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Mama ki absent me mamiji ko choda

हैल्लो फ्रेंड्स,

मैं हाज़िर हूँ मेरे जीवन की सच्ची सेक्स की कहानी के साथ.. इस कहानी में आपको बताऊंगा की किस तरह मैंने मेरी मामी जी को नंगी देखकर चोदने का प्लान बनाया.

मेरा घर ओर मेरे मामा का घर आमने सामने ही है..
मामा एक दुकान पर काम करते है ओर मामीजी गृहिणी हैं..

पिछली कहानी में मैंने आपको बताया था की मेरे मामा सेक्स के काफी शौकीन हैं..
वो पोर्न साइट्स ओर पोर्न मूवीज देखते रहते हैं.. मैंने उनकी पोर्न मूवी का सीडी का कलेक्शन देखा था ओर उनकी मोबाइल की सर्च हिस्ट्री देखकर ही मुझे pata चल गया था की मामा काफी रंगीले इंसान हैं..
इसलिए वो मेरी मामी को बहुत चोदते रहते हैं..

उनके 4 बच्चे भी हैं.. इससे ही पता चलता हैं की मामीजी की चुदाई काफी बार हुई हैं..

मामीजी का बदन एक दम रसीला हैं.. बड़े बड़े बोबे वाली ओर एक बड़े छेद वाली चुत, जिसको मामा ने चोद चोद कर भोसड़ा बना दिया हैं..

पहले मामीजी को मैं गन्दी नज़रों से नहीं देखता था लेकिन एक दिन मेरे साथ ऐसी घटना हो गई जिसकी वजह से मैं मामीजी को चोदने के सपने देखने लगा..

मामीजी मेरे घर में ऊपर वाले फ्लोर मैं रहते हैं.. ओर मैं नीचे वाले फ्लोर में..

मेरे रूम में एक स्टोर रूम हैं ओर ऊपर वाले रूम में भी एक स्टोर रूम हैं. दोनों स्टोर एक के ऊपर एक बने हुए हैं.. ओर उपरवाले स्टोर के फ्लोर पर एक लोहे की जाली लगी हैं जो की मेरे रूम से छत की तरफ हैं जिससे आर पार देखा जा सकता हैं..

एक दिन मैं स्टोर में कुछ ढूंढ रहा था तभी मुझे ऊपर से पायजेब की आवाज आई.. मैंने ऊपर देखा था मामीजी स्टोर में थी ओर अलमारी से कुछ निकल रही थी..

मैंने स्टोर में अँधेरा किया हुआ था तो मामीजी को पता नहीं चला की मैं स्टोर में हूँ..

मामीजी ने मैक्सी पहनी हुई थी जो नीचे से खुली हुई रहती हैं..

मैंने जैसे ही ऊपर देखा तो मेरे तो होश ही उड़ गए..

मुझे मामीजी की मैक्सी के अंदर से चड्डी साफ़ दिख रही थी ओर उनकी गोरी गोरी ओर मोटी मोटी जाँघे भी दिख रही थी.. मैं वहीं बैठकर नज़ारे देखने लगा..

फिर मामीजी वापस रूम में चली गई..

उसके बाद कई बार मैंने ये नज़ारा देखा, क्यों की में मामीजी के स्टोर रूम में जाने का इंतज़ार करता रहता था.. ओर जैसे ही वो स्टोर में जाती, मैं भी स्टोर में जाकर उनकी मैक्सी के अंदर से उनकी चड्डी देखता ओर उनकी जाँघे देखता..

मामीजी जब भी घर से बाहर जाती तब में ऊपर चला जाता था ओर उनके कपड़ों से खूब खेलता था..

उनकी दोनों लड़किया तो ससुराल हैं ओर बाकि के 2 बच्चे स्कूल चले जाते, मामा उनकी शॉप पर चले जाते..
मेरे घरवाले भी काम धंधे पर चले जाते..

घर में मैं नानी के साथ दिन भर अकेला ही रहता था तब मैं ऊपर चला जाता था ओर बाथरूम में चला जाता.. वहाँ पर अधिकतर मामी की चड्डी पड़ी रहती थी जो मामी नहाकर, धोकर फिर सुखाकर जाती थी..

