गुप्ता जी के कारनामे भाग 7

Posted on

उधर रजत फिर से बाहर आ कर शोरूम का काम देखने समझने लगा था और पीयूष फ्री बैठा हुआ रोजी और शकीला के बारे में सोच रहा वो सोच रहा था अब किसी दिन शकीला और रोजी को घर और एक साथ नंगी कर आराम से मज़े लेते हुए चोदना है वो रोजी की भी सैलेरी कुछ बढ़ाने की सोच रहा था ताकि रोजी उसकी कल्पनाओ और उसके सुख को पूरा करने में तन मन से उसका साथ दे…… पर रोजी थी कहाँ आज होती तो कम से कम उसे लौड़ा ही चुसवाता यही सोचते हुए वो अपने लंड पर हाथ फिराने लगा… तभी अचानक दरवाज़ा खुला और रोजी अंदर आ कर पीयूष के बगल में बैठ गयी पीयूष ने पूछा कहाँ गायब थी रोजी ने आंखे गोल घुमा कर कहा गायब नही थी पीयूष तुम्हारे लंड के लिए कुछ खुशी ढूंढने गयी थी और उसने अपना हाथ पीयूष के लंड पर रख दिया जो लगभग खड़ा ही था उसने मुट्ठी में लंड दबोच कर कहा किसकी याद में खड़ा है मेरे राजा का लंड सुबह सुबह पीयूष ने कहा यार वो सुनीता शकीला और तू तीनो ने मिल कर मेरा दिमाग खराब कर रखा है जी भर चोदने को कोई मिलती नही बस जरा जरा सा मज़ा सब से मिल। जाता है ऊपर से वो अंकिता कल से और मेरा लंड गरम कर रखी है और फिर वो कल शाम से आज सुबह तक घटी घटनाओ के बारे में रोजी को बताता चला गया ये सुनते ही रोजी की आंखों में चमकआ गयी और दिमाग मे एक प्लान चलने लगा उसने पीयूष का लंड बाहर निकाल लिया उसके ठोस सुपाड़े पर अंगूठा फिराने लगी…… उसने कहा पीयूष मैं सोच रही हूं तुम्हारे लंड के लिए कोई नन्ही सी सील पैक चूत का इंतज़ाम कर दूं जो तुम्हारी खास इच्छा है पर बदले में मुझे क्या मिलेगा पीयूष ने उसके डीप नेक ब्लाउज में हाथ घुसाया और उसकी चूची मुट्ठी में भर कर बोला क्या चाहती है तू बता ना रण्डी रोजी ने कहा मेरी सैलेरी डबल कर दो पीयूष ने कहा ठीक है इस महीने से तेरी सैलेरी 30000 done और कुछ रोजी ने बाकी तब जब मैं उस नन्ही चूत का पानी इस मुस्टंडे लौड़े को पिला दूंगी ये सुन कर पीयूष के लंड में कुछ एक्स्ट्रा तनाव आ गया जिसे रोजी ने महसूस किया और फिर झुक कर किसी भूखी कुतिया जैसे सुपाड़े को चाटने लगी पीयूष अब एक बार झड़ना चाहता था उसका लंड पागल हो रहा था वह रोजी के सर को लंड पर दबाते हुए सुपाड़ा उसके गले मे उतारने लगा रोजी अब लंड चूसने में एक्सपर्ट हो चुकी थी उसने गहरी सांस ले कर मुह और खोल दिया और सुपाड़े को हलक में घुस जाने दिया और पीयूष उसकी चूची की बुरी तरह मसलता हुआ कमर के धक्के मार कर उसका मुह चोदने लगा फिर रोजी ने लंड मुह से निकाला और पीयूष के सामने रखी मेज पर चढ़ गयी और पीयूष के सामने खड़ी हो कर अपनी गांड पीयूष की ओर कर दी और धीरे धीरे अपनी साड़ी और पेटीकोटअपनी कमर से ऊपर से उठा लिया आज उसने ब्लैक पैंटी पहनी थी जिसका कपड़ा एकदम सॉफ्ट था और उसके गोर मोटे नरम चूतड़ उस पैंटी में मुश्किल से समा रहे थे ये देख कर पीयूष ने अपने हाथों से लंड पकड़ लिया और उसे मसलते हुए रोजी की दिलकश गांड देखने लगा…. रोजी ने मुड़ कर उसे देखा और फिर मुस्कुराते हुए अपनी काली पैंटी झटके से नीचे सरका दी और थोड़ा सा झुक कर अपने हाथों से चूतड़ों को फैला कर अपनी गांड की दरार और छेद उसे दिखाने लगी पीयूष से रहा नही गया वो खड़ा हो कर रोजी के गोर चूतड़ों को पकड़ कर अपना चेहरा उसकी गांड पर रगड़ने लगा और चूतड़ों को चूमने लगा रोजी मस्ती में आती जा रही थी उसने