मेरी मां का आशिक : भाग-४

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हैलो फ्रेंड्स,
जिया का निर्मल मन अब खराब होने लगा, १३-१४ वर्ष की उम्र में ही अपनी मां को किसी गैर के साथ सेक्स करते देखी तो यकीनन मेरी सोच मॉम के लिए बदल गई और खिड़की की ओर आकर मैं देखी की मॉम बिस्तर पर नंगे लेटी हुई है तो रवि उनके स्तन को चूसने में मस्त है साथ ही दूसरे बूब्स को पकड़ मसले जा रहा है और रेणु कामग्नी की गिरफ्त में बंधी हुई आहें भर रही है ” उह ओह उफ़ रवि और जोर से चूसो ना आज तो तेरे साथ गांड़ चूद्वाऊंगी
( रवि उनके चूची मुंह से निकाला फिर मॉम को बोला ) डार्लिंग आज मैं जल्दी में हूं इसलिए एक बार चुद्वाकर मान जा ” मॉम चेहरा चमकाने लगी फिर रवि मॉम के नग्न पेट से लेकर कमर तक को चूमने लगा तो मेरी चूत में गुदगुदी होने लगी, मैं अब अपने स्कूल ड्रेस जोकि शर्ट और स्कर्ट था के अंदर हाथ घुसाई फिर अपने एक पैर आगे दीवार पर रख पेंटी की डोरी खोल दी, अब बुर में उंगली करने की इच्छा थी तो आजतक मैं अपने चूत में कभी भी उंगली या मोमबत्ती नहीं डालकर रगड़ी थी और अब देखी की मॉम के जांघो के बीच लंड पकड़े रवि बैठ गया, मॉम की ब्रेड पकोड़ा की तरह फूली हुई बुर और फैली हुई दरार साथ ही बार मुक्त चूत में उसका लंड घुसे जा रहा था तो मैं अपने हथेली पर थुकी फिर उसे अपने बुर पर रगड़ी, अब मां की बुर में लंड घुस चुका था तो मैं बुर में उंगली घुसाने लगी ” उह ओह अच्छा लग रहा है ” मैंने फुसफुसाया फिर देखी की मॉम के उपर सवार हुए रवि चोदने लगा तो मैं अपने टाईट चूत में अपनी लम्बी उंगली घूसाकर धीरे धीरे रगड़ने लगी, निश्चित रूप से योनि मार्ग उम्र और कर्म के अनुसार ही ढीला पड़ता है साथ ही फलक बढ़ती है तो मुझे खुद से बुर में उंगली रगड़ना अच्छा लग रहा था साथ ही दूसरे हाथ से मैं अपने छोटी छोटी चूची को पकड़ शर्ट के ऊपर से ही दबाने लगी और देखने लगी की मॉम किस कदर रवि को अपने जिस्म पर लिटाये बाहों में कसकर जकड़ी हुई थी और मैं उंगली से बुर को कुरेदते हुए मस्त होने लगी, इतना सुखद अहसास आज तक मुझे नहीं मिला था तो अब रवि को कसकर पकड़े रेणु अपने गोल गुंबदाकार चूतड़ को ही उछालने लगी, स्कूल बीच में ही छोड़कर आईं थी ताकि मॉम की चुदाई देख सकूं और फिलहाल मॉम अपने चूतड़ उछाल उछालकर चुदाने में मस्त थी। जिया बागान में खड़ी हुए जांघें फैलाए बुर में गपागप उंगली कर रही थी तो मेरी आंखें मॉम के सेक्सी बदन पर टिकी हुई थी, अब मॉम चूतड़ उछाल उछालकर हांफने लगी तो रवि उनके जिस्म पर से उतर वाशरूम चला गया।
कुछ पल बाद मेरी मां दीवार के सहारे घोड़ी बन गई तो उसके चूतड़ के सामने लंड पकड़े रवि खड़ा था फिर वो चूतड़ से नीचे लंड लगाया और यकीनन बुर में लंड पेलने लगा, क्या गुदाज कोमल चूत को कड़े लंड से चुदवाने को ही सेक्स कहते हैं! मैं तो बच्ची हूं इसलिए काम शास्त्र का कोई खास ज्ञान नहीं है लेकिन इतना मालूम है कि दो बदन का मिलन ही यौन सम्बन्ध कहलाता है और ये सिर्फ पति पत्नी के बीच होनी चाहिए, लेकिन रेणु जोकि मेरी मां है गैर मर्दों के साथ गुलछरे उड़ाने में मस्त है। दीवार पर दोनों हाथ रख जिस्म को घोड़ी की तरह किए खड़ी है तो रवि का ७-८ इंच लम्बा और दो इंच मोटा लंड दे दनादन अंदर बाहर हो रहा है और मैं अपने चूत में उंगली करते हुए लाईव सेक्स देखे जा रही हूं, मॉम अपने गोल गद्देदार चूतड़ को हिलाते हुए चुदाई को और मस्त कर दी तो रवि उनके सीने से लटकते चूची को पकड़ दबाने लगा, मॉम एक नंबर की चुदक्क़ड औरत थी जिसे अब तक दो लौंडे से चुदवाते मैंने देखी थी और रवि उनकी चुदाई करता हुआ पसीना पसीना हो चुका था तो मॉम ” आह ओह उह अब बुर से रस निकला ” तो रवि दो चार धक्के देकर लंड बाहर निकाला, मैं तो उसके लंबवत खड़े लंड देख ही तड़प उठी लेकिन मिलना मुश्किल था। मॉम अब बेड पर लेट गई तो रवि उनके चूतड़ के नीचे तकिया लगाया फिर रण्डी साली जांघें फैलाए बुर चटवाने का आमंत्रण दी, रवि अपना चेहरा जांघो के बीच लगाया फिर मैं देख पा रही थी कि केसे उसका जीभ मॉम के फैले चूत को चाट रहा है और मैं बुर से रस स्खलित होते ही उंगली निकाली फिर थोड़ी ढीली पड़ गई, बागान में लगे नल से पानी लेकर बुर को धोकर वापस खिड़की के पास आई तो मॉम बेड पर डॉगी स्टाईल में थी जिनके चूतड़ की ओर से बुर में लंड पेलकर रवि धकाधक चोदे जा रहा था तो मेरी सेक्सी मॉम अपने चूतड़ हिलाने लगी और रवि उनके सीने से लटकते चूची को पकड़ दबाने लगा, कुछ देर बाद रवि किसी दरिंदे कि तरह मॉम की बुर चुदाई करने लगा और हांफते हुए बोला ” उह ओह उफ़ अब और नहीं गांड़ हिला साली अब मेरा झड़ा ” और पल भर बाद कमरे के अंदर पूर्ण शांति थी, मॉम चूतड़ स्थिर की तो रवि लौड़ा निकाल वाशरूम चला गया और मेरी मां की बुर सफ़ेद चिपचिपे वीर्य से भरी हुई थी। मैं अब बागान से आगे की ओर गए फिर कुछ देर बाद रवि घर से निकला तो मैं घर में दाखिल हुई।

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