाकार गान्ड मेरी आंखों के सामने था। मॉम आराम से फूफा के ८-९ इंच लंबे और तीन इंच मोटे लन्ड को चूसते हुए उनकी जांघें सहला रही थी तो कीर्ति मॉम के सीने से लटकते स्तन को पकड़ दबाने में मस्त थे और मैं अपनी चूत को पेंटी के उपर से ही रगड़ने लगी, बुर के दरार में उंगली रगड़ रगड़ कर पेंटी तक को अंदर घुसा दे रही थी…. to be continued.

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