धीरे से कहा पीयूष मेरी गांड को चूमो न और पीयूष पागलो की तरह उसके गांड के भूरे उभरे हुए छेद को चूमने लगा एक बार तो उसने जीभ भी फिरा दी उस जगह पर रोजी गनगना उठी तभी किसी ने दरवाज़ा नॉक किया और रोजी जल्दी से कपड़े सही कर के मेज़ से कूद गई पीयूष भी जल्दी से कुर्सी पर बैठ कर अपना लंड पैंट में ठूंसने लगा….. रोजी ने अपनी पैंटी उठा कर अपने पर्स में डाली और जा कर दरवाज़ा खोला रजत अंदर आ कर बैठ गया और बोला सर मैंने सब समझ लिया है अब आप चाहो तो जा सकते हो कहीं मैं यहां अच्छे से देख लूंगा पीयूष की झांट तो जली हुई थी रजत ने बीच मे आ कर उसका सारा मूड खराब कर दिया पर फिर भी उसने ये सोचा कि ये सही जगह भी तो नही इस काम के लिए और उसने अपना लंड एडजस्ट करते हुए कुर्सी छोड़ दी और बोला ठीक है मैं घर जाता हूँ लंच करूँगा आराम करूँगा फिर शाम को अपनी बेटी अंकिता के साथ आऊंगा उसे कुछ कपड़े लेने हैं और रोजी कल से तुम सुबह पहले मेरे घर आओगी और मुझसे इंस्ट्रक्शन ले कर फिर 11 -12 तक शोरूम आओगी और रजत की हेल्प करोगी…… रोजी ने यस सर बोला पर वो समझ रही घर पर उसे कैसे इंस्ट्रक्शन लेने हैं
फिर पीयूष बाहर आ गया घड़ी देखी तो 11:45 हो रहे थे वैसे वो कभी कभी ही पीता था पर आज वर्कलोड ना होने की वजह से उसका मन हुआ कि एक दो बियर का मज़ा लिया जाए तेज धूप थी और हल्की गर्मी लग रही थी….. आज चूंकि वो कार से आया था उसने पार्किंग से कार निकाली और यूँ ही शहर में घूमने लगा आज उसे अच्छा लग रहा था रोज की जिम्मेदारी से मुक्त वो जो चाहे कर सकता था अपने लिए वक़्त था उसके पास और यही तो वो चाहता था…… घूमते हुए एक बियर शॉप का बोर्ड दिखा उसने कार किनारे रुके और टहलते हुए दुकान पर आया वालेट से 500 का नोट निकाल कर दो बियर ली शॉपकीपर ने पूछा पियेंगे या पैक कर दूं उसने कहा एक पैक कर दो एक पियूँगा और उसने एक कैन खोल कर घूंट भरने शुरू कर दिए एक कैन पैक करवा कर वो फिर से कार में बैठा स्टार्ट की और घर की ओर चल पड़ा धीरे धीरे कार चलाते हुए वो हल्के घूँट भरते हुए सुनीता के बारे में सोचने लगा कि शायद वो घर आ गयी होगी खाना बनाने और इस टाइम घर पर कोई नही होगा अगर वो जा कर सुनीता को चोदने की कोशिश करे तो क्या वो उसे चोदने देगी…. यही सब सोचते हुए वो घर आ गया उसकी बियर खत्म हो चुकी थी खाली कैन को बाहर उछाल कर उसने मेनगेट खो, ला और कार गैरेज में लगा कर अंदर आया दरवाज़ा लॉक था यानी सुनीता अभी नही आई थी वो अंदर अपने रूम में गया और चेंज कर के पाजामे टीशर्ट पहन कर ड्राइंग रूम में आ गया….. और tv on कर के दूसरी बियर खोल ली और चुसकते हुए tv देखने लगा…..।
उधर सुनीता घर से निकल कर ऑटो पकड़ी और पीयूष के घर की ओर चल पड़ी रास्ते मे वो ये सोच रही थी कि आज तो बस साहब से सीधा बोल दूंगी की साहब मुझे चोद लो या फिर नंगी हो कर जा के उनकी गोद मे बैठ जाऊं क्यों कि पीयूष की इच्छा तो वो जान ही चुकी थी रोजी से बस आखिरी झिझक दूर कर के एक दूसरे से खुलना था ऑटो रुका वो उतरी पैसे दे कर उसने मेनगेट से अंदर एंट्री ली और लॉक खुला देख कर उसे समझ आ गया कि अंदर कोई है पर साहब तो इतनी जल्दी आते नही शायद राजीव या अंकिता में से कोई हो पर वो दोनों तो सुबह उसके सामने ही निकले थे अंकिता अपने स्कूल और राजीव दिल्ली जाने के लिए जरूरी सामानों की खरीद के लिए सोचते हुए उसने घंटी बजाई और