पंजाब दियां रंगीन जट्टीयां – पार्ट – 10

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हेल्लो दोस्तो मे गौरव कुमार हाज़िर हू स्टोरी का नेक्स्ट पार्ट लेकर।

दिन भर सोने के बाद सरबी अन्ग्ड़ाई लेती हुई और फ्रेश होने चली गयी। फ्रेश होने के बैड सर्बी ने चाय बनायी और आपमे सास ससुर को दी ओर खुद भी अपने बैड रुम मे आकर चाय पीने लगी। सरबी ने अभी चाय की चुस्की ही ली थी की उसका फोन बज पढ़ा, सरबी ने नम्बर देखा तो नया नम्बर था। ” हेल्लो ” सरबी ने फ़ोन उठकर बोला।
” केसी है जट्टी, लाला बोल रहा हू ” बनवारी लाला ने सरबी की सुनकर कहा।
लाला की अवाज सुनकर सर्बी शर्मा सी गयी, ” अची हू लाला जी अप केसे है “।
” मे भी बस ठीक हू जान तेरे बिना केसा हो सक्ता हू ” लाला ने जवाब दिया।
” क़्यो लाला जी मेरे बिना मतलब, मे समझी नही ” सरबी ने मुस्कुरते हुए कहा।
” मतलब तेरी याद आ रही थी जट्टी, कल रात तक तो तू मेरे साथ थी ” लाला ने लंड म्सल्ते हुए कहा।
रात का जिकर आते ही सरबी शर्मा गयी, ” लाला जी आप भी “।
” लय मे भी जान, तेरी याद मे ये छोटा लाला खडा है अज फिर ” लाला बोला।
” तो उसे बिथा दिजीये ना लाला जी, खडा खडा थक जायेगा बेचारा ” सरबी ने भी अब बेशरमी से जवाब दिया।
” केसे बिठा दु जान, बोल रहा है के जट्टी आयेगी तो उसके हाथो मे ही बेठना है। ” लाला ने लंड को मसला।
” हाये जट्टी तो फिर कछ दिन रुक कर आयेगी ” सरबी ने कहा।
” कित्ने दिन जान ” लाला ने पुछा।
” कुछ दिन तो रुकिये लाला जी, अच्छा रख्ती मे फोन ”
इत्ना कहते हुए सरबी ने फोन काट दिया।
फोन काटते वक़्त जेसे ही सरबी ने टाईम देखा तो वो हेरान हो गयी।
” हे भगवान 4बज ग्ये ओर अबी तो मुझे बाज़ार से सब्जी भी लानी है ” सरबी सोच्ने लगी और उसने जल्दी जल्दी चाय खतम की और तैयार होकर बाज़ार की और चल दी। बाज़ार जाते वक़्त जेसे ही सरबी भूरा के घर के पास से गुजरी तो भूरा ने उसे देख लिया। भूरा ने जल्दी जल्दी अप्ने कपडे पहने और मोटरसाइकिल पर सरबी के पीछे पीछे चल दिया।
बाज़ार मे पहुंच भूरा ने बाइक पार्किंग मे लगा दी और पैदल ही सरबी का पीछा करने लगा। सरबी को भूरा का पता नही था के वह उसका पीछा कर रहा है, इस्लिये वो अपने ही ध्यान मे बाज़ार मे सब्जी वाली दुकाने देखती जा रही थी और एक दुकान पर रुकी, ” टिंड़े का क्या भाव है ” सरबी ने पुछा। ” 30रुपय किलो ” दुकानदार बोला। ” 30रुपए इतना महँगा कौन लेगा ” कहती हुई सरबी आगे बढ गयी। भूरा भी सरबी के पीछे ही था।
आगे एक दुकान पर जाके सरबी फिर से रुकी, ” लोकी किस रेट पे दे रहे हो “।
” 15रुपए बहन जी ” औरत ने जवाब दिया।
” 1किलो कर दो ” सरबी ने कहा।
वही पर भूरा भी आ गया, ” खीरा क्या भाव दिया रानी “।