मैं मामीजी की चड्डी लेकर उसको सूंघता, उस पर अपना लण्ड रगड़ता, उसको लण्ड पर लपेट कर मुठ मरता था ओर जब मेरा माल चड्डी पर निकल जाता तो मैं उसको फिर से धोकर सूखा देता था..
ये सब करने से मुझे बहुत मजा आने लगा था ओर ऐसा लगभग रोज ही होने लग गया था..

मैं मामीजी की ब्रा से भी बहुत खेलता था ओर उस पर भी अपना लण्ड रगड़कर माल निकलता था..

मामीजी के साथ में अब ज्यादा वक़्त बिताने लग गया.. जब वो खाना बनती थी तो मैं पीछे चेयर पर बैठकर उनसे बाते करता, ओर उनकी मोटी मोटी गांड को हिलती हुई देख कर मजा लेता.. ओर जब वो मेरे सामने होती तब उनके मोटे मोटे बोबे के बीच का क्लीवेज देखकर बहुत उत्साहित हो जाता था..

अब मेरी इच्छा मामीजी का नंगा बदन देखने की थी..
ओर एक दिन मेरी किस्मत ने मेरा साथ दिया..

मैंने मामीजी के बाथरूम के गेट का एक स्क्रू निकाल दिया.. उनका गेट वैसे भी बुरी हालत में था बंद करने में ओर खोलने में बहुत मुश्किल होती थी..

मामीजी अंदर गई ओर नहाने लगी.. ओर फिर मैं भी बाथरूम में बाहर चला गया ओर जहाँ से मैंने स्क्रू निकाला था उसी छेद से मैं देखने लगा..

उस दिन मामीजी ने साड़ी ब्लाउज पहना हुआ था..

मामीजी ने अपने कपडे उतरना शुरू किया.. सबसे पहले साड़ी उतारी..फिर ब्लाउज उतारा ओर फिर ब्रा उतार के ये सब धोने लगी..

मामीजी का मुँह गेट की तरफ ही था इसलिए मुझे सब साफ़ साफ़ दिख रहा था.. मामीजी के बड़े बड़े बोबे देखकर तो मैं जैसे सुन्न हो गया…

मोटे मोटे गोर गोर बोबे ओर उनके ऊपर भूरे भूरे रंग के चौड़े चौड़े निप्पल.. जैसे जैसे मामीजी कपडे धो रहे थे वैसे वैसे उनके बोबे हिल रहे थे जो बहुत ही सेक्सी लग रहे थे..

फिर मामीजी खड़े हुए ओर पेटीकोट का नाडा खोल दिया..
मामीजी का पेटीकोट नीचे गिर गया ओर मामीजी वापस नीचे बैठ गई.. अब मामीजी के जिस्म पर सिर्फ एक चड्डी थी.. जिसकी खुलने का में बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था..

मामीजी ने हाथ पैर साबुन से धोये ओर फिर बोबों पर साबुन लगा कर मसलने लगी.. ये देखकर मेरा लण्ड एक दम तन गया था.. मेरा हाथ मेरे लण्ड पर चला गया ओर मैं ऊपर से ही लण्ड को सहलाते सहलाते मामीजी का बदन देख रहा था..

फिर मामीजी ने चड्डी में हाथ डाला ओर अपनी झांटों ओर चुत पर साबुन रगड़ने लगी ओर फिर खड़ी होकर चड्डी खोल के नीचे गिरा दी ओर बदन पर पानी डालने लगी..

मामीजी मेरे सामने एक दम नंगी खड़ी थी उनकी नाभि काफी गहरी थी ओर उनकी चुत का तो क्या ही कहना..

काली काली फैली हुई चुत जिन पर झांटों का गुच्छा था.. देखकर लगता था की मेरे मामा को झांटों वाला भोसड़ा पसंद होगा इसलिए मामीजी ने अपने भोसड़े पर इतनी झांटे रखी हुई थी..

मेरे लण्ड से पानी आने लगा ओर मेरा गला भी काफी सुख गया था मामीजी का नंगा जिस्म देखकर..