पीयूष ने उठ कर दरवाज़ा खोला और सुनीता को देखते ही उसे झटका लगा रोज साधारण सी दिखने वाली सुनीता आज माल लग रही थी 42 साल की भरपूर जवान औरत कसा हुआ पीले रंग का सलवार सूट उसकी मोटी गांड भारी चुचिया और उभरा हुआ पेट देख कर पीयूष का लंड हरकत में आने लगा और पीयूष को ऐसे गौर से खुद को देखते देख सुनीता मुस्कुरा उठी और बोली अंदर आने दीजिये फिर जी भर कर देख लीजिए जैसे आपका मन करे पीयूष अंदर आ कर सोफे पर बैठ गया और बियर पीने लगा उसका दिमाग अब नशे में आ रहा था सुनीता दरवाज़ा बंद कर के ड्राइंग रूम में आई और पीयूष के सामने खड़ी हो गयी अपना दुपट्टा उसने उतार कर सोफे पर डाल दिया सीना तान कर चुचिया उभार कर पीयूष को दिखाने लगी पीयूष ने गहरी नजर से उसकी मोटी चुचिया देख कर अपना लंड मसला……. सुनीता ने उसकी ओर थोड़ा झुक कर कहा आज क्या खाएंगे साहब ऐसे झुकने से उसके कुर्ते के ढीले गले से उसकी ब्रा में कसी मोटी मांसल चुचिया पीयूष के सामने लटकने लगी और पीयूष उन्हें देख कर होठो पर जीभ फिराते हुए बोला सुनीता कुछ भी ख़िला दो पर मस्त बनाना सुनीता बोली साहब आज मस्त बना कर ही लायी हूँ आप खा कर देखो मस्त बना है या नही और अपने सीने को ऐसा झटका दिया कि उसकी चुचिया हिलने लगी हिलती हुई भारी चुचिया देखा कर पीयूष ने हिम्मत करते हुए दोनों हाथ से उसकी चुचिया पकड़ ली और मसल कर बोला आज तो जी भर के खाऊंगा सुनीता बहुत भूखा हूँ सुनीता ने अपना कुर्ता पकड़ा और उसे झटके से उतार कर बोली हाय साहब नंगी कर के खाइये ना ऐसे पेट कहाँ भरेगा आपका और उसने हाथ पीछे कर के ब्रा भी खोल दी और उसकी 38C साइज की चुचिया लटक गई पीईश के सामने निप्पल नुकीले और लंबे एकदम काले रंग के पीईश के मुह में पानी आ गया उसने मुह खोल कर एक चूची मुह में भर ली निप्पल को चूसते हुए दूसरी चूची को मसलने लगा सुनीता ने उसका सर पकड़ कर अपनी चूची पर दबाते हुए उसके बदन पाए हाथ फिराना शुरू कर दिया और एक हाथ नीचे ले जा कर पाजामे में खड़ा उसका लंड कस के पकड़ लिया और हाथों से दबाने लगी पर पीयूष का लंड किसी लोहे जैसा सख्त था और सुनीता पागल सी हो रही थी उसके लंड की गर्मी महसूस कर के पीयूष बारी बारी से उसके चूचे चूस रहा था निप्पल चाट रहा था और कभी उत्तेजना में वो सुनीता के निप्पल औए चुचो के नरम मांस में दांत भी गड़ा देता था सुनीता ने कभी इस तरह से चुचिया नही चुसवाई थी सो वो भी मज़े और उत्तेजना से पागल सी होने लगी और अफसोस भी हुआ उसे उसने इतनी देर क्यों कर दी इस सुख और मस्ती को पाने में फिर उसने पाजामे का नाडा खोल कर लंड बाहर निकाला और नंगे लंड को हाथों से टटोल कर उसका जायजा लेने लगी पीयूष रोजी की गांड़ चूम चाट रहा था जब रजत ने उसका खेल बिगाड़ा था तो उसने एकदम से चूची मुह से निकाल कर कहा सुनीता तेरी गांड़ चाटनी है मुझे और ये सुन कर सुनीता के मन में गुदगुदी सी हुई उफ्फ्फ गांड़ भी चाटी जाती है क्या पता नही बड़े लोगों के क्या क्या शौक होते हैं पर उसे क्या उसे तो मज़ा आ रहा था इस सब मे और फायदा तो होना ही था वो खड़ी हुई और अपनी सलवार का नाड़ा खोल कर उसे पैरों से निकाल दिया कल ही वैक्सिंग कराने की वजह से उसका गेहुआँ बदन बिना बालो के एकदम चिकना एयर चमकीला लग रहा था इतनी सब तैयारी के बाद भी एक कमी रह गयी थी उसने ब्रा तो खरीदी पर पैंटी खरीदना भूल गयी थी और वो अपनी रोजमर्रा वाली