” अरे भूरा तू, इत्ने दिन बाद केसे आ गया आज, 10रुपए किलो है ” औरत ने जवाब दिया। सब्जी वाली का नाम रानी था, उमर 34, फिगर 36-34-38और भूरा उसे जानता था। रानी अक्सर रितु के द्वारा कोठो पर जाती थी, और भूरा भी कई बार उसकी जवानी का मजा चख चुका था।
” बस यही होता हू रानी कभी टाईम ही नही लगा, अरे भाभी जी आप ” भूरा सरबी को देखकर बोला, ” नमस्ते भाभी जी “।
” नमस्ते ” सरबी मे भी भूरा को बुलाया।
” सब्जी लेने आयी है भाभी जी ” भूरा ने पुछा।
” हा भूरा जी, वो काम पर थे तो मे खुद आ गयी ” सरबी ने उत्तर दिया।
” ए रानी हमारी भाभी जी है, जायज रेट लगाना जो भी ले, ” भूर रानी को देख कर बोला।
” अरे हा भूरा तुमने बोल दिया समझो हो गया ” रानी ने भी हस्ते हुए जवाब दिया।
सरबी ने कुछ सबजी ली और जाने लगी तो भूरा ने फिर सरबी को बुलाया ” अरे भाभी जी हम छोड़ देते है आपको कहा पैदल जायेगी या रिक्सा करेगी “।
” अरे नही देवर जी मे चली जाओगी ” सरबी ने कहा।
” अरे कया भाभी जी देवर भी कहती हो और मना भी करती हो, आईये आप मे छोड़ देता हू आपकों ” भूरा ने जोर दिया तो सरबी साथ चल पड़ी।
पार्किंग से भूरा ने अपना मोटरसाइकिल निकाला और स्टार्ट किया, ” बेठीये भाभी जी “। सरबी पीछे बेठ गयी तो भूरा ने मोटरसाइकिल गियर मे डाला और चल दिया। भूरा मोटरसाइकिल धीरे चला रहा था और बीच बीच मे ब्रेक लगा रहा था जिस से सरबी के मम्मे भूरा की पीठ से चिपक जाते। मोटरसाइकिल भूरा ने अपने घर के साम्ने रोक ली, ” आईए भाभी जी चाय पिलता हू आपको “। ” अरे नही देवर जी हम पहले ही बहुत लेट है अभी सब्जी भी बनानी है ” सरबी बोली।
” अरे तो कया हुआ भाभी जी एक कप चाय पी लिजिये ना 5मिंट लगेगे बस, आईए आप ” भूरा सरबी को बोला। ” अरे देवर जी, अच्छा ठीक है चलिये ” सरबी भी अब भूरा के साथ घर मे चली गयी।
भूरा जल्दी जल्दी चाय बना के ले आया ओर बिस्किट भी। ” लिजिये भाभी जी, बताईये केसी बनी है ” भूरा चाय रखते हुए बोला। सरबी ने चाय उठाई और एक चुस्की ली, ” केसी बनी है भाभी जी चाय ” भूरा बोला।
” अच्छी है ” सरबी बोली। ” अरे भाभी जी आप तो शर्मा रही है, शर्माइये मत अप्ना ही घर समझिये ” भूरा बोला। सरबी चाय पी रही थी और भूरा सरबी के जिस्म को निहार रहा था।
” भाभी जी एक बात बोले अगर बुरा ना माने तो ” भूरा ने कहा।
” कया देवर जी ” सरबी भूरा को देख बोली।
” आप हो एक दम मस्त कली ” भूरा सरबी को देख्ते हुए बोला।
भूरा की बात सुन सरबी शरम से लाल हो गयी।
” अरे मजाक कर रहा हू भाभी जी अप तो शर्मा गयी ” भूरा हस्ते हुए बोला।
” आप भी बहुत शरारती हो देवर जी ” सरबी भी मुस्कुराती हुई बोली।
” अच्छा देवर जी मे चलती हू ” सरबी चाय का कप रखती हुई बोली।
” फिर कभी बाज़ार जाना हो तो बता देना भाभी जी ” भूरा सरबी को बोला।
” हा देवर जी जरुर ” कहती हुई सरबी बाहर निकली और अपने घर को चल दी।

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