अब मेरा मन मामीजी को चोदने का होने लगा…
में दिन रात मामीजी के नंगे बदन के बारे में सोचने लगा ओर कई बार मुठ मार लेता..

एक दिन मामा के दोनों बच्चे उनके ननिहाल गए हुए थे.. तब रात के 2 बजे मैं बाथरूम जाने को उठा.. तब मुझे किसी के कराहने की आवाजें आ रही थी, मैंने थोड़ा गौर किया तो पता चला वो आवाजें ऊपर से आ रही थी..

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मैं सीढिया चढ़ता चढ़ता आवाज को सुन रहा था तो आवाज ओर तेज होती जा रही थी.. ओर ऊपर चढ़ा तो पता चला की यहाँ का माहौल तो पूरा गरमाया हुआ हैं..

मामा को 2 दिनों के लिए किसी काम से बाहर जाना हैं तो वो आज मामी को संतुष्ट कर रहे हैं..

मैं वहीं गेट के बाहर से आवाजें सुनने लगा,, अंदर ताबड़तोड़ चुदाई चल रही थी.. ओर मामीजी की आआअह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह की आवाजें आ रही थी ओर फच्च फच्च की आवाजें सुनाई दे रही थी..

मामीजी बोल रही थी की 2 दिनों के लिए जा रहे हो तो 2 दिनों तक मेरी चुत में जलता रहे, इतना चोदो मुझे..

ओर मामा उनके भोसड़े में धक्के मार मार कर उनकी बुरी तरह से ले रहे थे..

थोड़ी देर में मामा पिघल गए ओर मैं भी नीचे जाकर सो गया..

दूसरे दिन मामा निकल गए ओर नानीजी को मेरे बोलकर गए थे की मामी अकेली हैं, बच्चे बच्ची ननिहाल गए हैं तो आप इसको ऊपर मामीजी के साथ सोने को बोल देना..

ओर नानी ने मुझे ये बोल दिया की तू 2 दिन ऊपर ही सो जाना मामीजी के पास..

में तो खुशमखुश हो गया ओर रात होने का इंतज़ार करने लगा..

रात होते ही मैंने खाना वाना खाया ओर ऊपर पहुंच गया..

मामीजी ओर हम दोनों बेड पर सो गए..

मेरा मन तो मामीजी की चुदाई करने का था तो मुझे नींद नहीं आ रही थी लेकिन मामीजी दिन भर की थकन की वजह से सो गई..

उस रात भी मामीजी ने मैक्सी पहनी हुई थी.. ओर चद्दर ओढ़ रखी थी..

मेरा बहुत कुछ करने का मन कर रहा था लेकिन डर के मारे हिम्मत नहीं हो रही थी की कुछ करू.. तो में सोया सोया सिर्फ सोच ही रहा था.. तभी मामीजी ने चद्दर पैरों से नीचे खिसका दी, क्यों की उनको गर्मी लगने लगी थी..

थोड़ी देर बाद हवा से उनकी मैक्सी घुटनों तक आ गई ओर उनकी गोरी गोरी टाँगे देखकर मुझे तो नहीं रुका जा रहा था..

मैं हिम्मत करके मैक्सी को धीरे धीरे ऊपर करने लगा.. ओर मैक्सी जाँघों तक चढ़ा दी.. अब मामीजी की गोरी गोरी जाँघे मेरे सामने थी..

फिर मामीजी ने एक करवट बदली ओर मेरी तरफ पीठ करके सो गई..

मैं भी थोड़ा आगे खिसका ओर मामीजी की गांड पर अपना लण्ड छूने लग गया…

फिर मैंने मामीजी की मैक्सी को कमर तक ऊपर कर ली तो मुझे मामीजी की चड्डी दिख गई..

अब में मामीजी की गांड से चिपक गया ओर उनकी चड्डी पर लण्ड रगड़ने लगा..

मामीजी का कोई रेस्पॉन्स नहीं था तो मेरी हिम्मत ओर बढ़ी..

मैंने अपनी चड्डी से अपना लण्ड निकाला ओर मामीजी की चड्डी पर रगड़ने लगा.. मामीजी की गांड काफी गरम गरम महसूस हो रही थी..