काली सूती सस्ती पुरानी पैंटी पहने हुए थी जिसका रंग उड़ा हुआ था उसकी गांड़ के छेद के ठीक सामने वो पैंटी एक रुपए के सिक्के जितनी फ़टी हुई थी सलवार उतार कर जब वो सिर्फ पैंटी में खड़ी हुई तो पीयूष ने उसे घूम कर अपनी गांड़ दिखाने को कहा वो घूमी तो पीयूष की नजर उसके सांवले मोटे चूतड़ोंके साथ साथ उसकी पैंटी के फटे हुए छेद पाए पड़ी वो देख कर उसका लंड एकदम से उछलने लगा और उसकी इच्छा हुई सुनीता की पैंटी फाड़ डालने की उसने सुनीता का हाथ पकड़ कर उसे अपनी जांघो पर बिठा लिया और उसके नंगे बदन पर हाथ फिराने लगा कभी वो सुनीता को जांघो को सहलाता कभी कमर को कभी नाभि में उंगली फिराता कभी उसके चुचो पर हाथ फिराता फिर वो बोला मेरी जांघो पर लेट जाओ उल्टी हो कर और सुनीता उसकी टांगो पर पेट के बल लेट गयी……, पीयूष ने उसे थोड़ा ऊपर खिसकने को कहा तो वो खिसक गई और अब सुनीता की पैंटी में फंसी हुई गांड़ पीयूष के सामने थी पीयूष उसके चूतड़ों पर हाथ फिराने लगा और सुनीता के बदन में झुरझुरी होने लगी उसके निप्पल सख्त होने लगा और चूत पानी टपका कर उसकी पैंटी भिगोने लगी फिर पीयूष ने उसकी पैंटी के छेद में उंगली डाल कर उसकी गांड़ के छेद को छूने की कोशिश की पर उसके चूतड़ ज्यादा ही भारी थे तो उसकी उंगली वहां तक पहुंची नही उसने कहा सुनीता….., सुनीता ने आंखे बंद किये हुए कहा जी सहाब पीयूष बोला तुम्हारी गांड़ का छेद नही दिख रहा इस पर सुनीता ने आने हाथ पीछे कर के आने चूतड़ फैलाते हुए कहा साहब पैंटी तो उतार दो ऐसे कैसे दिखेगा गांड़ का छेद ये सुन कर पीयूष ने उसकी पैंटी के फटे हिस्से में उंगलिया डाल कर उसे झटके से फाड़ दिया चररर कि आवाज़ के साथ पैंटी बीच से फटती गयी और सुनीता की गांड़ नंगी हो कर पीयूष के सामने आगयी…… सुनीता ने मुस्कुरा कर साहब की बेताबी और उत्तेजना को महसूस करते है फिर से आने हाथों से गांड़ फैला दी और उसकी गांड़ का काला कसा हुआ छेद देख कर पीयूष ने झुक का कर सुनीता की गांड़ के छेद को चूम लिया और जीभ की नोक से सहलाने लगा सुनीता इस हमले को झेल नही पाई और तेज सांसे लेती हुई अपनी चूत को पीयूष की जांघो पर रगड़ने लगी और सिसकती हुई बोली aahhhhhhhh बाबू जी आप तो बिना चोदे ही पागल कर रहे हो कब चोदोगे तब क्या होगा और पीयूष मस्ती में सुनीता की गांड़ के छेद को जीभ से कुरेद कुरेद कर चाट रहा था सुनीता की चूत पर घनी झांट थी वो कभी कभार ही कैंची से अपनी झांट काटती थी…..
सुनीता की झांट के बाल भी पीयूष के मुह में आ रहे थे और वो मस्ती में झांटो को चूसते हुए गांड़ के छेद को होठो में दबा कर पीने लगा तभी दरवाज़े की घंटी बजी और दोनों झटके से अलग हो कर अपने कपड़े दुरस्त करने लगे सुनीता ने फ़टी पैंटी के ऊपर सलवार पहन कर कुर्ता डाला और अपनी ब्रा सोफे के नीचे फेंक दी और उधर पीयूष पाजामे का नाड़ा बांधता हुआ अपनी बियर उठा कर अपने रूम में चला गया सुनीता ने जा कर दरवाज़ा खोला बाहर राजीव था वो रोजमर्रा की जरूरत का ढेर सारा सामान कई सारे बैग्स में लिए खड़ा था सुनीता ने उससे सामान लिया और अंदर आ कर रखवाया फिर वो किचन में जा कर काम करने लगी और राजीव अपने कमरे में जा कर अपने बैग पैक करने लगा……..
to be continued……

This content appeared first on new sex story .com

This story गुप्ता जी के कारनामे भाग 7 appeared first on dirtysextales.com