मैंने एक हाथ आगे ले जाकर मामीजी की जाँघों के बीच रखा ओर उनकी चुत सहलाने लग गया..
मैं बिलकुल धीरे धीरे सहला रहा था इसलिए मामीजी को पता नहीं चल रहा था..

मेरा लौड़ा एक दम खड़ा हो गया था ओर मामीजी की गांड को रगड़ रहा था, तो मामीजी को थोड़ा महसूस होने लग गया था..
लेकिन जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने मामीजी की चड्डी में हाथ डाल दिया ओर उनकी चुत काफी गहराई तक सहलाने लगा.. ओर मेरा मुँह उनकी गर्दन के पास था तो मेरी गरम गरम साँसों, मामीजी की चुत का सहलाना ओर गांड पर लण्ड की रगड़ से मामीजी काफी रोमांटिक हो गई थी ओर उनको भी सेक्स का नशा चढ़ गया..

जब मुझे पता चला की मामीजी जाग रही हैं लेकिन वो गुस्सा नहीं कर रही, बल्कि वो मजा ले रही हैं, मैंने मामीजी को गले से चूमना शुरू कर दिया..

अब तो मामीजी की चुत पानी छोड़ने लगी थी..ओर मुँह से सिसकारियां निकालने लगी..

फिर मैंने मामीजी को सीधा लेटाया ओर उनकी चड्डी खोलकर उनकी भोदी चाटने लगा ओर ऊँगली चुत में डालकर अंदर बाहर करके चुत चाटने लगा..

मामीजी ने अपनी मैक्सी ऊपर की ओर पूरी खोल दी.. ओर फिर ब्रा भी खोलकर नंगी हो गई ओर गांड उठा उठा कर मुझसे अपनी चुत चटवाने लगी..

मैंने बहुत देर तक उनकी चुत का रसपान किया..
फिर में उनके बोबे मसलने लगा.. ओर मसल मसल कर चूसने लगा..

मामीजी आआआह्ह्ह्हह्ह आआआह्ह्ह्हह्ह आआह्ह्ह्ह आआआआहहहहह वाली आवाजें निकल रही थी..
फिर मैं पलंग पर लेट गया ओर मामीजी मेरा लण्ड पकड़ कर चूसने लगी…

मामीजी लण्ड चूसने मैं बहुत ही एक्सपर्ट हैं.. पूरा गले तक लेकर लण्ड से अपने गले को चोदती हैं… ओर फिर लण्ड पर वापस थूक कर गीला करती हैं ओर उसको वापस चूसती हैं..

मुझे भी स्वर्ग के मजे दे रही थी..

फिर मामीजी मेरे दोनों तरफ पैर करके मेरे लण्ड पर अपनी चुत सेट की ओर उस पर बैठ गई..

मेरा लण्ड मामीजी की चुत में घुस गया..

मामीजी की चुत इतनी ढीली हैं की सिर्फ एक बार की कोशिश में मेरा लण्ड उनकी चुत की गहराइयों में उतर गया..

दोस्तों, मामीजी ने अपनी चुत को चुदवा चुदवा कर ऐसा भोसड़ा बनवाया हैं, तो उसको चुत बोलना शायद उनके भोसड़े की इंसल्ट होगी…

अब मैं मामीजी के बालो वाले भोसड़े को मेरे लण्ड से पेले जा रहा था ओर मामीजी भी गांड उछाल उछाल कर अपना भोसड़ा चुदवा रही थी..

फिर मैंने मामीजी को नीचे लेटाया ओर उनके भोसड़े मे मेरा लण्ड डालकर मैं उनके ऊपर लेट गया ओर उनको चोदने लगा…

मामीजी का भोसड़ा किसी रांड से कम नहीं था, ओर मामीजी किसी रांड की तरह मुझसे चुदवा रही थी…

थोड़ी देर मेरे मैंने उनके भोसड़े में मेरा माल निकाल दिया ओर मामीजी के ऊपर ही लेट गया..

उस रात मैंने मामीजी को 3 बार चोद कर संतुष्ट किया.. ओर मामीजी भी मेरे मोटे लण्ड से चुदवा कर काफी खुश थी..

अगली रात भी हमने चुदाई का भरपूर आनंद लिया..

The end……….

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